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बच्चों की उम्र कम करानी है, फर्जीवाड़ा भी चलेगा
बरेली
Updated Thu, 02 Apr 2015 01:26 AM IST
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केस- 1
आलोक नगर के प्रतिपाल सिंह ने अपनी बेटी का पहला जन्म प्रमाणपत्र 17 मार्च 2011 को बनवाया था। अब उन्होंने नगर निगम में झूठा शपथ पत्र देकर जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए दोबारा आवेदन कर दिया।
केस- 2
शील अस्पताल में 15 जुलाई 1996 को पैदा हुई बच्ची के पिता प्रदीप कुमार उसका जन्म प्रमाणपत्र 19 जुलाई 2010 को नगर निगम से बनवाकर ले गए। अब उन्होंने बच्ची का जन्म 1998 में दर्शाकर दोबारा आवेदन कर रखा है।
केस- 3
बानखाना में रहने वाले जयप्रकाश की बेटी 29 मार्च 2010 को घर में पैदा हुई। 30 मई 2013 को बेटी का जन्म प्रमाण पत्र जारी किया गया। अब पिता को 20 अप्रैल 2012 उसकी पैदाइश का प्रमाण पत्र चाहिए।
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अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। स्कूलों में दाखिलों का सीजन क्या शुरू हुआ, बच्चों की उम्र कम कराने के लिए नगर निगम में जन्म प्रमाणपत्र के लिए फर्जी आवेदनों की बाढ़ सी आ गई है। अभिभावक बच्चों की उम्र कम कराने के लिए झूठे शपथ पत्र तक देने से नहीं हिचकिचा रहे हैं। पिछले तीन महीने में नगर निगम में साढ़े तीन सौ से ज्यादा ऐसे आवेदन आ चुके हैं, जिनके पहले ही प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। खास यह है कि झूठे शपथ पत्रों पर भी सिटी मजिस्ट्रेट के दफ्तर से जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की अनुुमति आसानी से मिल रही है।
उत्तर प्रदेश जनहित गारंटी अध्यादेश 2011 के मुताबिक नगर निगम या नगर पालिकाओं में जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र आवेदन के 45 दिन बाद जारी किए जाने की व्यवस्था है। नियमानुसार अगर किसी का जन्म या मृत्यु होने के एक साल के अंदर पंजीयन नहीं कराया गया है तो उसकी सत्यता का सत्यापन करने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट निर्धारित फीस पर ही प्रमाण पत्र जारी करने के अनुमति देंगे। नए शिक्षा सत्र में दाखिले से पहले बच्चों की कम उम्र का प्रमाण पत्र बनवाने के लिए इन सारे नियमों की अनदेखी की जा रही है। पिछले तीन महीनों में नगर स्वास्थ्य अधिकारी के दफ्तर में जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के करीब 1600 आवेदन आए हैं, इनमें लगभग साढ़े तीन सौ आवेदन ऐसे बच्चों के लिए हैं जिनके जन्म प्रमाण पत्र पहले से जारी हो चुके हैं। ऐसे अभिभावकों को चेतावनी देकर आवेदन निरस्त किए जा रहे हैं। चूंकि पहले जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र ऑनलाइन नहीं बनते थे, इसलिए इसके बावजूद कुछ बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र दोबारा बनने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।
किसी का भी जन्म प्रमाण जारी करने से पहले सख्ती से जांच करने के आदेश दिए गए हैं। जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र दो बार जारी होने पर संबंधित लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. एसपीएस सिंधू, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
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आलोक नगर के प्रतिपाल सिंह ने अपनी बेटी का पहला जन्म प्रमाणपत्र 17 मार्च 2011 को बनवाया था। अब उन्होंने नगर निगम में झूठा शपथ पत्र देकर जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए दोबारा आवेदन कर दिया।
केस- 2
शील अस्पताल में 15 जुलाई 1996 को पैदा हुई बच्ची के पिता प्रदीप कुमार उसका जन्म प्रमाणपत्र 19 जुलाई 2010 को नगर निगम से बनवाकर ले गए। अब उन्होंने बच्ची का जन्म 1998 में दर्शाकर दोबारा आवेदन कर रखा है।
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केस- 3
बानखाना में रहने वाले जयप्रकाश की बेटी 29 मार्च 2010 को घर में पैदा हुई। 30 मई 2013 को बेटी का जन्म प्रमाण पत्र जारी किया गया। अब पिता को 20 अप्रैल 2012 उसकी पैदाइश का प्रमाण पत्र चाहिए।
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अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। स्कूलों में दाखिलों का सीजन क्या शुरू हुआ, बच्चों की उम्र कम कराने के लिए नगर निगम में जन्म प्रमाणपत्र के लिए फर्जी आवेदनों की बाढ़ सी आ गई है। अभिभावक बच्चों की उम्र कम कराने के लिए झूठे शपथ पत्र तक देने से नहीं हिचकिचा रहे हैं। पिछले तीन महीने में नगर निगम में साढ़े तीन सौ से ज्यादा ऐसे आवेदन आ चुके हैं, जिनके पहले ही प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। खास यह है कि झूठे शपथ पत्रों पर भी सिटी मजिस्ट्रेट के दफ्तर से जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की अनुुमति आसानी से मिल रही है।
उत्तर प्रदेश जनहित गारंटी अध्यादेश 2011 के मुताबिक नगर निगम या नगर पालिकाओं में जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र आवेदन के 45 दिन बाद जारी किए जाने की व्यवस्था है। नियमानुसार अगर किसी का जन्म या मृत्यु होने के एक साल के अंदर पंजीयन नहीं कराया गया है तो उसकी सत्यता का सत्यापन करने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट निर्धारित फीस पर ही प्रमाण पत्र जारी करने के अनुमति देंगे। नए शिक्षा सत्र में दाखिले से पहले बच्चों की कम उम्र का प्रमाण पत्र बनवाने के लिए इन सारे नियमों की अनदेखी की जा रही है। पिछले तीन महीनों में नगर स्वास्थ्य अधिकारी के दफ्तर में जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के करीब 1600 आवेदन आए हैं, इनमें लगभग साढ़े तीन सौ आवेदन ऐसे बच्चों के लिए हैं जिनके जन्म प्रमाण पत्र पहले से जारी हो चुके हैं। ऐसे अभिभावकों को चेतावनी देकर आवेदन निरस्त किए जा रहे हैं। चूंकि पहले जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र ऑनलाइन नहीं बनते थे, इसलिए इसके बावजूद कुछ बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र दोबारा बनने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।
किसी का भी जन्म प्रमाण जारी करने से पहले सख्ती से जांच करने के आदेश दिए गए हैं। जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र दो बार जारी होने पर संबंधित लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. एसपीएस सिंधू, नगर स्वास्थ्य अधिकारी