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निगम शांत हुआ तो ‘दफन’ हो गई विवेचना
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बरेली। नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. और मेयर उमेश गौतम व निगम पार्षदों के बीच घमासान मचा तो कोतवाली में एक-एक कर पांच मुकदमे दर्ज कराए गए। इनमें तीन मुकदमे नगर निगम की ओर से लिखाए गए। एक सिटी मजिस्ट्रेट और एक सिविल लाइंस चौकी इंचार्ज ने दर्ज कराया था। मगर सारे मुकदमे दर्ज होकर फाइलों में ‘दफन’ कर दिए गए हैं। नगर आयुक्त और मेयर के बीच समझौते के बाद पुलिस इनमें एफआर लगाने की तैयारी में है।
पहली रिपोर्ट पोर्टेबल शॉप प्रकरण में नगर निगम के राजस्व निरीक्षक की ओर से पार्षद विनोद सैनी और व्यापारी दर्शनलाल भाटिया के खिलाफ दर्ज कराई गई थी। इसके विरोध में पार्षदों ने नगर आयुक्त के खिलाफ निगम परिसर में धरना प्रदर्शन किया तो दूसरी रिपोर्ट तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार ने धारा 144 का उल्लंघन करने के आरोप में पार्षदों के खिलाफ लिखा दी। तीसरी रिपोर्ट नगर निगम के कार्यालय अधीक्षक आरपी सिंह ने लिखाई थी, जिसमें नगर आयुक्त को अपने कार्यालय में न बैठने देने, उनके पुतले पर थूकने और जूता मारने का आरोप पार्षदों पर लगाया गया था। एक अन्य रिपोर्ट सिविल लाइंस चौकी इंचार्ज सतवीर सिंह ने नगर आयुक्त का पुतला फूंकने के आरोप में पार्षदों पर दर्ज कराई थी। पांचवीं रिपोर्ट निगम के नगर स्वास्थ्य अधिकारी संजीव प्रधान ने मेयर उमेश गौतम और पार्षदों के खिलाफ लिखाई थी।
इनमें तीन मुकदमों की विवेचना सिविल लाइंस चौकी प्रभारी सतवीर सिंह को दी गई थी। चौकी इंचार्ज सतवीर सिंह की ओर से लिखाए गए मुकदमे की विवेचना दरोगा प्रशांत को दी गई, जिनका जिले से बाहर तबादला हो गया। सूत्रों के मुताबिक शुरुआत में इन मुकदमों में एक-दो पर्चे काटे गए और फिर विवेचना ठंडे बस्ते में डाल दी गईं। अब इन मुकदमों में एफआर लगाने की तैयारी है। सबसे पहले मेयर के खिलाफ दर्ज मुकदमे में एफआर लगाई जा सकती है, जिसके लिए पुलिस को समझौता पत्र और आला अफसरों के निर्देश का इंतजार है। फिर बाकी चारों मुकदमों को निपटाया जाएगा।
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नगर आयुक्त से मिले कोतवाल
सोमवार को कोतवाली इंस्पेक्टर गीतेश कपिल ने नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. से मुलाकात की। बताया जाता है कि इस दौरान उनके बीच इन मुकदमों को लेकर चर्चा हुई। मगर इंस्पेक्टर का कहना है कि वह कोतवाली की चोक सीवर लाइन के संबंध में नगर आयुक्त से मिले थे।
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पहली रिपोर्ट पोर्टेबल शॉप प्रकरण में नगर निगम के राजस्व निरीक्षक की ओर से पार्षद विनोद सैनी और व्यापारी दर्शनलाल भाटिया के खिलाफ दर्ज कराई गई थी। इसके विरोध में पार्षदों ने नगर आयुक्त के खिलाफ निगम परिसर में धरना प्रदर्शन किया तो दूसरी रिपोर्ट तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार ने धारा 144 का उल्लंघन करने के आरोप में पार्षदों के खिलाफ लिखा दी। तीसरी रिपोर्ट नगर निगम के कार्यालय अधीक्षक आरपी सिंह ने लिखाई थी, जिसमें नगर आयुक्त को अपने कार्यालय में न बैठने देने, उनके पुतले पर थूकने और जूता मारने का आरोप पार्षदों पर लगाया गया था। एक अन्य रिपोर्ट सिविल लाइंस चौकी इंचार्ज सतवीर सिंह ने नगर आयुक्त का पुतला फूंकने के आरोप में पार्षदों पर दर्ज कराई थी। पांचवीं रिपोर्ट निगम के नगर स्वास्थ्य अधिकारी संजीव प्रधान ने मेयर उमेश गौतम और पार्षदों के खिलाफ लिखाई थी।
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इनमें तीन मुकदमों की विवेचना सिविल लाइंस चौकी प्रभारी सतवीर सिंह को दी गई थी। चौकी इंचार्ज सतवीर सिंह की ओर से लिखाए गए मुकदमे की विवेचना दरोगा प्रशांत को दी गई, जिनका जिले से बाहर तबादला हो गया। सूत्रों के मुताबिक शुरुआत में इन मुकदमों में एक-दो पर्चे काटे गए और फिर विवेचना ठंडे बस्ते में डाल दी गईं। अब इन मुकदमों में एफआर लगाने की तैयारी है। सबसे पहले मेयर के खिलाफ दर्ज मुकदमे में एफआर लगाई जा सकती है, जिसके लिए पुलिस को समझौता पत्र और आला अफसरों के निर्देश का इंतजार है। फिर बाकी चारों मुकदमों को निपटाया जाएगा।
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नगर आयुक्त से मिले कोतवाल
सोमवार को कोतवाली इंस्पेक्टर गीतेश कपिल ने नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. से मुलाकात की। बताया जाता है कि इस दौरान उनके बीच इन मुकदमों को लेकर चर्चा हुई। मगर इंस्पेक्टर का कहना है कि वह कोतवाली की चोक सीवर लाइन के संबंध में नगर आयुक्त से मिले थे।