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UP: बरेलवी उलमा ने जारी किया मुस्लिम एजेंडा, बोले- मुसलमानों में फैली बुराइयों के खिलाफ चलाएंगे आंदोलन

Mon, 18 Aug 2025 04:53 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 18 Aug 2025 04:53 PM IST
सार

बरेली में आला हजरत के उर्स के पहले दिन सोमवार को ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के तत्वावधान में बैठक हुई, जिसमें देशभर के उलमा शामिल हुए। बैठक में मुस्लिम एजेंडा जारी किया गया। 

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Muslim agenda released on the first day of Ala Hazrat Urs in Bareilly
बरेलवी उलमा ने जारी किया मुस्लिम एजेंडा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सोमवार को मुस्लिम एजेंडा जारी किया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज में बुराइयां बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। इसके खिलाफ आंदोलन चलाया जाएगा। मुस्लिम समाज को इस वक्त कुछ ऐसी बुराइयों से बचने की जरूरत है जो सामाजिक, धार्मिक, और नैतिक रूप से नुकसान पहुंचा सकती हैं। 

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मौलाना ने बताया कि राजनीतिक मैदान में बरेलवी बहुत पीछे हैं। बरेलवी उलमा ने सियासत को सीधे तौर पर पसंद नहीं किया। नौजवानों को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिल सका। मगर अब देश के सियासी हालात में जरूरत पेश आई है कि बरेलवियों को भी राजनीति के मैदान में कदम रखना चाहिए। इसलिए अब हर जिले में बरेलवी लीडरशिप को उभारा जाएगा। राजनीतिक मैदान में दमखम के साथ नुमाइंदगी (प्रतिनिधित्व) किया जाएगा।
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रजवी ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम ने शिक्षा हासिल करने पर जोर दिया है। कुरान शरीफ में खुदा ने सबसे पहली आयत पैगंबर ए इस्लाम पर नाजिल (उतारी) की वो भी शिक्षा पर आधारित है। मुसलमान शिक्षा के क्षेत्र में अभी भी दूसरी कौमों से बहुत पीछे हैं। इसलिए केंद्र सरकार और राज्य सरकारों पर तकिया रखकर भरोसा करने की जरूरत नहीं है, बल्कि खुद मुसलमानों को अपनी नयी नस्ल की तालीम और तरबियत के लिए खड़ा होना होगा, वरना पीछे ढकेल दिए जाएं। 

गैर शरई काम 
1. इस्लाम ने शादी को बहुत आसान और कम खर्च वाला कार्य बनाया है, मगर आजकल मुसलमानों ने शादी को बहुत महंगा कर दिया जो गैर शरई है।
2. निकाह में दूल्हा और दुल्हन की तैयारियां में जो तौर तरीका अपनाया जाता है, वो सब गैर शरई है।
3. शादियों में बरात का खाना, फिर वलीमे का खाना, फिर लड़की वालों की तरफ से खाना, हाल की बुकिंग के साथ ही और दीगर चींजों में फिजूलखर्ची की जाती है जो नाजायज है।
4. निकाह के दिन लड़की वाले हाल में दहेज की नुमाइश करते हैं, ये भी नाजायज है।
5. इस्लाम में दहेज के मांगने पर सख्त मनाही की है, मगर शादी की तारीख तय करते वक्त दूल्हे की तरफ से दहेज के लिए जिन जिन चीजों का मुतालबा किया जाता है, वो सभी नाजायज कार्य हैं।
6. लड़के वाले हो या लड़की वाले दोनों तरफ के खाने के इंतजाम मे खड़े होकर खाना खिलाने की व्यवस्था की जाती है, शरीयत की नजर में यह सख्त गुनाह का काम है। बैठकर खाना खिलाने कि व्यवस्था होनी चाहिए।

शिक्षा के क्षेत्र में कार्य
1. दीनी और दुनियावी शिक्षा के लिए स्कूल, कॉलेज, और विश्वविद्यालय अमीर मुसलमान खोलें। मौजूदा समय में तकनीकी शिक्षा में पीछे रहना भी समाज के लिए नुकसानदेय है।
2. दुनियावी और धार्मिक शिक्षा में संतुलन और विज्ञान व तकनीक में जागरूकता लाना भी जरूरी है।
3. आईएएस, आईएएफ, आईपीएस, पीसीएस, पीसीएस जे आदि की परीक्षाओं के लिए कोचिंग सेंटर खोले जाएं। आर्थिक तौर पर गरीब व कमजोर छात्रों को फ्री कोचिंग करायी जाए।
4. मौजूदा हालात के पेशे नज़र लड़कियों के लिए अलहेदा स्कूल व कॉलेज खोले जाए, ताकि लड़कियों की शिक्षा अच्छे में हो सके ताकि समाज के बीच वो भी तरक्की कर सकें। 

फिजूलखर्ची और नशा
1. आजकल कई नौजवान नशे के आदी हो चुके हैं, जिसकी वजह से वह परिवार में विवाद और मां-बाप के लिए एक मुसीबत का सबब बन जाते हैं।
2. मस्जिद के इमामों और बुद्धिजीवियों को इस पर काम करना होगा।
3. मुसलमान शादी विवाह और दीगर कार्यक्रमों के साथ ही साथ जलसा, जुलूस, लंगर और उर्स में बेपनाह फिजूलखर्ची करते हैं। इस फिजूलखर्ची से कोई शबाब नहीं हासिल होता, बचना जरूरी है।
4. मुसलमान पीरी मुरीदी को असल इस्लाम न समझे, बल्कि असल इस्लाम तोहिद, नमाज, रोज़ा, हज, जकात हैं। इनके करने से खुदा और रसूल खुश होंगे।

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