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Muharram Juloos: जनता मानने के लिए थी तैयार...पर खुराफातियों ने बिगाड़ा माहौल; लिखित समझौते को भी किया दरकिनार
Thu, 18 Jul 2024 09:43 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 18 Jul 2024 09:43 AM IST
सार
बरेली के अलीगंज में मुहर्रम के जुलूस में बड़े डीजे शामिल करने को लेकर दो समुदायों के बीच विवाद हो गया। दो समुदायों के बीच पथराव हुआ। पुलिस ने लाठीचार्ज कर तितर-बितर किया। दोनों पक्षों के खुराफातियों ने माहौल बिगाड़ा।
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Muharram juloos in bareilly
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बरेली के अलीगंज में मुहर्रम के जुलूस में बाहर से लाए गए बड़े डीजे शामिल करने को लेकर दो समुदायों के बीच तनातनी ने बवाल का रूप ले लिया। बुधवार शाम थाने के बाहर जुटी भीड़ को पुलिस ने लाठीचार्ज कर तितर-बितर किया तो एक समुदाय के लोगों ने पथराव कर दिया। इसमें एक दरोगा की कार के शीशे टूट गए। तनाव बढ़ते देख दुकानदारों ने बाजार बंद कर दिया। एसपी दक्षिणी के नेतृत्व में मौके पर कई थानों की पुलिस तैनात कर जुलूस निकलवाया गया।
थाने पहुंचे अधिकारियों को एक पक्ष ने बताया कि पिछले दिनों शांति कमेटी की बैठक में तय हुआ था कि मुहर्रम के जुलूस में मानकों के अनुरूप केवल आठ छोटे डीजे शामिल किए जाएंगे। डीजे पर सुराही व लाउडस्पीकर की संख्या भी तय की गई थी। आरोप है कि ताजियेदारों ने बाहर से दो बड़े डीजे मंगाकर कुल 10 डीजे जुलूस में शामिल कर लिए। इसे नई परंपरा बताकर अधिकारियों से तय संख्या का पालन कराने की मांग की गई।
जबकि ताजियादारों ने कहा कि वे मंगाए गए दो बड़े डीजे के लिए 90 हजार रुपये का भुगतान कर चुके हैं, इसलिए इस बार इन्हें जुलूस में शामिल करा दिया जाए। अगली बार इन्हें नहीं मंगाएंगे। इस पर विहिप नेता नितिन महाजन ने कहा कि वे चंदा करके भुगतान की राशि उन्हें दे देंगे, लेकिन नई परंपरा नहीं पड़ने दी जाएगी।
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लिखित समझौते को भी किया दरकिनार
दरअसल, मुहर्रम के जुलूस के दौरान कुछ खुराफातियों की वजह से कस्बे का माहौल बिगड़ते-बिगड़ते बचा। दोपहर से शाम तक कई बार विवाद ने तूल पकड़ा। दोनों पक्ष के आम लोग पुलिस-प्रशासन के अफसरों की शर्त मान भी जाते थे, पर राजनीतिक व खुराफाती तत्वों ने हर बार बयान बदलकर तनाव बढ़ाने का काम किया।
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थाने पहुंचे अधिकारियों को एक पक्ष ने बताया कि पिछले दिनों शांति कमेटी की बैठक में तय हुआ था कि मुहर्रम के जुलूस में मानकों के अनुरूप केवल आठ छोटे डीजे शामिल किए जाएंगे। डीजे पर सुराही व लाउडस्पीकर की संख्या भी तय की गई थी। आरोप है कि ताजियेदारों ने बाहर से दो बड़े डीजे मंगाकर कुल 10 डीजे जुलूस में शामिल कर लिए। इसे नई परंपरा बताकर अधिकारियों से तय संख्या का पालन कराने की मांग की गई।
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जबकि ताजियादारों ने कहा कि वे मंगाए गए दो बड़े डीजे के लिए 90 हजार रुपये का भुगतान कर चुके हैं, इसलिए इस बार इन्हें जुलूस में शामिल करा दिया जाए। अगली बार इन्हें नहीं मंगाएंगे। इस पर विहिप नेता नितिन महाजन ने कहा कि वे चंदा करके भुगतान की राशि उन्हें दे देंगे, लेकिन नई परंपरा नहीं पड़ने दी जाएगी।
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लिखित समझौते को भी किया दरकिनार
दरअसल, मुहर्रम के जुलूस के दौरान कुछ खुराफातियों की वजह से कस्बे का माहौल बिगड़ते-बिगड़ते बचा। दोपहर से शाम तक कई बार विवाद ने तूल पकड़ा। दोनों पक्ष के आम लोग पुलिस-प्रशासन के अफसरों की शर्त मान भी जाते थे, पर राजनीतिक व खुराफाती तत्वों ने हर बार बयान बदलकर तनाव बढ़ाने का काम किया।
रात में कई थानों की पुलिस पहुंची तो खुराफाती फरार हो गए। दोपहर में विवाद बढ़ता देख अधिकारी दोनों पक्षों को समझने में लगे रहे। बहेड़ी व मीरगंज से भी अधिकारी अलीगंज पहुंच गए थे, लेकिन बात कहीं से भी बनती नजर नहीं आ रही थी।
इस दौरान पूर्व प्रधान नन्नू, वर्तमान प्रधान शाकिर खान, सैयद मतलब अली, अकील खान आदि से अधिकारियों की लगातार वार्ता होती रही। वहीं, दूसरे पक्ष से बजरंग दल के पदाधिकारी आनंद प्रकाश गुप्ता, मंडल अध्यक्ष राजेश गुप्ता आदि बात कर रहे थे। शाम तक कई दौर की बैठकों में भी किसी समस्या का समाधान नहीं हो सका।
प्रशासन ने स्थिति नाजुक देखकर आसपास के थानों की पुलिस के साथ ही एक प्लाटून पीएसी भी तैनात कर दी। एसपी दक्षिणी मानुष पारीक, एसडीएम आंवला नहने राम व अन्य अधिकारियों ने अलग-अलग गुटों से बात की। बात नहीं बनी तो पुलिस को कई बार लाठी फटकारकर भीड़ को खदेड़ना पड़ा।
ताजियों की ऊंचाई बढ़ी, कभी स्वागत द्वार में अटके कभी पेड़ में
थाने में पिछले दिनों हुई शांति समिति की बैठक में मौखिक रूप से ताजियों की ऊंचाई और डीजे के साइज को लेकर चर्चा की गई थी। यह तत्कालीन अधिकारियों की कमी रही जो उस वक्त दोनों पक्षों की सहमति को लिखित रूप नहीं दिया गया। इसी का लाभ दोनों पक्षों के लोग बुधवार को उठाते रहे।
थाने में पिछले दिनों हुई शांति समिति की बैठक में मौखिक रूप से ताजियों की ऊंचाई और डीजे के साइज को लेकर चर्चा की गई थी। यह तत्कालीन अधिकारियों की कमी रही जो उस वक्त दोनों पक्षों की सहमति को लिखित रूप नहीं दिया गया। इसी का लाभ दोनों पक्षों के लोग बुधवार को उठाते रहे।
सुबह आठ बजे कस्बे से आंवला रोड पर बढ़ा 24 फुट ऊंचा ताजिया विधायक निधि से बनाए स्वागत द्वार में फंसने लगा। तब एसडीएम ने मौके पर जाकर लोगों को समझाया और गेट के किनारे से जुलूस आगे बढ़वा दिया। थोड़ा आगे बढ़कर यह ताजिया पेड़ में फंस गया। तब ताजियेदार पेड़ की डाल छंटवाने की बात कहने लगे। इस बार फिर एसडीएम ने लोगों से निवेदन किया। इस बार कीचड़ से होकर जुलूस आगे बढ़ा।
इसी दौरान कुछ लोगों ने विहिप व भाजपा के पदाधिकारियों से ताजियों की ऊंचाई ज्यादा होने की शिकायत कर दी। तब दोपहर दो बजे करीब थाने में दोनों पक्षों को बुलाया गया। यहां बड़े डीजे लगाने का नया मुद्दा छिड़ गया। इसके बाद मामला बनते-बनते बिगड़ गया। रात में बड़े ताजिये और तेज आवाज वाले डीजे को लेकर विरोध के बीच पथराव हो गया। पहले किसी ने बंद दुकान के शटर पर पत्थर फेंका और बाद में कुछ और पत्थर दोनों ओर से आने लगे। यहां भी पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। शाम को भीम आर्मी के मंडल अध्यक्ष विकास बाबू एडवोकेट थाना अलीगंज पहुंचे। प्रयास के बाद भी समझौता नहीं हो सका।
एक पक्ष ने दी खर्च की दुहाई, दूसरे ने की चंदे की पेशकश
दोपहर में बजरंग दल वालों ने प्रशासन से शिकायत की कि बड़ा डीजे बज रहा है। पुलिस प्रशासन ने बड़े डीजे को बंद करा दिया तो ताजियेदारों ने आपत्ति जताई और उन्होंने ढोल-नगाड़ा भी बंद कर दिया। यह लोग थाने के सामने खड़े हो गए। पुलिस ने इन्हें एक बार खदेड़ दिया। ताजिये न निकलने की स्थिति देखकर एसपी दक्षिणी व एसडीएम के बुलाने पर इस पक्ष के लोग थाने में आए। यहां बताया कि जुलूस में उन्होंने काफी रुपये देकर बाहर से दो डीजे मंगाए हैं। इस साल इन्हें बजाने दिया जाए। इस पर दूसरे पक्ष के लोगों ने कहा कि हम आपका नुकसान नहीं होने देंगे। जितने रुपये देकर आपने डीजे बुलाए हैं, वह रुपया हम लोग चंदा करके दे देंगे। ऐसे में आखिर तक सहमति नहीं बन सकी।
दोपहर में बजरंग दल वालों ने प्रशासन से शिकायत की कि बड़ा डीजे बज रहा है। पुलिस प्रशासन ने बड़े डीजे को बंद करा दिया तो ताजियेदारों ने आपत्ति जताई और उन्होंने ढोल-नगाड़ा भी बंद कर दिया। यह लोग थाने के सामने खड़े हो गए। पुलिस ने इन्हें एक बार खदेड़ दिया। ताजिये न निकलने की स्थिति देखकर एसपी दक्षिणी व एसडीएम के बुलाने पर इस पक्ष के लोग थाने में आए। यहां बताया कि जुलूस में उन्होंने काफी रुपये देकर बाहर से दो डीजे मंगाए हैं। इस साल इन्हें बजाने दिया जाए। इस पर दूसरे पक्ष के लोगों ने कहा कि हम आपका नुकसान नहीं होने देंगे। जितने रुपये देकर आपने डीजे बुलाए हैं, वह रुपया हम लोग चंदा करके दे देंगे। ऐसे में आखिर तक सहमति नहीं बन सकी।
बिशारतगंज थाने में बैठे डीएम-एसएसपी, शासन को दी रिपोर्ट
जिलेभर में घूमकर मुहर्रम जुलूस का जायजा ले रहे डीएम रविंद्र कुमार व एसएसपी अनुराग आर्य अलीगंज में विवाद की जानकारी पाकर रात में नजदीक के बिशारतगंज थाने पहुंच गए। वहां करीब दो घंटे तक बैठकर अधिकारियों ने अलीगंज में चल रही स्थिति पर नजर रखी। साथ ही शासन व डीजीपी कार्यालय को अपडेट देते रहे। रात में जब विवाद शांत हो गया तो अधिकारी मुख्यालय लौट आए। एसएसपी ने एसपी दक्षिणी को निर्देश दिया कि रात में ही सभी ताजिया करबला में दफन कराना सुनिश्चित करें।
जिलेभर में घूमकर मुहर्रम जुलूस का जायजा ले रहे डीएम रविंद्र कुमार व एसएसपी अनुराग आर्य अलीगंज में विवाद की जानकारी पाकर रात में नजदीक के बिशारतगंज थाने पहुंच गए। वहां करीब दो घंटे तक बैठकर अधिकारियों ने अलीगंज में चल रही स्थिति पर नजर रखी। साथ ही शासन व डीजीपी कार्यालय को अपडेट देते रहे। रात में जब विवाद शांत हो गया तो अधिकारी मुख्यालय लौट आए। एसएसपी ने एसपी दक्षिणी को निर्देश दिया कि रात में ही सभी ताजिया करबला में दफन कराना सुनिश्चित करें।
रात में पहुंचे एसपी उत्तरी, ताजियेदारों की तलाश कराई
रात नौ बजे तक चले घटनाक्रम के बाद पुलिस का सख्त रुख भांपकर कुछ ताजियेदार अपने बड़े ताजिये सड़क के किनारे छोड़कर भाग निकले। इन ताजियों को कर्बला तक पहुंचाने का पेच फंस गया। एसएसपी के निर्देश पर रात में ही एसपी उत्तरी मुकेश मिश्रा भी अलीगंज पहुंच गए। अधिकारियों ने गांवों के प्रधानों व संभ्रांत लोगों को बुलाकर अलीगंज के गैनी व अन्य गांवों में भेजा। वहां से ताजियेदारों को बुलाकर रात में ही ताजिये दफन कराने की प्रक्रिया शुरू कराई।
रात नौ बजे तक चले घटनाक्रम के बाद पुलिस का सख्त रुख भांपकर कुछ ताजियेदार अपने बड़े ताजिये सड़क के किनारे छोड़कर भाग निकले। इन ताजियों को कर्बला तक पहुंचाने का पेच फंस गया। एसएसपी के निर्देश पर रात में ही एसपी उत्तरी मुकेश मिश्रा भी अलीगंज पहुंच गए। अधिकारियों ने गांवों के प्रधानों व संभ्रांत लोगों को बुलाकर अलीगंज के गैनी व अन्य गांवों में भेजा। वहां से ताजियेदारों को बुलाकर रात में ही ताजिये दफन कराने की प्रक्रिया शुरू कराई।