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आज संतान की दीर्घायु को संकष्टी चतुर्थी निर्जल व्रत रखेंगी माताएं
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शाहजहांपुर। संकटों का नाश करने के वाली गणेश संकष्टी चतुर्थी शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन संतान की दीर्घायु के लिए माताएं निर्जल व्रत रख विधि-विधान से भगवान गणेश और चंद्रदेव की पूजा-अर्चना करेंगी।
दुर्गा माता मंदिर के पुजारी अरुण कुमार शुक्ला ने बताया कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत, संकटों और मुसीबतों से घिरा होने या निकट भविष्य में किसी अनिष्ट की आशंका होने पर विशेष हितकारी होता है। इससे इस लोक और परलोक में सुख मिलता है। इस व्रत को करने से विद्यार्थी को विद्या और रोगी को आरोग्यता की प्राप्ति होती है।
उन्होंने बताया कि सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प करके दिन भर गणेशजी का स्मरण एवं भजन करें। चंद्रोदय से पूर्व गणेश मूर्ति या सुपाड़ी के द्वारा निर्मित सांकेतिक गणेश देवता को चौकी पर स्थापित करें। इसके बाद षोडशोपचार विधि से पूजन संपन्न करें। मोदक और गुड़ में बने हुए तिल के लड्डू का भोग अर्पित करें। आचमन कराकर प्रदक्षिणा और नमस्कार करके पुष्पांजलि अर्पित करें। चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को विशेषार्घ्य प्रदान करें।
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दुर्गा माता मंदिर के पुजारी अरुण कुमार शुक्ला ने बताया कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत, संकटों और मुसीबतों से घिरा होने या निकट भविष्य में किसी अनिष्ट की आशंका होने पर विशेष हितकारी होता है। इससे इस लोक और परलोक में सुख मिलता है। इस व्रत को करने से विद्यार्थी को विद्या और रोगी को आरोग्यता की प्राप्ति होती है।
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उन्होंने बताया कि सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प करके दिन भर गणेशजी का स्मरण एवं भजन करें। चंद्रोदय से पूर्व गणेश मूर्ति या सुपाड़ी के द्वारा निर्मित सांकेतिक गणेश देवता को चौकी पर स्थापित करें। इसके बाद षोडशोपचार विधि से पूजन संपन्न करें। मोदक और गुड़ में बने हुए तिल के लड्डू का भोग अर्पित करें। आचमन कराकर प्रदक्षिणा और नमस्कार करके पुष्पांजलि अर्पित करें। चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को विशेषार्घ्य प्रदान करें।
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