{"_id":"62703900a1d3f65bc55b53fb","slug":"more-than-standard-teachers-appointed-in-model-school-bareilly-news-bly483536560","type":"story","status":"publish","title_hn":"गैरजिम्मेदारी का मॉडल स्कूल... जरूरत से चार गुना ज्यादा शिक्षक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गैरजिम्मेदारी का मॉडल स्कूल... जरूरत से चार गुना ज्यादा शिक्षक
Tue, 03 May 2022 01:22 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 03 May 2022 01:22 PM IST
सार
दिलचस्प यह है कि ब्लॉक मुख्यालय पर चल रहे इस स्कूल भवन की हालत काफी जर्जर है। वैसे तो यह प्राइमरी स्कूल है लेकिन इसमें प्राइमरी के 443 बच्चों के साथ 138 जूनियर कक्षाओं के बच्चों को भी पढ़ाया जाता है।
विज्ञापन
मॉडल स्कूल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
फतेहगंज पश्चिमी के प्राइमरी स्कूल नंबर-1 में शिक्षकों को तैनात करने में बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने सारे नियम-कायदों की धज्जियां उड़ा दीं। सिर्फ 582 छात्र संख्या वाले इस स्कूल में 31 शिक्षकों की तैनाती कर दी गई है। ऊपर से इस स्कूल को मॉडल स्कूल का दर्जा भी दे दिया गया है।
बेसिक शिक्षा विभाग वैसे ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है, ऊपर से भ्रष्टाचार और गैरजिम्मेदारी बुनियादी शिक्षा पर और भारी पड़ रही है। शिक्षकों की तैनाती में मानकों को सिरे से नजरअंदाज करने की वजह से तमाम स्कूल सैकड़ों में छात्र संख्या होने के बावजूद एकाध शिक्षक के सहारे चल रहे हैं तो दूसरी ओर फतेहगंज पश्चिमी के प्राइमरी स्कूल नंबर- 1 जैसे स्कूल भी हैं जिनमें मानकों से कई गुना ज्यादा शिक्षकों की तैनाती कर दी गई है।
दिलचस्प यह है कि ब्लॉक मुख्यालय पर चल रहे इस स्कूल भवन की हालत काफी जर्जर है। वैसे तो यह प्राइमरी स्कूल है लेकिन इसमें प्राइमरी के 443 बच्चों के साथ 138 जूनियर कक्षाओं के बच्चों को भी पढ़ाया जाता है। हालांकि यहां न 581 बच्चों को सुरक्षित बैठाने लायक जगह है, न ही 31 शिक्षकों के लिए उन्हें पढ़ाने लायक। स्कूल की प्रधानाध्यापिका कमलेश भारती के मुताबिक स्कूल में 25 शिक्षकों के अलावा तीन अनुदेशक और तीन शिक्षामित्र तैनात हैं। मानकों से काफी ज्यादा शिक्षकों की तैनाती के संबंध में उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भी भेजी लेकिन उस पर कोई फैसला नहीं लिया गया।
विज्ञापन
लाखों रुपये हर महीने वेतन पर बर्बाद, किसी को परवाह नहीं
शिक्षक नेताओं का कहना है कि 581 छात्र संख्या पर 31 शिक्षकों की तैनाती कई गुना ज्यादा है। इतनी छात्र संख्या पर स्कूल में अधिकतम छह-सात शिक्षकों की तैनाती होनी चाहिए क्योंकि स्कूल में इतनी कक्षाएं लगाना संभव ही नहीं है। जाहिर है कि फतेहगंज पश्चिमी के प्राइमरी स्कूल नंबर- 1 में करीब 24-25 शिक्षकों की तैनाती अतिरिक्त है। शिक्षकों का मासिक वेतन 45 हजार से कम नहीं है। इस लिहाज से आकलन किया जाए तो हर महीने सरकार के 10-12 लाख रुपये अतिरिक्त शिक्षकों के वेतन पर बर्बाद हो रहे हैं। यह स्थिति तब है कि जब शासन की ओर से लगातार सभी बच्चों को शिक्षा मुहैया कराने पर जोर दिया जा रहा है।
कौन जिम्मेदार...
बीएसए : स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती खुद बीएसए करते हैं। हर सत्र में एक निश्चित कार्यक्रम के तहत शिक्षकों का स्थानांतरण और समायोजन होता है। बीएसए को देखना होता है कि स्कूलों मेें मानकों के अनुरूप शिक्षकों की तैनाती है या नहीं। सभी स्कूलों में शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता रहे, इसी को ध्यान में रखकर तैनाती की जाती है। फतेहगंज पश्चिमी के स्कूल में तैनाती करने में मानकों का कोई ख्याल नहीं रखा गया।
बीईओ : ब्लॉक स्तर पर तैनात खंड शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी स्कूलों में शिक्षा का माहौल बनाए रखने की होती है। स्कूलों में सरकारी गाइड लाइन के तहत नियमित रूप से दौरे भी करने होते हैं। जाहिर है कि इस स्कूल में या तो काफी समय से दौरा नहीं किया गया या फिर इतने अधिक शिक्षकों की तैनाती को नजरअंदाज कर दिया गया। हालांकि फतेहगंज पश्चिमी में बीईओ प्रियांशी सक्सेना की नई तैनाती है। लिहाजा गोलमाल के लिए इससे पहले रहीं बीईओ बबिता को जिम्मेदार माना जा रहा है।
प्रधानाध्यापिका : स्कूल के प्रधानाध्यापक की भी जिम्मेदारी है कि वह स्कूल में जरूरत से कई गुना ज्यादा शिक्षकों की तैनाती पर अफसरों को रिपोर्ट करें। फतेहगंज पश्चिमी के प्राइमरी स्कूल नंबर 1 की प्रधानाध्यापक कमलेश भारती कहती हैं कि वह उच्चाधिकारियों को इस बारे में रिपोर्ट भेज चुकी हैं। हालांकि उनकी रिपोर्ट पर अधिकारियों ने कोई कदम नहीं उठाया। वह कहती हैं कि स्कूल की हालत भी काफी जर्जर हो चुकी है। हर वक्त प्लास्टर छूटकर गिरता रहता है। इस पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
गोलमोल सफाई... अपने ही दावों में उलझ रहे हैं अफसर
बीएसए विनय कुमार कहते हैं कि मानकों के अनुसार तीस बच्चों पर एक शिक्षक की तैनाती होनी चाहिए। हालांकि शिक्षक नेताओं का कहना है कि यह मानक पुराना हो चुका है। 2009 में आरटीई लागू होने के बाद सरकार ने बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की कमी देखते हुए ये मानक शिथिल कर दिए थे, ताकि हर स्कूल में शिक्षक उपलब्ध रहें और कोई स्कूल शिक्षकों की कमी से बंद न करना पड़े। बीईओ प्रियांशी सक्सेना शिक्षकों की बेतहाशा तैनाती के लिए पोर्टल पर हुई गड़बड़ी को जिम्मेदार ठहरा रही हैं। उनका कहना है कि पोर्टल पर एक के बजाय 11 दर्ज हो जाने से ज्यादा शिक्षकों की तैनाती हो गई। हालांकि स्कूल में 31 शिक्षकों की तैनाती फरवरी 2021 से है। जाहिर है कि पोर्टल की गड़बड़ी से ऐसा हुआ होता तो पिछले सवा साल में इस गलती को ठीक कर लिया गया होता।
यह सही है कि स्कूल में शिक्षकों की संख्या बहुत ज्यादा है लेकिन यह तो अधिकारियों का फैसला है। इसमें हम क्या कर सकते हैं।
- कमलेश भारती, प्रधानाध्यापिका, मॉडल प्राइमरी स्कूल नंबर 1, फतेहगंज पश्चिमी
विज्ञापन
बेसिक शिक्षा विभाग वैसे ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है, ऊपर से भ्रष्टाचार और गैरजिम्मेदारी बुनियादी शिक्षा पर और भारी पड़ रही है। शिक्षकों की तैनाती में मानकों को सिरे से नजरअंदाज करने की वजह से तमाम स्कूल सैकड़ों में छात्र संख्या होने के बावजूद एकाध शिक्षक के सहारे चल रहे हैं तो दूसरी ओर फतेहगंज पश्चिमी के प्राइमरी स्कूल नंबर- 1 जैसे स्कूल भी हैं जिनमें मानकों से कई गुना ज्यादा शिक्षकों की तैनाती कर दी गई है।
विज्ञापन
दिलचस्प यह है कि ब्लॉक मुख्यालय पर चल रहे इस स्कूल भवन की हालत काफी जर्जर है। वैसे तो यह प्राइमरी स्कूल है लेकिन इसमें प्राइमरी के 443 बच्चों के साथ 138 जूनियर कक्षाओं के बच्चों को भी पढ़ाया जाता है। हालांकि यहां न 581 बच्चों को सुरक्षित बैठाने लायक जगह है, न ही 31 शिक्षकों के लिए उन्हें पढ़ाने लायक। स्कूल की प्रधानाध्यापिका कमलेश भारती के मुताबिक स्कूल में 25 शिक्षकों के अलावा तीन अनुदेशक और तीन शिक्षामित्र तैनात हैं। मानकों से काफी ज्यादा शिक्षकों की तैनाती के संबंध में उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भी भेजी लेकिन उस पर कोई फैसला नहीं लिया गया।
विज्ञापन
लाखों रुपये हर महीने वेतन पर बर्बाद, किसी को परवाह नहीं
शिक्षक नेताओं का कहना है कि 581 छात्र संख्या पर 31 शिक्षकों की तैनाती कई गुना ज्यादा है। इतनी छात्र संख्या पर स्कूल में अधिकतम छह-सात शिक्षकों की तैनाती होनी चाहिए क्योंकि स्कूल में इतनी कक्षाएं लगाना संभव ही नहीं है। जाहिर है कि फतेहगंज पश्चिमी के प्राइमरी स्कूल नंबर- 1 में करीब 24-25 शिक्षकों की तैनाती अतिरिक्त है। शिक्षकों का मासिक वेतन 45 हजार से कम नहीं है। इस लिहाज से आकलन किया जाए तो हर महीने सरकार के 10-12 लाख रुपये अतिरिक्त शिक्षकों के वेतन पर बर्बाद हो रहे हैं। यह स्थिति तब है कि जब शासन की ओर से लगातार सभी बच्चों को शिक्षा मुहैया कराने पर जोर दिया जा रहा है।
कौन जिम्मेदार...
बीएसए : स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती खुद बीएसए करते हैं। हर सत्र में एक निश्चित कार्यक्रम के तहत शिक्षकों का स्थानांतरण और समायोजन होता है। बीएसए को देखना होता है कि स्कूलों मेें मानकों के अनुरूप शिक्षकों की तैनाती है या नहीं। सभी स्कूलों में शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता रहे, इसी को ध्यान में रखकर तैनाती की जाती है। फतेहगंज पश्चिमी के स्कूल में तैनाती करने में मानकों का कोई ख्याल नहीं रखा गया।
बीईओ : ब्लॉक स्तर पर तैनात खंड शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी स्कूलों में शिक्षा का माहौल बनाए रखने की होती है। स्कूलों में सरकारी गाइड लाइन के तहत नियमित रूप से दौरे भी करने होते हैं। जाहिर है कि इस स्कूल में या तो काफी समय से दौरा नहीं किया गया या फिर इतने अधिक शिक्षकों की तैनाती को नजरअंदाज कर दिया गया। हालांकि फतेहगंज पश्चिमी में बीईओ प्रियांशी सक्सेना की नई तैनाती है। लिहाजा गोलमाल के लिए इससे पहले रहीं बीईओ बबिता को जिम्मेदार माना जा रहा है।
प्रधानाध्यापिका : स्कूल के प्रधानाध्यापक की भी जिम्मेदारी है कि वह स्कूल में जरूरत से कई गुना ज्यादा शिक्षकों की तैनाती पर अफसरों को रिपोर्ट करें। फतेहगंज पश्चिमी के प्राइमरी स्कूल नंबर 1 की प्रधानाध्यापक कमलेश भारती कहती हैं कि वह उच्चाधिकारियों को इस बारे में रिपोर्ट भेज चुकी हैं। हालांकि उनकी रिपोर्ट पर अधिकारियों ने कोई कदम नहीं उठाया। वह कहती हैं कि स्कूल की हालत भी काफी जर्जर हो चुकी है। हर वक्त प्लास्टर छूटकर गिरता रहता है। इस पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
गोलमोल सफाई... अपने ही दावों में उलझ रहे हैं अफसर
बीएसए विनय कुमार कहते हैं कि मानकों के अनुसार तीस बच्चों पर एक शिक्षक की तैनाती होनी चाहिए। हालांकि शिक्षक नेताओं का कहना है कि यह मानक पुराना हो चुका है। 2009 में आरटीई लागू होने के बाद सरकार ने बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की कमी देखते हुए ये मानक शिथिल कर दिए थे, ताकि हर स्कूल में शिक्षक उपलब्ध रहें और कोई स्कूल शिक्षकों की कमी से बंद न करना पड़े। बीईओ प्रियांशी सक्सेना शिक्षकों की बेतहाशा तैनाती के लिए पोर्टल पर हुई गड़बड़ी को जिम्मेदार ठहरा रही हैं। उनका कहना है कि पोर्टल पर एक के बजाय 11 दर्ज हो जाने से ज्यादा शिक्षकों की तैनाती हो गई। हालांकि स्कूल में 31 शिक्षकों की तैनाती फरवरी 2021 से है। जाहिर है कि पोर्टल की गड़बड़ी से ऐसा हुआ होता तो पिछले सवा साल में इस गलती को ठीक कर लिया गया होता।
यह सही है कि स्कूल में शिक्षकों की संख्या बहुत ज्यादा है लेकिन यह तो अधिकारियों का फैसला है। इसमें हम क्या कर सकते हैं।
- कमलेश भारती, प्रधानाध्यापिका, मॉडल प्राइमरी स्कूल नंबर 1, फतेहगंज पश्चिमी