Lok Sabha Election 2024: प्रत्याशियों की चाय और समोसा 10-10 रुपये का, चुनाव के दौरान खर्च के लिए तय दरें लागू
बरेली और आंवला लोकसभा सीट पर नामांकन प्रक्रिया के बाद अब प्रत्याशियों के चुनावी खर्च की निगरानी शुरू हो गई है। खानपान से लेकर तमाम चीजों की दरें लागू कर दी गई हैं। इसी हिसाब से प्रत्याशी खर्च कर सकेंगे।
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बरेली में नामांकन प्रक्रिया के बाद चुनाव मैदान में प्रत्याशियों की तस्वीर साफ होने के साथ ही अब उनके खर्च की निगरानी भी शुरू हो गई है। खानपान सामग्री में प्रति चाय-समोसा, पूड़ी-सब्जी व मिठाई से लेकर कुर्सी-पंडाल आदि तक की दरें पूर्व निर्धारित लागू कर दी गई हैं। प्रत्याशी इसी के हिसाब से खर्च कर सकेंगे। आय-व्यय में हेराफेरी को आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा।
तय दरों के अनुसार प्रति चाय और समोसा के लिए दस-दस रुपये व कॉफी के लिए 20 रुपये प्रति कप की दर तय है। इसके अलावा नाश्ते में पूड़ी-सब्जी, मिठाई के लिए 80 रुपये व 150 रुपये प्रति किलो जलेबी की दरें तय की गई हैं। वहीं प्रति भोजन की थाली 100 से 160 रुपये व पानी की बोतल के 20 रुपये दाम तय हैं।
चुनावी सभा, कार्यालय आदि कार्यों में इस्तेमाल के लिए प्रति कुर्सी 15 रुपये, प्रति बड़ी मेज 25 रुपये, सोफा सेट 120 रुपये की दरें तय की गई हैं। इसी तरह अन्य खानपान व विभिन्न सामग्री की कीमतें भी तय हैं। यही नहीं प्रति मजदूर समेत हॉल बुकिंग, फूल-माला, वाहन, बैनर आदि की दरें भी तय की गई हैं। इसी के हिसाब से चुनाव में होने वाले खर्च को जोड़ा जाएगा।
कुर्सी, खानपान कम बताने पर वीडियो से होगी पुष्टि
प्रत्याशी खानपान सामग्री वितरण व कुर्सी, मेज आदि सामग्री के इस्तेमाल में संख्या छिपा नहीं सकेंगे। निगरानी टीमें प्रत्याशियों के जनसंपर्क, नुक्कड़ सभा, जनसभा या अन्य सभी आयोजनों की निगरानी वीडियोग्राफी से कर रही हैं। प्रत्याशियों के व्यय रजिस्टर का मिलान मौके पर मौजूद टीम के रिकॉर्ड से होगा। अगर मामला संदिग्ध हुआ तो वीडियोग्राफी टीम के जरिए कुर्सी, खानपान आदि सामग्री का आकलन होगा।
26 व 30 अप्रैल और चार मई को होगी व्यय रजिस्टर की जांच
निर्वाचन व्यय नोडल अधिकारी शैलेंद्र के मुताबिक नामांकन पत्र दाखिल होने के साथ ही प्रत्याशियों के खर्च की निगरानी शुरू हो जाती है। यदि कोई प्रत्याशी नाम वापस ले लेता है तो वह बाहर हो जाता है और जो चुनाव लड़ते हैं, उनसे खर्च का हिसाब नियमानुसार तलब किया जाता है।
प्रत्याशियों को व्यय रजिस्टर बनान होता है और उनके व्यय रजिस्टर की जांच क्रमवार होती है। इस चुनाव में पहली जांच 26 अप्रैल, दूसरी 30 अप्रैल और फिर तीसरी जांच चार मई को होगी। इसके लिए सभी राजनीतिक दलों और उनके प्रत्याशियों को सूचना दे दी गई है। नामांकन के बाद निर्दलीय उम्मीदवारों के भी व्यय रजिस्टर की जांच की जाएगी।
निर्धारित सीमा में खर्च का ब्योरा न देने पर होगी कार्रवाई
प्रत्येक प्रत्याशी को परिणाम घोषित होने के 30 दिन के भीतर जिला निर्वाचन अधिकारी को निर्वाचन व्यय का लेखा-जोखा देना होगा। बगैर ठोस वजह खर्च का ब्योरा समय से न देने वाले प्रत्याशी को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम-1951 की धारा-10(क) के तहत तीन वर्ष के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है। प्रत्याशियों के लिए अधिकतम व्यय सीमा 95 लाख रुपये निर्धारित है। इससे ज्यादा खर्च पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।
सक्रिय हुईं स्थायी निगरानी टीमें व उड़नदस्ते
लोकसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता पालन कराने के लिए जिले में 84 फ्लाइंग स्क्वॉयड, 84 स्टेटिक स्क्वॉयड और नौ वीडियो सर्विलांस टीमें सक्रिय हो गई हैं। निर्धारित बैरियर पर दिन-रात वाहनों की जांच जारी है। बिना अनुमति चुनाव में इस्तेमाल होने जा रहे बैनर, पोस्टर, होर्डिंग्स जब्त हो रहे हैं। साथ ही, प्रत्याशियों का भी पाई-पाई का हिसाब शुरू है।
चुनाव आयोग के निर्देशानुसार आदर्श आचार संहिता के दौरान 50 हजार रुपये से ज्यादा नकदी लेकर यात्रा करने पर कार्रवाई हो सकती है। वहीं, अगर इससे ज्यादा नकदी पास है और उसका कोई स्रोत उपलब्ध नहीं है तो जांच टीम रकम जब्त कर सकती है। साथ ही, नियमों के विपरीत प्रत्याशी की प्रचार सामग्री के परिवहन पर भी अंकुश है।