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मोहाना नदी ने गंगानगर गांव में शुरू किया कटान
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तिकुनिया। भारत-नेपाल सीमा पर बह रही मोहाना नदी ने भू कटान शुरू कर दिया है। नदी गंगानगर गांव में किसानों के खेतों को तेजी से काट रही है। नदी के कटान से किसानों और ग्रामीणों को डर सताने लगा है।
पहाड़ों पर लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से नेपाली नदियों का पानी मोहाना और कौड़ियाला नदियों में तेजी से आने लगा है। नदी की धार तेज होने के कारण कटान शुरू हो गया है। गंगानगर के किसान होशियार सिंह बताते हैं कि पिछले तीन चार वर्षों में नदी ने कटान कर किसानों की कमर तोड़ दी है। कटान रोकने के लिए जो उपाय किए गए हैं वह नाकाफी हैं और स्थायी नहीं हैं। सिंचाई विभाग द्वारा बनाई गई ठोकरें मोहाना के वेग को झेल पाएंगी इसमें संदेह है।
गंगानगर में किसान सुबेग सिंह, सेवा सिंह, अंग्रेज सिंह, जोगा सिंह, दीदार सिंह, सर्वजीत सिंह आदि लोगों के खेतों में लगा गन्ना मोहाना नदी निगल रही है। दो सप्ताह पहले डीएम और एसपी यहां का निरीक्षण किया था और कटान रोकने के बाबत सिंचाई विभाग को हिदायत भी दी थी। किसानों ने यह भी बताया कि हर वर्ष कटान में नष्ट हुई फसल का सर्वे तो होता है, लेकिन प्रशासन ने मुआवजा आज तक नहीं दिया है। कटान में फसल और जमीन दोनों चली जाने से किसानों में दहशत बढ़ रही है।
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ग्राम पंचायत के पूर्व प्रधान मलूक सिंह ने बताया कि कटान रोकने के लिए अधिकारियों तक काफी दौड़ भाग की गई जिसके चलते सिंचाई विभाग ने थोड़ा बहुत इंतजाम किया है लेकिन यह नदी की तेज धार के आगे कितना कारगर होगा। नहीं कहा जा सकता।
दो घर और नदी में समाए, ग्रामीणों में खौफ
महेवागंज। शारदा नदी की विनाशलीला जारी है। शनिवार को ग्रंट 12 गांव में दो और घर नदी में समा गए। नदी तेजी से कटान कर आगे बढ़ रही है। इससे ग्रामीणों में खौफ है। ग्रामीणों के मुताबिक, शनिवार को बसावन और मुन्नी लाल के घर नदी के आगोश में चले गए। अन्य घरों पर भी नदी की नजर टेढ़ी है। नदी का रौद्र रूप देख ग्रामीण हैरान हैं। जिन लोगों के मकान कटने के मुहाने पर है उनके माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। घर गृहस्थी का सामान बचाने की जुगत में लोग लगे रहे। छप्पर और मवेशियों को ट्रैक्टर ट्रालियों में लादकर पीड़ित सुरक्षित ठिकाने की तलाश में गांव से पलायन कर रहे है। संवाद
मवेशी को बचाने के प्रयास में शारदा नदी में बहा बुजुर्ग
महेवागंज/सुंदरवल। फूलबेहड़ थाना क्षेत्र के गौरा घोसियाना निवासी 75 वर्षीय नत्था शुक्रवार की शाम शारदा नदी किनारे मवेशी चराने गए थे। इस बीच एक गाय झुंड से अलग होकर नदी के करीब चली गई और दलदल में फंस गई। पशु को बचाने के प्रयास में वह नदी के तेज बहाव में फंस गये। जब तक लोगों की नजर पड़ी और बचाने दौड़े तब तक वह पानी में बह गए।
पुलिस और परिजन बुजुर्ग की तलाश में जुटे रहे, लेकिन अंधेरा होने से खोजबीन में दिक्कत हुई। शनिवार को गोताखोरों की मदद से तलाश शुरू की गई। फिर भी कुछ पता नहीं लगा। फूलबेहड़ प्रभारी निरीक्षक एसएन सिंह ने बताया कि नदी में डूबे बुजुर्ग की स्थानीय गोताखोरों और गांव के लोगों की सहायता से तलाश की जा रही है। अभी कुछ पता नहीं चल सका है। संवाद
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पहाड़ों पर लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से नेपाली नदियों का पानी मोहाना और कौड़ियाला नदियों में तेजी से आने लगा है। नदी की धार तेज होने के कारण कटान शुरू हो गया है। गंगानगर के किसान होशियार सिंह बताते हैं कि पिछले तीन चार वर्षों में नदी ने कटान कर किसानों की कमर तोड़ दी है। कटान रोकने के लिए जो उपाय किए गए हैं वह नाकाफी हैं और स्थायी नहीं हैं। सिंचाई विभाग द्वारा बनाई गई ठोकरें मोहाना के वेग को झेल पाएंगी इसमें संदेह है।
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गंगानगर में किसान सुबेग सिंह, सेवा सिंह, अंग्रेज सिंह, जोगा सिंह, दीदार सिंह, सर्वजीत सिंह आदि लोगों के खेतों में लगा गन्ना मोहाना नदी निगल रही है। दो सप्ताह पहले डीएम और एसपी यहां का निरीक्षण किया था और कटान रोकने के बाबत सिंचाई विभाग को हिदायत भी दी थी। किसानों ने यह भी बताया कि हर वर्ष कटान में नष्ट हुई फसल का सर्वे तो होता है, लेकिन प्रशासन ने मुआवजा आज तक नहीं दिया है। कटान में फसल और जमीन दोनों चली जाने से किसानों में दहशत बढ़ रही है।
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ग्राम पंचायत के पूर्व प्रधान मलूक सिंह ने बताया कि कटान रोकने के लिए अधिकारियों तक काफी दौड़ भाग की गई जिसके चलते सिंचाई विभाग ने थोड़ा बहुत इंतजाम किया है लेकिन यह नदी की तेज धार के आगे कितना कारगर होगा। नहीं कहा जा सकता।
दो घर और नदी में समाए, ग्रामीणों में खौफ
महेवागंज। शारदा नदी की विनाशलीला जारी है। शनिवार को ग्रंट 12 गांव में दो और घर नदी में समा गए। नदी तेजी से कटान कर आगे बढ़ रही है। इससे ग्रामीणों में खौफ है। ग्रामीणों के मुताबिक, शनिवार को बसावन और मुन्नी लाल के घर नदी के आगोश में चले गए। अन्य घरों पर भी नदी की नजर टेढ़ी है। नदी का रौद्र रूप देख ग्रामीण हैरान हैं। जिन लोगों के मकान कटने के मुहाने पर है उनके माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। घर गृहस्थी का सामान बचाने की जुगत में लोग लगे रहे। छप्पर और मवेशियों को ट्रैक्टर ट्रालियों में लादकर पीड़ित सुरक्षित ठिकाने की तलाश में गांव से पलायन कर रहे है। संवाद
मवेशी को बचाने के प्रयास में शारदा नदी में बहा बुजुर्ग
महेवागंज/सुंदरवल। फूलबेहड़ थाना क्षेत्र के गौरा घोसियाना निवासी 75 वर्षीय नत्था शुक्रवार की शाम शारदा नदी किनारे मवेशी चराने गए थे। इस बीच एक गाय झुंड से अलग होकर नदी के करीब चली गई और दलदल में फंस गई। पशु को बचाने के प्रयास में वह नदी के तेज बहाव में फंस गये। जब तक लोगों की नजर पड़ी और बचाने दौड़े तब तक वह पानी में बह गए।
पुलिस और परिजन बुजुर्ग की तलाश में जुटे रहे, लेकिन अंधेरा होने से खोजबीन में दिक्कत हुई। शनिवार को गोताखोरों की मदद से तलाश शुरू की गई। फिर भी कुछ पता नहीं लगा। फूलबेहड़ प्रभारी निरीक्षक एसएन सिंह ने बताया कि नदी में डूबे बुजुर्ग की स्थानीय गोताखोरों और गांव के लोगों की सहायता से तलाश की जा रही है। अभी कुछ पता नहीं चल सका है। संवाद