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करोड़पति शरद की किस्मत दुनिया छोड़ने तक लुटते रहे

Wed, 21 Oct 2020 02:13 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 21 Oct 2020 02:13 AM IST
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Millionaire looted till Sharad's fate left the world
शरद वर्मा (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

किच्छा में था फार्म हाउस, मुंबई में करोड़ों का बंगला, सब हो गया खुर्द-बुर्द
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बिहारीपुर कसगरान के आलीशान घर में शानदार बार के साथ था डांस हॉल

बरेली। भटनागर कॉलोनी में रहने वाले शरद वर्मा की रहस्यमय हालात में हुई मौत शहर भर में उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि जानने वालों के बीच चर्चा का विषय बन गई। बदनीयत लोगों की साजिशों से घिरने के बाद करोड़पति हैसियत और शहर के इस नामी परिवार की किस्मत एक जमाना पहले उससे ऐसी रूठी कि तमाम संपत्तियां खुर्द-बुर्द होती गईं। युवा होने के साथ खुद शरद की किस्मत का सितारा गर्दिश में डूब गया। एक समय करोड़ों में खेलने वाले शरद को ट्यूशन पढ़ाकर पेट भरने को मजबूर होना पड़ा।
शरद के पिता ओम प्रसाद वर्मा की फर्म वर्मा सीड कंपनी का कभी शहर में नाम था। उत्तराखंड के किच्छा में उनका आलीशान फार्म हाउस उनकी मौत के बाद खुर्द बुर्द हो गया। इस जमीन पर निगाह गड़ाए लोगों से शरद ने केस भी लड़ा लेकिन उसे किसी मुकाम तक नहीं पहुंचा पाए। बताते हैं कि वहां की ज्यादातर जमीन पर अब कॉलोनियां विकसित हो गई हैं। करीबियों के मुताबिक शरद का पुश्तैनी घर बिहारीपुर कसगरान में था जिसमें शानदार बार के साथ मुगलों के दरबार जैसा विशाल डांस हॉल भी था। उस दौर के एक चर्चित नेता ने शरद के पिता की मौत के बाद गर्दिश के दिनों में गुजर कर रहीं उनकी मां को नाममात्र की रकम देकर एक कागज पर दस्तखत कराकर यह शानदार बंगला कब्जा लिया।
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शरद के पिता के नाम स्टेशन रोड पर भी करोड़ों की संपत्ति थी, उस पर भी कब्जा कर लिया गया। बताया जा रहा है कि उनका मुंबई में भी करीब 80 करोड़ का फ्लैट था। अभी हाल में भी शरद की कोई बड़ी संपत्ति बेची गई थी जिसका पैसा कुछ लोगों ने हड़प लिया। करीबी लोगों में यह भी चर्चा है कि शरद के पास संपत्ति बिकने के बाद लाखों रुपये आने वाले थे। कुछ लोगों ने उन्हें झांसे में लेकर पॉवर ऑफ अटार्नी करा ली थी।
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शेरवुड कॉलेज में की थी पढ़ाई बेटी से बात करने को तरसते थे

शरद के रिश्तेदार सुरेश सक्सेना ने बताया कि उनकी शिक्षा नैनीताल के प्रसिद्ध शेरवुड कॉलेज में हुई थी। वहां के बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। वह फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते थे। इसके बावजूद बीमारी और अत्यधिक वजन से वह अवसाद में रहते थे। शरद की शादी 1988 में हुई थी मगर पत्नी ने बेटी के साथ चार साल बाद ही उन्हें छोड़ दिया। वह बेटी से बात करने को तरसते थे।

प्रॉपर्टी डीलरों के चंगुल में फंसे थे शरद वर्मा

दबंगों से करोड़ों की पुश्तैनी संपत्ति मुक्त कराने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ते-लड़ते शरद टूट गए। उनके पास मुकदमे लड़ने के लिए भी पैसा नहीं था। कुछ प्रॉपर्टी डीलरों और ठेकेदारों ने उन्हें झांसे में ले लिया। सूत्र बताते हैं कि मुंबई में उनका 80 करोड़ का बंगला देखने भी बरेली से प्रॉपर्टी डीलर गए थे। प्रॉपर्टी डीलर उनकी दूसरी संपत्तियों की भी जानकारियां जुटा रहे थे। ब्यूरो

पिता की वसीयत में शरद की बहन का भी नाम

शरद के पिता की वसीयत में शरद के साथ उनकी बहन छाया वर्मा उर्फ छाया भट्टाचार्य का भी नाम था। उसने परिवार की मर्जी के बिना बंगाली युवक से प्रेम विवाह कर लिया था। शरद की यह बहन फिलहाल दिल्ली की डिफेंस कॉलोनी में रहती है। शादी के वक्त परिवार ने उससे नाता तोड़ लिया था लेकिन वसीयत में उसका नाम देखकर लोग चौंके थे।
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