खुलासा: यौन शक्ति को बढ़ाने वाली दवाई अब मोटापा भी करेगी दूर, अध्ययन हुआ सफल, मिला पेटेंट
यह शोध विश्वविद्यालय के औषधि विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमित कुमार वर्मा और शारदा विश्वविद्यालय नोएडा की डॉ. ऋचा तिवारी ने मिलकर किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि काली मूसली पर कई शोध हुए।
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आयुर्वेद में काली मूसली का प्रयोग यौन शक्ति बढ़ाने और शारीरिक कमजोरी को दूर करने के लिए किया जाता रहा है, लेकिन अब इसके प्रयोग से मोटापा भी दूर होगा। इसका खुलासा रुहेलखंड विश्वविद्यालय के औषधि विज्ञान विभाग ने अपने शोध में किया है। काली मूसली की जड़ों में वैज्ञानिकों ने वे कंपाउंड ढूंढ़े हैं जिनसे मोटापा दूर होगा। यह तीन कंपाउंड करकूलिगोल, करकूलिग्निन एबीसी, लाइकोरीन हैं। वैज्ञानिकों ने एनिमल स्टडी पूरी कर ली है। अब यह शोध ह्यूमन ट्रायल की ओर बढ़ रहा है। प्रथम अध्ययन को इंटरनेशनल जर्नल ऑफ फार्मास्युटिकल एंड ड्रग रिसर्च में जगह मिली है। इसे पेटेंट भी मिल गया है।
यह शोध विश्वविद्यालय के औषधि विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमित कुमार वर्मा और शारदा विश्वविद्यालय नोएडा की डॉ. ऋचा तिवारी ने मिलकर किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि काली मूसली पर कई शोध हुए। कई प्रकार की आयुर्वेदिक दवाएं बनाई गईं, लेकिन मोटापा दूर करने वाले तत्व आज तक किसी ने नहीं खोजे। वर्ष 2019-20 में इस पर अध्ययन शुरू हुआ। शुरुआती चरण में अधिक सफलता हाथ नहीं लगी, लेकिन वैज्ञानिक और शोधार्थी इस कार्य में जुटे रहे। कई प्रयोगशालाओं में काली मूसली के कंपाउंड आदि की जांच की। शोध में अलग तरीके के कंपाउंड मिले तो उन पर काम आगे बढ़ा।
इस तरह कम होता गया चूहों का वजन
वैज्ञानिकों की टीम ने चूहों पर अध्ययन किया। चूहों के पांच ग्रुप बनाकर उन्हें हाई डाइट दी गई। कुछ ही दिनों में चूहों का कोलेस्ट्रॉल बढ़ गया। एंजाइम से लेकर प्रोटीन का भी विकास हुआ। उसके बाद काली मूसली की जड़ों से ढूंढे संबंधित कंपाउंड चूहों पर प्रयोग किए गए। देखा गया कि कुछ ही दिनों में चूहों का वजन कम होने लगा। यानी कोलेस्ट्रॉल कम हुआ और प्रोटीन का स्तर बढ़ गया। कई अन्य बदलाव भी देखे गए। इसके बाद चूहों के कई ग्रुपों पर इसका प्रयोग किया गया। इसी के साथ एनिमल स्टडी पूरी हो गई।
क्या है काली मूसली
काली मूसली औषधीय पौधा है, जिसकी जड़ें ठोस होती हैं। यह स्वाद में हल्का मीठापन और कड़वापन लिए होता है। इसकी तासीर गर्म होती है। इसके पत्ते ताड़ के पत्तों की तरह होते हैं। पीले रंग के फूलों के कारण इसे स्वर्ण पुष्पी या हिरण्या पुष्पी भी कहते हैं। इसकी जड़ें मोटी होती हैं जो काले या भूरे रंग की होती हैं। इसका प्रयोग कई आयुर्वेदिक दवाओं में किया जाता है।
काली मूसली पर कई प्रयोग हुए हैं लेकिन हमने अध्ययन के जरिये इसमें वे कंपाउंड ढूंढे हैं जो मोटापे को कम करेंगे। एनिमल स्टडी पूरी हो गई है। यह अध्ययन इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन का प्रभाव क्षेत्र भी काफी रहा है। - डॉ. अमित कुमार वर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर, औषधि विज्ञान विभाग, रुहेलखंड विश्वविद्यालय