मौलाना तौकीर रजा बोले: आरएसएस का काम कर रहे हैं अखिलेश यादव; ओवैसी पर कह दी बड़ी बात
बरेली में अमर उजाला से खास बातचीत में मौलाना तौकीर रजा खां ने कहा कि देश का लोकतंत्र सरकार में खत्म हो चुका है। कार्यपालिका और पत्रकारिता में लोकतंत्र खत्म हो चुका है। लोकतंत्र को बचाने के लिए आखिरी उम्मीद न्यायपालिका है, लेकिन इससे भी अब भरोसा कम होने लगा है। यह गंभीर बात है। इस विचार करना चाहिए। अगर न्यायपालिका से भरोसा उठ गया तो समझो सबकुछ खत्म है। मौलाना ने सपा, भाजपा और असदुद्दीन ओवैसी पर भी निशाना साधा। पढ़िए मौलाना तौकीर रजा के इंटरव्यू के मुख्य अंश...
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इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (आईएमसी) के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां ने कहा कि मुसलमानों का मसला आरएसएस और भाजपा नहीं है। मुसलमानों का मसला वे लोग हैं, जो मुसलमानों का हमदर्द बनते हैं। वो दल हैं, जो खुद को सेक्युलर कहते हैं और पीठ में छुरा घोंपने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि 2010 के दंगे बरेली को पूरी दुनिया में बदनाम किया है। उस दंगे के असल दोषी आज भी मिले हुए हैं।
'आरएसएस मुख्यालय से तय हुए सपा के टिकट'
मौलाना ने कहा कि भाजपा और सपा का अंदुरुनी तालमेल बना हुआ है। सपा को आरएसएस ने साजिश रचकर महागठबंधन का हिस्सा बनवाया गया है। इनके बहुत से टिकट आरएसएस मुख्यालय से तय हुए हैं। जो मुसलमान सीटें थीं, वो अखिलेश यादव ने सब खत्म कर दी। अब आरएसएस का काम भाजपा उतना नहीं कर रही है, जितना अखिलेश यादव कर रहे हैं।
चुनाव लड़ने के सवाल पर ये कहा
चुनाव लड़ने के सवाल पर मौलाना तौकीर रजा ने कहा कि जब हमने पार्टी बनाई थी, तब वादा किया था। हम किसी भी हाउस के मेंबर नहीं बनेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि मैं सियासत में हू। देश के लिए सियासत करता हूं। एमपी एमएलए बनना सियासत नहीं, यह खुदगर्जी है। देश में जो अन्याय हो रहा है, उसे दुनिया के सामने लाना चाहिए।
तौकीर रजा ने कहा कि वोटबैंक के रूप में मुसलमानों का उपयोग किया जाता था। अभी वह स्थिति नहीं है। कोई मुसलमानों से बात करने को तैयार नहीं है। कोई सॉफ्ट हिंदुत्व के रास्ते पर है तो कोई दल हार्ड हिंदुस्त के रास्ते पर चल रहा है। मुसलमान हमेशा दूसरों का झंडा उठाते रहे। हिंदुस्तान का मुसलमान कभी सांप्रदायिक नहीं रहा, उसने हमेशा भाईचारे का साथ दिया। भाजपा ने जो खाई बनाई है, यह हमारे देश के लिए बहुत घातक है।
पीएम मोदी-ओवैसी पर साधा निशाना
प्रधानमंत्री पर निशाना साधते मौलाना तौकीर रजा ने कहा कि नरेंद्र मोदी 2014 से पहले गुजरात से बाहर नहीं गए। असदुद्दीन ओवैसी भी 2014 से पहले हैदराबाद से कभी बाहर नहीं गए। ये दोनों नेता 2014 में एक साथ बाहर आते हैं तो भाजपा पूरी तरह छा जाती है। इसमें कुछ तो काला है। उन्होंने कहा कि ओवैसी ने जो बिल संसद में फाड़ा था। वो फाड़ नहीं, संसद में फड़वाया गया। क्योंकि दुनिया में जो दिखना है, हमारे यहां मुसलमान खुश हैं।
कोर्ट से जारी समन पर ये कहा
मौलाना ने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट का जो समन मेरे खिलाफ जारी हुआ था, अगर यह सामान्य समन होता तो पहली बार में ही हाजिर होता। सच्चाई यह है कि जब समन जारी हुआ था, तब वह केरल में थे। इस समन के बाद गैरजमानती वारंट जारी कर दिया।
मौलाना ने कहा कि 2010 के दंगे में मुझे दोषी ठहराया गया। मेरी गिरफ्तारी भी हुई। जांच में क्लीनचिट दी गई थी। मगर दंगा तो हुआ। अगर मैंने नहीं कराया तो किसने कराया। इसकी जांच होनी चाहिए। किसी रिटायर्ड जज या एजेंसी के जरिए जांच होनी चाहिए। मौलाना ने बरेली के कुछ स्थानीय नेताओं पर साजिश रचने का आरोप लगाया।
तौकीर रजा ने कहा कि मुझे सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। अगर राहत न भी मिलती है तो सुप्रीम कोर्ट का आदेश मानना मेरी जिम्मेदारी है। कोर्ट का जो भी आदेश होता, उसे मानता। हाजिर होता, लेकिन इस बीच मेरी तबीयत बिगड़ गई थी और मुझे अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा था।