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UP News: मदरसों में श्लोक-मंत्र पढ़ाने के फैसले का विरोध, मौलाना शहाबुद्दीन बोले- इससे हो सकता है टकराव

Fri, 18 Oct 2024 03:58 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 18 Oct 2024 03:58 PM IST
सार

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि मदरसों में संस्कृत पढ़ाई जाएगी। उत्तराखंड सरकार के फैसले का हम स्वागत करते हैं, लेकिन श्लोक और मंत्र भी पढ़ाए जाएंगे, इस पर एतराज है।

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Maulana Shahabuddin Razvi opposed the decision to teach shloka-mantra in madrasas
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने उत्तराखंड सरकार के उस फैसले पर एतराज जताया है, जिसमें मदरसों में श्लोक व मंत्र पढ़ाने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि मदरसों में श्लोक व मंत्र पढ़ाए जाने से टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। उत्तराखंड सरकार को इस फैसले को वापस लेना पड़ेगा। 

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मौलाना ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने मदरसों में संस्कृत लागू करने की बात कही है। संस्कृत एक भाषा है। उसे पढ़ना चाहिए। पढ़ने में कोई हर्ज नहीं है। ज्ञान के तौर पर हर इल्म का जरूरी है। पैगंबर-ए-इस्लाम ने भी कहा था कि इल्म हासिल करना चाहिए। ज्ञान से बच्चों का भविष्य बेहतर होता है। भाषाएं सीखने से बाहरी दुनिया में बातचीत करने में कोई दिक्कत नहीं होती है। 

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'श्लोक-मंत्र मजहबी अमल'
शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि मदरसों में संस्कृत पढ़ाई जाएगी, उत्तराखंड सरकार के फैसले का हम स्वागत करते हैं। श्लोक और मंत्र भी पढ़ाए जाएंगे, इस पर एतराज है। उन्होंने कहा कि श्लोक और मंत्र धर्म विशेष का मजहबी अमल है। इस्लाम धर्म के प्रचारक मदरसों में मुसलमान बच्चों को श्लोक व मंत्र पढ़ाया जाएगा, जिससे कभी न कभी टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। 

उन्होंने कहा कि जैसे संस्कृत की पाठशालाओं में कुरआन नहीं पढ़ा जा सकता है, ऐसे ही मदरसों में श्लोक व मंत्र नहीं पढ़ाए जा सकते। ये दोनों मजहब के मजहबी मामलात हैं। दोनों को अलग-अलग ही रखना चाहिए। मदरसों में श्लोक व मंत्र भी पढ़ाए जाने के फैसले को उत्तराखंड की सरकार को वापस लेना ही पड़ेगा। 

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