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UP News: छांगुर के खिलाफ फतवा, मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा- ऐसे लोगों का बहिष्कार करें मुसलमान

Fri, 18 Jul 2025 01:22 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 18 Jul 2025 01:22 PM IST
सार

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि कोई भी व्यक्ति किसी के ऊपर इस्लाम कबूल करने के लिए दबाव नहीं डाल सकता। छांगुर ने जो कुछ भी किया वो गैर कानूनी तो है ही, साथ ही उसने इस्लाम के वसूलों के खिलाफ भी काम किया है। इसलिए वह इस्लाम की नजर में मुजरिम है। मुस्लिम समाज ऐसे लोगों का बहिष्कार करे। 

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Maulana Shahabuddin Razvi issued fatwa against Changur Baba Jalaluddin
छांगुर बाबा के खिलाफ बरेलवी मौलाना ने दिया फतवा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

अवैध धर्म परिवर्तन कराने के आरोपी जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने जुबानी फतवा दिया है। मौलाना ने कहा कि जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा ने जो कुछ भी किया वो गैर कानूनी तो है ही, साथ ही उसने इस्लाम के वसूलों के खिलाफ भी काम किया। उसने इस्लाम की छवि को धूमिल किया। बहुत सारे मुसलमान मुसीबतों का शिकार हुए। इसलिए वह इस्लाम की नजर में मुजरिम है। मुस्लिम समाज ऐसे लोगों का बहिष्कार करें।

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शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि इस्लाम में जब्र नहीं है। पैगंबरे-ए-इस्लाम की हदीस शरीफ है कि इस्लाम धर्म बहुत आसान है। इसमें जब्र (मजबूरी) और दबाव नहीं है, किसी व्यक्ति के ऊपर इस्लाम कबूल करने के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता। पैगंबर-ए-इस्लाम की पूरी जीवनी पर नजर डालिए तो उन्होंने कभी भी किसी गैर मुस्लिम को प्रलोभन या लालच नहीं दिया। कभी किसी गैर मुस्लिम पर इस्लाम धर्म कबूल करने के लिए दबाव नहीं डाला। वह मुस्लिमों और गैर मुस्लिमों दोनों के साथ अच्छा व्यवहार करते थे। 
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मौलाना ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम के दौर में गैर मुस्लिम नागरिकों के जान-माल, इज्जत की सुरक्षा प्रदान करना मुसलमानों की एक अहम जिम्मेदारी बन जाती थी। पैगंबर-ए-इस्लाम के दौर में एक गैर मुस्लिम के कत्ल का वाक्या पेश आया, जब ये घटना पैगंबर के सामने आई तो उन्होंने अदल और इंसाफ की बेहतरीन मिसाल कायम करते हुए बतौरे किसास (बदला) मुसलमान को कत्ल करने का आदेश दिया। उन्होंने उस मुसलमान की कोई रियायत नहीं की। 

प्यार और मोहब्बत वाला धर्म है इस्लाम 
मौलाना ने कहा कि धर्म के प्रचार-प्रसार की हर शख्स को इजाजत हासिल है। इस्लाम का प्रचारक अपने धर्म के प्रचार के किसी गैर मुस्लिम के सामने इस्लाम की खूबियां बयान तो कर सकता है, लेकिन उसे इस बात की बिल्कुल इजाजत नहीं है कि वह पहले से अपने धर्म पर अमल कर रहे उन गैर मुस्लिमों पर जोर व जबरदस्ती कर उन्हें इस्लाम धर्म में दाखिल करने की कोशिश करें। मौलाना ने आगे कहा कि इस्लाम जब्र (मजबूरी), दबाव, लालच का धर्म नहीं है बल्कि प्यार और मोहब्बत वाला धर्म है।

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