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हैवी मेटल वॉटर से जल्द ही मिलेगी निजात
बरेली
Updated Sun, 27 Sep 2015 12:59 AM IST
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बरेली। बरेली के लोगों को हैवी मेटल वॉटर से निजात मिलेगी। इसके लिए रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्लांट साइंस विभाग को सेंटर फॉर एक्सीलेंस के प्रोजेक्ट के तहत राज्य सरकार से आठ लाख रुपये मिले हैं। प्रो. एके जेटली के निर्देशन में इस प्रोजेक्ट पर शोध किया जाएगा।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्लांट साइंस विभाग का सेंटर फॉर एक्सीलेंस का प्रोजेक्ट मंजूर होने के बाद अब काम शुरू हो गया है। इसके लिए एक एसोसिएट की ज्वॉइनिंग हो गई है। जल्द ही शोध शुरू हो जाएगा। प्रो. एके जेटली ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में यह देखा जाएगा कि पानी में कितने हैवी मेटल हैं, ये कहां से आ रहे हैं और इन्हें खत्म करने के लिए क्या किया जा सकता है। यह प्रोजेक्ट दो साल के लिए मिला है। दो साल तक हैवी मेटल पर शोध होगा। इसके बाद हैवी मेटल से निजात मिल पाएगी। प्रो. जेटली ने कहा कि सीसा आदि हैवी से लोगों को काफी नुकसान होता है। अगर ये शरीर में लगातार जाएं तो जानलेवा स्थिति तक पैदा हो सकती है।
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कुलपति ने कई बार प्रोजेक्ट वापस करने के लिए कहा
प्रो. एके जेटली ने बताया कि कुलपति कई बार यह प्रोजेक्ट वापस करने के लिए कह चुके हैं। दरअसल, इसमें एसोसिएट की नियुक्ति के समय कुलपति की ओर से बनी कमेटी में डीन के न शामिल होने की वजह से इसे नियुक्ति निरस्त करने के लिए कहा था। लेकिन, तब तक ज्वॉइनिंग हो चुकी थी। हालांकि, बाद में कुलपति ने अपनी निर्णय वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में हर काम इसी तरह से रुकावटें होती हैं। कोई भी काम शुरू करने के लिए ऐसे अड़ंगे लगते हैं।
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्लांट साइंस विभाग का सेंटर फॉर एक्सीलेंस का प्रोजेक्ट मंजूर होने के बाद अब काम शुरू हो गया है। इसके लिए एक एसोसिएट की ज्वॉइनिंग हो गई है। जल्द ही शोध शुरू हो जाएगा। प्रो. एके जेटली ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में यह देखा जाएगा कि पानी में कितने हैवी मेटल हैं, ये कहां से आ रहे हैं और इन्हें खत्म करने के लिए क्या किया जा सकता है। यह प्रोजेक्ट दो साल के लिए मिला है। दो साल तक हैवी मेटल पर शोध होगा। इसके बाद हैवी मेटल से निजात मिल पाएगी। प्रो. जेटली ने कहा कि सीसा आदि हैवी से लोगों को काफी नुकसान होता है। अगर ये शरीर में लगातार जाएं तो जानलेवा स्थिति तक पैदा हो सकती है।
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कुलपति ने कई बार प्रोजेक्ट वापस करने के लिए कहा
प्रो. एके जेटली ने बताया कि कुलपति कई बार यह प्रोजेक्ट वापस करने के लिए कह चुके हैं। दरअसल, इसमें एसोसिएट की नियुक्ति के समय कुलपति की ओर से बनी कमेटी में डीन के न शामिल होने की वजह से इसे नियुक्ति निरस्त करने के लिए कहा था। लेकिन, तब तक ज्वॉइनिंग हो चुकी थी। हालांकि, बाद में कुलपति ने अपनी निर्णय वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में हर काम इसी तरह से रुकावटें होती हैं। कोई भी काम शुरू करने के लिए ऐसे अड़ंगे लगते हैं।
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