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अमृत महोत्सव: देवास रियासत का महामंत्री पद छोड़ आजादी की जंग में कूदे थे रुकुम सिंह, इन आंदोलनों का रहे हिस्सा
Sat, 06 Aug 2022 12:30 AM IST
बरेली ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
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Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 06 Aug 2022 12:30 AM IST
सार
कुंवर रुकुम सिंह ने स्वतंत्रता आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई। उनका जन्म बदायूं से सटे नगला शर्की गांव में कुंवर केहरी सिंह राठौर के घर हुआ था। नमक आंदोलन में जेल जाने के बाद 1932 में सविनय अवज्ञा आंदोलन में उन्हें एक वर्ष की जेल और 100 रुपये का जुर्माना हुआ।
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कुंवर रुकुम सिंह की प्रतिमा
- फोटो : BADAUN
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विस्तार
साल 1930 में बदायूं के गुलड़िया में जब नमक आंदोलन जोर पर था, तब कुंवर रुकुम सिंह की आयु करीब 35 वर्ष थी। उस समय वह मध्यप्रदेश की देवास रियासत में महामंत्री थे। उन्होंने महामंत्री पद छोड़ दिया और आजादी के आंदोलन में कूद पड़े। नमक आंदोलन के दौरान उनको छह महीने जेल और 50 रुपये जुर्माने की सजा हुई।
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कुंवर रुकुम सिंह ने स्वतंत्रता आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई। उनका जन्म बदायूं से सटे नगला शर्की गांव में कुंवर केहरी सिंह राठौर के घर हुआ था। नमक आंदोलन में जेल जाने के बाद 1932 में सविनय अवज्ञा आंदोलन में उन्हें एक वर्ष की जेल और 100 रुपये का जुर्माना हुआ। वर्ष 1937 में हुए चुनाव में कुंवर रुकुम सिंह प्रांतीय विधानसभा के सदस्य चुने गए। 1939 में अंग्रेज कलेक्टर के आदेश के विरोध में कुंवर रुकुम सिंह के नेतृत्व में पूरा नगला गांव दो मील दूर जंगल में जाकर रहने लगा। बाद में यह आदेश वापस हुआ तो ग्रामीण घरों को लौट आए।
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1940-41 में सत्याग्रह आंदोलन में उन्होंने भाग लिया। उनको अंग्रेजी हुकूमत ने इसके लिए 18 महीने का सश्रम कारावास और 150 रुपये का जुर्माना की सजा सुनाई। 1942 में उनको लंबे समय तक नजरबंद रखा गया। बार-बार सजा और जुर्माने के बाद भी वह विचलित नहीं हुए और स्वतंत्रता आंदोलन को धार देते रहे। 1962 से 1967 तक रुकुमसिंह फिर से विधानसभा सदस्य रहे। रुकुम सिंह के बेटे कुंवर गोर्वधन सिंह और बेटी विद्यावती ने भी पिता का साथ दिया। कुंवर गोर्वधन सिंह को अंग्रेजी हुकूमत में कछला रेल पुल और स्टेशन उड़ाने की योजना के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
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बाल अवस्था में स्वतंत्रता संग्राम लड़ीं विद्यावती
कुंवर रुकुम सिंह की बेटी विद्यावती उस समय बाल अवस्था में थीं, जब स्वतंत्रता के लिए आंदोलन चरम पर था। वह स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को सूचनाएं देने का काम करती थीं। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विद्यावती को कागज पर लिखकर सूचनाएं देते थे। वह इन सूचनाओं को एक जगह से दूरी जगह पहुंचाने का काम करती थीं। बाल अवस्था होने के कारण अंग्रेजी हुकूमत के अफसर उन पर शक नहीं करते थे। विद्यावती के नाम से ही यहां विद्यावती वैदिक कन्या इंटर कॉलेज है।
स्वतंत्रता संग्राम के साथ शिक्षा पर भी जोर दिया
कुंवर रुकुम सिंह इंटर कॉलेज के रिटायर्ड प्रधानाचार्य डॉ. वीपी मिश्रा बताते हैं कि कुंवर रुकम सिंह ने शिक्षा पर भी जोर दिया। उन्होंने दो कॉलेजों की स्थापना की। इन दोनों कॉलेजों का नाम वैदिक जूनियर हाईस्कूल रखा गया था। कुंवर रुकुम सिंह के निधन के बाद नगला शर्की स्थित कॉलेज का नाम बदलकर कुंवर रुकुम सिंह वैदिक इंटर कॉलेज कर दिया गया।
स्रोत : रघुवीर सहाय की पुस्तक ‘बदायूं जिले के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास’ में भी इन घटनाओं का जिक्र है।a