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गुड और तिल से बकरे की आकृति बनाकर दूब से काटा, सुनीं कथाएं
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शाहजहांपुर में सकट पर्व पर गुड का बकरा काटते बच्चे। संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। हिंदू परिवारों में माताओं ने शुक्रवार को अपने बेटों की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखा और सकट पूजन किया गया। इस दौरान गुड़ और तिल से बकरे की आकृति बनाकर दूब (घास) से काटा। इसके साथ ही पूजन से जुड़ी कथाएं सुनी गई।
शुक्रवार को सकट चौध (संकष्टी चतुर्थी) का दिन था। इस दिन माताएं अपने पुत्रों की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखकर पूजन करती हैं। इसके लिए तिल सुखाने आदि को कई दिन पहले से ही तैयारी शुरू हो गई थी। शुक्रवार को माताएं जल्दी उठी और नित्यकर्म से निवृत्त होने के बाद पूजा की तैयारी में जुट गई। घर के आंगन में चौक बनाया गया। जिस पर लकड़ी का पटला रखकर भगवान गणेश के रूप में मिट्टी व सुपारी को रखा गया।
इसके बाद घर की बुजुर्ग महिलाओं या पंडितों ने सकट से जुड़ी कथाओं को सुनाया और विधिवत पूजन किया। तिल को भूनकर गुड़ के साथ कूट कर तिलकुट का पहाड़ बनाया गया था, तो कही तिलकुट का बकरा भी बनाया गया। उसकी पूजा करके परिवार बेटों ने दूब से तिलकूट बकरे की गर्दन काटी। जिसका सबको प्रसाद के रूप में वितरण किया गया। इसके साथ ही घरों में तिल-गुड़ के पकवान बनाए गए।
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शुक्रवार को सकट चौध (संकष्टी चतुर्थी) का दिन था। इस दिन माताएं अपने पुत्रों की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखकर पूजन करती हैं। इसके लिए तिल सुखाने आदि को कई दिन पहले से ही तैयारी शुरू हो गई थी। शुक्रवार को माताएं जल्दी उठी और नित्यकर्म से निवृत्त होने के बाद पूजा की तैयारी में जुट गई। घर के आंगन में चौक बनाया गया। जिस पर लकड़ी का पटला रखकर भगवान गणेश के रूप में मिट्टी व सुपारी को रखा गया।
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इसके बाद घर की बुजुर्ग महिलाओं या पंडितों ने सकट से जुड़ी कथाओं को सुनाया और विधिवत पूजन किया। तिल को भूनकर गुड़ के साथ कूट कर तिलकुट का पहाड़ बनाया गया था, तो कही तिलकुट का बकरा भी बनाया गया। उसकी पूजा करके परिवार बेटों ने दूब से तिलकूट बकरे की गर्दन काटी। जिसका सबको प्रसाद के रूप में वितरण किया गया। इसके साथ ही घरों में तिल-गुड़ के पकवान बनाए गए।
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