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निकाह को आसान बनाएं, फिजूल खर्ची से बचें: असजद मियां
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उर्स स्थल में जमा जायरीन।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
जमीयतुर रजा में तीन रोजा उर्स-ए-रजवी का समापन, ऑनलाइन जुड़े 35 लाख जायरीन
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बरेली। आला हजरत इमाम अहमद रजा फाजिले बरेलवी का मदरसा जामियतुर रजा में चल रहा तीन रोजा उर्स कुल की रस्म के साथ सोमवार को मुकम्मल हो गया। यहां आयोजित जलसे में तमाम उलमा इकराम ने आला हजरत की जिंदगी पर रोशनी डाली। साथ ही दुनियावी जिंदगी को आसान बनाने के लिए इस्लामी तरीके भी बयान किए।
जलसे की सरपरस्ती करते हुए काजी-ए-हिंदुस्तान मुफ्ती असजद रजा खां कादरी ने दीनी तकरीर के साथ ही कहा कि लोगों को चाहिए कि वे अपने बेटे-बेटियों के निकाह में ज्यादा देर न करें। फिजूलखर्ची से बचते हुए निकाह को आसान बनाएं। अल्लामा जियाउल मुस्तफा ने कहा कि दुनियावी तालीम के साथ बच्चों को दीनी तालीम भी जरूर दिलाएं। मौलाना शहजाद आलम ने कहा कि बेगुनाहों को मुल्जिम न ठहराया जाए। हुकूमत के ओहदेदार न्यायपूर्ण काम करें। जलसे को सैयद गयास मियां (काल्पी शरीफ), मौलाना अबू यूसुफ, मौलाना शकील रामपुरी, मौलाना कफील संभली, मौलाना फैजान रजा ने भी खिताब किया।
सदारत जमात के उपाध्यक्ष एवं उर्स प्रभारी सलमान मियां और निगरानी जमात के महासचिव फरमान मियां की रही। निजामत मौलाना गुलजार ने की। जमात के प्रवक्ता समरान खान ने बताया कि पूर्व में जलसे की शुरुआत कुरान ख्वानी और नातो मनकबत की महफिल से हुई। दोपहर 2:38 बजे कुल की रस्म अदा की गई। आखिर में असजद मियां ने देश दुनिया में अमन-ओ-अमान के लिए दुआ की। इस कार्यक्रम को देश-विदेश के 35 लाख जायरीन ने ऑनलाइन सुना।
जलसे की सरपरस्ती करते हुए काजी-ए-हिंदुस्तान मुफ्ती असजद रजा खां कादरी ने दीनी तकरीर के साथ ही कहा कि लोगों को चाहिए कि वे अपने बेटे-बेटियों के निकाह में ज्यादा देर न करें। फिजूलखर्ची से बचते हुए निकाह को आसान बनाएं। अल्लामा जियाउल मुस्तफा ने कहा कि दुनियावी तालीम के साथ बच्चों को दीनी तालीम भी जरूर दिलाएं। मौलाना शहजाद आलम ने कहा कि बेगुनाहों को मुल्जिम न ठहराया जाए। हुकूमत के ओहदेदार न्यायपूर्ण काम करें। जलसे को सैयद गयास मियां (काल्पी शरीफ), मौलाना अबू यूसुफ, मौलाना शकील रामपुरी, मौलाना कफील संभली, मौलाना फैजान रजा ने भी खिताब किया।
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सदारत जमात के उपाध्यक्ष एवं उर्स प्रभारी सलमान मियां और निगरानी जमात के महासचिव फरमान मियां की रही। निजामत मौलाना गुलजार ने की। जमात के प्रवक्ता समरान खान ने बताया कि पूर्व में जलसे की शुरुआत कुरान ख्वानी और नातो मनकबत की महफिल से हुई। दोपहर 2:38 बजे कुल की रस्म अदा की गई। आखिर में असजद मियां ने देश दुनिया में अमन-ओ-अमान के लिए दुआ की। इस कार्यक्रम को देश-विदेश के 35 लाख जायरीन ने ऑनलाइन सुना।
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