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प्रवासियों के राशन कार्ड बनाओ.. कहे सरकार मगर सिस्टम पर इन्हें तरसाने के बहाने हजार

Mon, 08 Jun 2020 02:06 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jun 2020 02:06 AM IST
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Make a ration card of the migrants .. Say government but thousand on the system to excuse them
demo pic - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सरकार के तमाम आदेशों के बावजूद पांच फीसदी प्रवासियों के अब तक नहीं बन पाए राशन कार्ड

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बरेली। शासन ने लॉकडाउन में बाहर से आए सभी प्रवासी मजदूरों के परिवार को राशन मुहैया कराने के लिए राशनकार्ड बनाने के निदेश दिए हैं मगर सिस्टम की लेटलतीफी के चलते इन परिवारों को कोई खास लाभ मिलता नजर नहीं आ रहा। बरेली में ही 30 हजार प्रवासियों के वापस आने का आंकड़ा है मगर राशन कार्ड सिर्फ 1300 ही जारी किए गए। मंडल के सभी चारों जिलों में प्रवासियों के लौटने का आंकड़ा करीब एक लाख बताया जा रहा है। जबकि पूर्ति एवं खाद्य विभाग ने अब केवल लगभग सात हजार ही राशनकार्ड ही कार्ड बनाए हैं।
खाद्य आयुक्त मनीष चौहान ने हाल में खाद्य एवं पूर्ति विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा की थी। उसमें अफसरों ने बताया था कि प्रवासी मजदूरों के लिए बरेली में केवल 1301 राशनकार्ड, पीलीभीत में 1068, शाहजहांपुर में 3407 और बदायूं में भी सिर्फ 1524 राशनकार्ड जारी किए हैं। इन सभी कार्डों में महज 18 से 19 हजार नए सदस्यों के नाम जोड़ गए हैं। जबकि अकेले बरेली में ही 30 हजार प्रवासी मजदूरों के वापस आने की रिपोर्ट प्रशासन के पास है। हालांकि रिकार्ड से बाहर प्रवासी मजदूरों की संख्या इससे कहीं ज्यादा बताई जा रही है। बरेली से आंकड़ों से जाहिर हो रहा है कि बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर ऐसे बाकी रह गए हैं, जिन्हें राशनकार्ड न जारी होने से कोटे की दुकानों पर राशन भी नहीं मिल पा रहा है।
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विशेष सचिव के सामने भी आ चुकी है हकीकत

कोटे की दुकानों को चेक करने आए विशेष सचिव खाद्य ओपी वर्मा के सामने भी प्रवासी मजदूरों के राशनकार्ड काफी कम संख्या में बने होने की हकीकत सामने आ चुकी है। फरीदपुर और क्यारा की कोटे की कई दुुकानों पर प्रवासी मजदूरों के राशनकार्ड काफी कम संख्या में जारी हुए हैं। हालांकि डीएसओ सीमा त्रिपाठी का कहना था कि बाहर से बड़ी संख्या में मजदूरों के राशनकार्ड पहले से ही बने हैं।
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अभी दो महीने के लिए बनाए जा रहे अस्थायी कार्ड

प्रवासी मजदूरों को त्वरित राशन की सुविधा देने के लिए शासन के आदेश पर अभी केवल दो महीने के लिए ही अस्थायी कार्ड बनाए जा रहे हैं। हालांकि बाद में इनका सत्यापन करके स्थायी करने की योजना भी बन सकती है।
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