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Bareilly News: प्रसूता की मौत में महेशनाथ अस्पताल प्रबंधन मिला दोषी, पंजीकरण निलंबित
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बरेली। हरूनगला स्थित महेशनाथ हॉस्पिटल में प्रसूता रूबी की मौत के मामले की जांच में इलाज में लापरवाही की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट के आधार पर सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने अस्पताल का पंजीकरण निलंबित कर दिया है। भर्ती मरीजों को स्थानांतरित कर संचालन पर रोक लगा दी है। भविष्य में अस्पताल में चिकित्सा कार्य होते पाए जाने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।
पीलीभीत के बिलसंडा निवासी सतीश वर्मा ने 25 जून को जिलाधिकारी को शिकायती पत्र दिया था। आरोप लगाया था कि पत्नी रूबी देवी की महेशनाथ हॉस्पिटल में प्रसव के बाद इलाज में लापरवाही से मौत हो गई। जिलाधिकारी के निर्देश पर स्त्री रोग विशेषज्ञ, डिप्टी सीएमओ, एसडीएम सदर, नगर मजिस्ट्रेट को शामिल कर चार सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। डिप्टी सीएमओ डॉ. अमित कुमार ने अस्पताल का निरीक्षण किया। अस्पताल प्रबंधन ने प्रसूता के इलाज से संबंधित कोई रिकॉर्ड नहीं दिखाया तो आईसीयू को सील कर दिया गया। बयान दर्ज कराने के लिए दोनों पक्षों को नोटिस भेजे गए।
शिकायतकर्ता सतीश ने आरोप दोहराए। अस्पताल संचालक दीपक प्रकाश पटेल ने कहा कि मरीज का इलाज डॉ. दीपू यादव, डॉ. अनिल कुमार सिंह और डॉ. सर्वेश ने किया था। तीनों डॉक्टर को अभिलेख के साथ बुलाया गया पर कोई पेश नहीं हुआ। सीसीटीवी फुटेज भी नहीं दी।
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अस्पताल के रिकॉर्ड में नहीं मिले डॉक्टरों के नाम
अस्पताल के अभिलेखों की जांच में पता चला कि संचालक ने जिन चिकित्सकों को इलाज के लिए जिम्मेदार बताया है, उनके नाम रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हैं। समिति ने इसे गंभीर अनियमितता मानकर रिपोर्ट में कहा कि अस्पताल प्रबंधन ने न दस्तावेज पेश किया, न ही सीसी फुटेज। इलाज करने वाले चिकित्सकों को भी पेश नहीं किया। लिहाजा, प्रथम दृष्टया प्रसूता की मौत इलाज के अभाव में हुई। इसके लिए अस्पताल प्रबंधन जिम्मेदार है। रिपोर्ट के अनुसार, महेशनाथ हॉस्पिटल उप्र क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट पोर्टल पर पंजीकृत था। पंजीकरण 13 मई 2025 को नवीनीकृत हुआ और 12 मई 2030 तक वैध था।
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पीलीभीत के बिलसंडा निवासी सतीश वर्मा ने 25 जून को जिलाधिकारी को शिकायती पत्र दिया था। आरोप लगाया था कि पत्नी रूबी देवी की महेशनाथ हॉस्पिटल में प्रसव के बाद इलाज में लापरवाही से मौत हो गई। जिलाधिकारी के निर्देश पर स्त्री रोग विशेषज्ञ, डिप्टी सीएमओ, एसडीएम सदर, नगर मजिस्ट्रेट को शामिल कर चार सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। डिप्टी सीएमओ डॉ. अमित कुमार ने अस्पताल का निरीक्षण किया। अस्पताल प्रबंधन ने प्रसूता के इलाज से संबंधित कोई रिकॉर्ड नहीं दिखाया तो आईसीयू को सील कर दिया गया। बयान दर्ज कराने के लिए दोनों पक्षों को नोटिस भेजे गए।
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शिकायतकर्ता सतीश ने आरोप दोहराए। अस्पताल संचालक दीपक प्रकाश पटेल ने कहा कि मरीज का इलाज डॉ. दीपू यादव, डॉ. अनिल कुमार सिंह और डॉ. सर्वेश ने किया था। तीनों डॉक्टर को अभिलेख के साथ बुलाया गया पर कोई पेश नहीं हुआ। सीसीटीवी फुटेज भी नहीं दी।
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अस्पताल के रिकॉर्ड में नहीं मिले डॉक्टरों के नाम
अस्पताल के अभिलेखों की जांच में पता चला कि संचालक ने जिन चिकित्सकों को इलाज के लिए जिम्मेदार बताया है, उनके नाम रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हैं। समिति ने इसे गंभीर अनियमितता मानकर रिपोर्ट में कहा कि अस्पताल प्रबंधन ने न दस्तावेज पेश किया, न ही सीसी फुटेज। इलाज करने वाले चिकित्सकों को भी पेश नहीं किया। लिहाजा, प्रथम दृष्टया प्रसूता की मौत इलाज के अभाव में हुई। इसके लिए अस्पताल प्रबंधन जिम्मेदार है। रिपोर्ट के अनुसार, महेशनाथ हॉस्पिटल उप्र क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट पोर्टल पर पंजीकृत था। पंजीकरण 13 मई 2025 को नवीनीकृत हुआ और 12 मई 2030 तक वैध था।