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Bareilly News: सियासी कौशल से विरोधियों को भी बनाया मुरीद, दो बार रहे नगर प्रमुख

Tue, 22 Oct 2024 06:55 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 22 Oct 2024 06:55 AM IST
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Made even his opponents fans with his political skills, was city chief twice
बरेली। वर्ष 1989 में शहर को महानगर पालिका का दर्जा मिला। पहली बार पार्षदों को नगर प्रमुख चुनने के लिए मतदान करना था। भाजपा के पास बहुमत से कम मात्र 14 पार्षद थे। विपक्षी खेमे में निर्दलीय पार्षदों की संख्या अधिक थी। राजकुमार अग्रवाल ने अपने राजनीतिक कौशल की बदौलत कई निर्दलीय पार्षदों को अपना मुरीद बना लिया था। विरोधियों को चित करते हुए वह शहर के पहले नगर प्रमुख निर्वाचित हुए थे।
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सालभर बाद ही राममंदिर आंदोलन के समर्थन में उन्होंने सक्रियता बढ़ाई तो राजनीतिक विरोधियों को मौका मिल गया। वह उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ले आए। राजकुमार अग्रवाल के राजनीतिक सहयोगी और महानगर पालिका में उप सभापति रहे डॉ. सीपीएस चौहान ने बताया कि उन दिनों 60 सभासदों (अब पार्षद) का सदन हुआ करता था। बहुमत के लिए 31 पार्षद चाहिए थे। तब राजकुमार अग्रवाल को पद छोड़ना पड़ा था। 29 नवंबर 1990 से 18 अगस्त 1991 तक नसीम अहमद खां कार्यवाहक नगर प्रमुख रहे। इसी अवधि में राजकुमार अग्रवाल ने उन्हीं पार्षदों को अपने खेमे में कर लिया, जिन्होंने अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन किया था। एक साल बाद दोबारा मतदान हुआ तो 38 मत हासिल करके राजकुमार अग्रवाल ने विरोधियों को धूल चटा दी थी।
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पूर्व पार्षद हाजी मुख्तार वसीम ने बताया कि- मैं कांग्रेस से सभासद और सदन में विपक्षी दल का नेता था। मैं ओर मेरी पार्टी अविश्वास प्रस्ताव लाई थी। इसके समर्थन में 38 और विरोध में 28 मत पड़े थे। इसलिए उन्हें पद छोड़ना पड़ा। उनसे पहले कोई नगर प्रमुख अविश्वास के माध्यम से पद से नहीं हटाया गया था। अविश्वास प्रस्ताव में पद गंवाने के बाद भी उन्होंने मेरे और अविश्वास लाने वाले सभासदों के मान-सम्मान में कोई कमी नहीं की। यही वजह रही कि तमाम निर्दलीय सभासद जो अविश्वास प्रस्ताव लाए थे, दोबारा चुनाव हुआ तो वे राजकुमार अग्रवाल के समर्थन में आ गए थे। इसकी बदौलत उन्होंने जीत दर्ज की थी।
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मैं सपा से चुनाव लड़ा, पर पिता जी भाजपा के साथ रहे : रवि
हिंदुत्व को समर्पित राजकुमार अग्रवाल ने कभी दल-बदल नहीं किया। वर्ष 2002 में उनके पुत्र रविप्रकाश अग्रवाल सपा के टिकट पर सदर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े, लेकिन राजकुमार अग्रवाल तब भी भाजपा में बने रहे। भाजपा के पदाधिकारी उनकी वफादारी की मिसाल देते हैं।
रविप्रकाश अग्रवाल टिकट के दावेदार थे, लेकिन भाजपा ने उनकी जगह राजेश अग्रवाल को प्रत्याशी बनाया था। तब रविप्रकाश अग्रवाल सपा से चुनाव लड़ गए थे। उन्हें टिकट दिलाने वाले सपा के दिग्गज नेता ने बताया कि टिकट मिलने के बाद जब अगली सुबह उनके घर जाकर राजकुमार अग्रवाल को इसकी जानकारी दी तो वह बोले- जीत नहीं पाएंगे। उनके करीबी रहे लोकतंत्र सेनानी वेदप्रकाश वर्मा ने कहा- बेटा भले ही सपा से लड़ा, पर राजकुमार अग्रवाल हिंदुत्व के साथ रहे। भाजपा के जिस पौधे को उन्होंने शहर में वृक्ष बनाया, अंतिम समय तक वह उसके साथ ही रहे। बेटे रवि प्रकाश ने कहा- मैं सपा से चुनाव लड़ा, पर मेरे पिता ने भाजपा का ही साथ दिया था।
कुछ सपने रह गए अधूरे
राजकुमार अग्रवाल चाहते थे कि सिटी श्मशान भूमि में विद्युत शवदाह गृह संचालित हो। इसके लिए उन्होंने प्रयास भी किया था, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। अब इस जरूरत को पूरा कराने के लिए प्रयास होना चाहिए। यह बात उनके करीबी लोगों ने कही।


अग्रवाल समाज को किया एकजुट

अग्रवाल समाज को एकजुट करने के लिए राजकुमार अग्रवाल ने अग्रवाल सेवा समिति को मजबूती प्रदान की। अग्रवाल सेवा समिति के पदाधिकारियों के मुताबिक उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। उनके द्वारा ही अग्रवाल सेवा समिति का अपना भवन बनाने के लिए जमीन खरीदी गई। अग्रवाल सेवा समिति के पूर्व अध्यक्ष पंकज अग्रवाल ने कहा कि उनके सपनों को पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा।

अटल-आडवाणी के करीबी रहे
विधायक संजीव अग्रवाल ने बताया कि राजकुमार अग्रवाल, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे दिग्गज नेताओं के करीबी रहे। भाजपा की राजनीति में सक्रिय युवाओं को प्रेरणा देते रहे। जब शहर में भाजपा के केंद्रीय नेता आते थे, उनके कार्यक्रम को सफल बनाने की जिम्मेदारी राजकुमार अग्रवाल पर होती थी।
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भुला नहीं सकते उनका सामाजिक योगदान
हमारे बुजुर्ग थे। हर स्थिति में पार्टी का साथ दिया। उनका स्नेह हमें मिला। सुखद यादें मेरे पास हैं। मैं उनके सामाजिक योगदान को कभी भुला नहीं पाऊंगा। - संतोष गंगवार, राज्यपाल झारखंड
मेरे पिता के वह करीबी थे। करीब 15 साल पहले उन्होंने कह दिया था कि एक दिन मैं विधायक बनूंगा। बाद में ऐसा हुआ भी। वह हमेशा याद आते रहेंगे। - संजीव अग्रवाल, विधायक, कैंट
वह अपने समय के सख्त नगर प्रमुख थे। जनता के काम के लिए अधिकारियों को डांटना-फटकारना आम बात थी। मैं उन्हें नमन करता हूं। - डॉ. आईएस तोमर, पूर्व महापौर

मात्र 14 पार्षदों के समर्थन से 1989 से 1994 तक नगर निगम को चलाना उनके राजनीतिक कौशल की मिसाल है। वे समाज के गौरव थे। - राजेश अग्रवाल, पार्षद

वह नेता होने के साथ मेरे अभिभावक थे और जब-जब मेरी बात हुई, उन्होंने हमेशा शिक्षा क्षेत्र में मूल्यों की वकालत की। - केबी त्रिपाठी, प्रदेश प्रवक्ता, कांग्रेस
सीता रसोई का उद्घाटन राजकुमार अग्रवाल ने किया था। मैंने उनके साथ काम किया और उनका सहयोग हम सबके लिए यादगार है। -रमेश चंद्र अग्रवाल, सीता रसोई के पदाधिकारी

वर्ष 1988 में जब भाजपा के पास बहुमत नहीं था, तब वह भाजपा के महानगर अध्यक्ष रहे। हमेशा कार्यकर्ताओं का सम्मान बढ़ाया। -अरुण कश्यप, महानगर उपाध्यक्ष
हमारे अग्रवाल समाज को संगठित किया। परिचय सम्मेलन करके गरीब कन्याओं के विवाह कराए। वह प्रेरक व्यक्ति थे। -उमेश कुमार अग्रवाल, अग्रवाल सेवा समिति
कई संगठनों ने व्यक्त की संवेदना

शहर के कई गण्यमान्य नागरिकों और नेताओं और ने उनके निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की है। नॉर्थ इंडिया फूड ग्रेन एसोसिएशन के अध्यक्ष राजकुमार खंडेलवाल ने कहा कि राजकुमार अग्रवाल ने बरेली के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया था। उद्यमी दिनेश गोयल, बीएल एग्रो के चेयरमैन घनश्याम खंडेलवाल, बांके बिहारी के सीएमडी पंकज अग्रवाल ने उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। सपा के महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी के साथ पंडित दीपक शर्मा, उपाध्यक्ष राजेश मौर्या आदि ने भी श्रद्धांजलि दी। शिक्षा क्षेत्र में उनके योगदान को याद करते हुए गुरुकुल में श्रद्धांजलि दी गई। अध्यक्ष प्रेमशंकर अग्रवाल समेत तमाम पदाधिकारी और विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्य मौजूद रहे।

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टिकट मिला था राजकुमार अग्रवाल को, पर लड़े थे दिनेश जौहरी
वर्ष 1985 में भाजपा नेतृत्व ने विधानसभा चुनाव में राजकुमार अग्रवाल को टिकट दिया था। कार्यकर्ताओं को इसकी जानकारी हुई तो वह कहने लगे कि डॉ. दिनेश जौहरी को लड़ाया जाए। पार्टी नेतृत्व ने फीडबैक लिया और राजकुमार अग्रवाल से फोन कॉल पर बात की। इस पर राजकुमार अग्रवाल ने कह दिया था कि उनके स्थान पर दिनेश जौहरी को लड़ा दिया जाए। मेरे पिता इसके बाद से ही राजकुमार अग्रवाल का राजनीतिक कर्ज कभी नहीं भूले। मेरे पिता को विधानसभा तक पहुंचाने में राजकुमार अग्रवाल का अहम योगदान रहा। हम उनके राजनीतिक बड़प्पन को कभी भूल नहीं सकते। - राहुल जौहरी, (डॉ. दिनेश जौहरी के बेटे और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के पूर्व सीईओ)
अमर उजाला ब्यूरो
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