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Bareilly News: स्ट्रेस-एंग्जाइटी व डिप्रेशन को लेकर किया जागरूक
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सीएचसी पर विश्व मानसिक दिवस मनाया गया।
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सीएचसी पर विश्व मानसिक दिवस मनाया गया
फरीदपुर। सीएचसी पर विश्व मानसिक दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुराग गौतम ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं दुनियाभर में तेजी से बढ़ती जा रही हैं। सभी उम्र के लोगों को इसका शिकार पाया जा रहा है। स्ट्रेस-एंग्जाइटी से लेकर डिप्रेशन जैसी मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाली हो सकती हैं। डॉ. तरुण शर्मा ने बताया कि मन और शरीर को अक्सर अलग-अलग माना जाता है। मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य वास्तव में एक-दूसरे से बहुत करीब से जुड़े हुए हैं। अच्छा मानसिक स्वास्थ्य आपके शारीरिक स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए जरूरी है। स्ट्रेस-डिप्रेशन जैसी समस्याओं का यदि समय पर निदान या इलाज न हो पाए तो इसके कारण कई तरह की बीमारियां होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
सकारात्मक रहने से होगा लाभ
डॉ. रजनीकांत ने बताया कि एक अध्ययन में पाया गया है कि सकारात्मक मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य दिल के दौरे और स्ट्रोक के जोखिम को कम कर सकता है। वहीं जिन लोगों को स्ट्रेस-एंग्जाइटी या अन्य किसी प्रकार की दिक्कत होती है, उनमें न्यूरोलॉजिकल बीमारियों सहित अस्थमा, हृदय रोगों को जोखिम बढ़ सकता है। इस मौके पर डॉ. शशांक, कार्यक्रम प्रबंधक अनुराग शर्मा, सुमित मिश्रा, जितेंद्र मीणा, अनुपम कुमार, आकाश भटनागर, आशुतोष कुमार आदि रहे। संवाद
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फरीदपुर। सीएचसी पर विश्व मानसिक दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुराग गौतम ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं दुनियाभर में तेजी से बढ़ती जा रही हैं। सभी उम्र के लोगों को इसका शिकार पाया जा रहा है। स्ट्रेस-एंग्जाइटी से लेकर डिप्रेशन जैसी मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाली हो सकती हैं। डॉ. तरुण शर्मा ने बताया कि मन और शरीर को अक्सर अलग-अलग माना जाता है। मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य वास्तव में एक-दूसरे से बहुत करीब से जुड़े हुए हैं। अच्छा मानसिक स्वास्थ्य आपके शारीरिक स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए जरूरी है। स्ट्रेस-डिप्रेशन जैसी समस्याओं का यदि समय पर निदान या इलाज न हो पाए तो इसके कारण कई तरह की बीमारियां होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
सकारात्मक रहने से होगा लाभ
डॉ. रजनीकांत ने बताया कि एक अध्ययन में पाया गया है कि सकारात्मक मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य दिल के दौरे और स्ट्रोक के जोखिम को कम कर सकता है। वहीं जिन लोगों को स्ट्रेस-एंग्जाइटी या अन्य किसी प्रकार की दिक्कत होती है, उनमें न्यूरोलॉजिकल बीमारियों सहित अस्थमा, हृदय रोगों को जोखिम बढ़ सकता है। इस मौके पर डॉ. शशांक, कार्यक्रम प्रबंधक अनुराग शर्मा, सुमित मिश्रा, जितेंद्र मीणा, अनुपम कुमार, आकाश भटनागर, आशुतोष कुमार आदि रहे। संवाद
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