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अब कागजों पर नहीं चलेंगे मदरसे
बरेली।
Updated Fri, 15 Sep 2017 02:36 AM IST
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कागजों पर चलने वाले मदरसे अब वजीफा नहीं हड़प सकेंगे। सरकार की सख्ती के बाद मदरसा पोर्टल पर सभी मदरसों को तेजी से ऑनलाइन किया जा रहा है। सभी मदरसों का रिकार्ड ऑनलाइन करने के बाद कुछ नई सुविधाएं दी जाएंगी। सरकार मदरसों के लिए एक नई योजना ‘ट्रिपल टी’ यानी टीचर, टिफिन और टॉयलेट लाने की तैयारी कर रही है। पहले चरण में मदरसों में टॉयलेट बनवाए जाएंगे। जूनियर हाईस्कूलों की तर्ज पर मिड-डे मील की व्यवस्था भी लागू होगी। दीनी तालीम के अलावा दुनियावी तालीम के लिए कम से कम तीन विषयों के टीचर की व्यवस्था की जाएगी।
प्रदेश के मदरसों का रिकार्ड 15 सितंबर तक ऑनलाइन होना है। बीएसए ऑफिस से यूजर आईडी और पासवर्ड जारी होने हैं। इसके बाद मदरसों को यूनिक कोड जारी करने के बाद उनके रिकार्ड की ऑनलाइन फीडिंग होनी है। बरेली में 351 मदरसे मान्यता प्राप्त है। मंगलवार तक इनमें से 200 मदरसों की ऑनलाइन फीडिंग हो चुकी है। बाकी मदरसों की फीडिंग का काम चल रहा है। मदरसों की कमेटी के सभी सदस्यों और पदाधिकारियों का नाम-पता फीड करने के लिए उनके आधार कार्ड लिए जा रहे हैं। प्रदेश के 150 मदरसों को सरकार ने हिंदी, अंग्रेजी और साइंस विषयों के टीचर मुहैया करा रखे हैं। इन पर सरकार हर महीने मोटी रकम खर्च कर रही है लेकिन हकीकत यह है कि मदरसों में टीचर की नियुक्ति के नाम पर भी खेल हुआ है। मदरसों को ऑनलाइन करने के पीछे सरकार के कई मकसद हैं। कोई फर्जी तरीके से टीचर की नियुक्ति नहीं कर पाएगा। कोई मदरसा फर्जी नहीं चला पाएगा। नई व्यवस्था में सारे मदरसे शासन और प्रशासन की पकड़ में रहेंगे। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी जगमोहन सिंह ने बताया कि आठवीं कक्षा तक के मदरसों में टीचर, टिफिन और टॉयलेट योजना पर काम होना है। इसके लिए सरकार ने खाका तैयार कर लिया है।
प्रदेश के मदरसों का रिकार्ड 15 सितंबर तक ऑनलाइन होना है। बीएसए ऑफिस से यूजर आईडी और पासवर्ड जारी होने हैं। इसके बाद मदरसों को यूनिक कोड जारी करने के बाद उनके रिकार्ड की ऑनलाइन फीडिंग होनी है। बरेली में 351 मदरसे मान्यता प्राप्त है। मंगलवार तक इनमें से 200 मदरसों की ऑनलाइन फीडिंग हो चुकी है। बाकी मदरसों की फीडिंग का काम चल रहा है। मदरसों की कमेटी के सभी सदस्यों और पदाधिकारियों का नाम-पता फीड करने के लिए उनके आधार कार्ड लिए जा रहे हैं। प्रदेश के 150 मदरसों को सरकार ने हिंदी, अंग्रेजी और साइंस विषयों के टीचर मुहैया करा रखे हैं। इन पर सरकार हर महीने मोटी रकम खर्च कर रही है लेकिन हकीकत यह है कि मदरसों में टीचर की नियुक्ति के नाम पर भी खेल हुआ है। मदरसों को ऑनलाइन करने के पीछे सरकार के कई मकसद हैं। कोई फर्जी तरीके से टीचर की नियुक्ति नहीं कर पाएगा। कोई मदरसा फर्जी नहीं चला पाएगा। नई व्यवस्था में सारे मदरसे शासन और प्रशासन की पकड़ में रहेंगे। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी जगमोहन सिंह ने बताया कि आठवीं कक्षा तक के मदरसों में टीचर, टिफिन और टॉयलेट योजना पर काम होना है। इसके लिए सरकार ने खाका तैयार कर लिया है।
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