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कम नहीं हुए मौरंग बजरी के रेट, प्रोजेक्ट लटके

Mon, 01 May 2017 01:15 AM IST
बरेली।
बरेली। Updated Mon, 01 May 2017 01:15 AM IST
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Low rate of mortgage gravel, project hangs
कम नहीं हुए मौरंग बजरी के रेट, प्रोजेक्ट लटके - फोटो : कम नहीं हुए मौरंग बजरी के रेट, प्रोजेक्ट लटके
उत्तर प्रदेश में ओवरलोडिंग और उत्तराखंड में अवैध खनन पर रोक के चलते डेढ़ माह पहले मौरंग, बजरी और रेता के दो से तीन गुने तक पहुंचे रेट अभी भी कम नहीं हुए हैं। इससे सरकारी और गैर सरकारी प्रोजेक्ट के काम प्रभावित हो रहे हैं। अगर यही हाल रहा तो योगी सरकार के 15 जून तक प्रत्येक सड़क को गड्ढामुक्त करने के फरमान पर असर पड़ सकता है। 
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यूपी में सड़क, नाली, भवन के अलावा अन्य निर्माण कार्यों में प्रयुक्त होने वाला रेता, बजरी और मौरंग की सप्लाई उत्तराखंड के हल्द्वानी और बाजपुर केसर से होती है। क्रेेसर मालिक ये निर्माण सामग्री गोला और कोसी नदियों से लाकर यूपी के कारोबारियों को बेचते हैं। डेढ़ माह पहले तक मौरंग, बजरी और रेता के थोक रेट 35 से 40 रुपये प्रति क्विंटल थे। प्रति क्विंटल इतना ही ट्रक का भाड़ा लगता था। बरेली और आस-पास जिलों में 80 से 90 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मौरंग बजरी रेता बिक रही थी। उत्तराखंड हाईकोर्ट की ओर से कोसी और गोला नदियों में खनन पर रोक के बाद क्रेसर पर मौरंग, बजरी रेता का आना बंद हो गया। सुप्रीम कोर्ट के स्टे पर दोनों नदियों से वैध खनन तो होने लगा है लेकिन क्रेसर पर ये बहुत सीमित मात्रा में पहुंच रहा है। क्रेसरों से ट्रक मालिकों को 30 से 40 रुपये प्रति क्विंटल थोक रेट में मिलने वाला रेता, मौरंग बजरी 80 से 90 रुपये में मिल रहा है। 
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उधर, यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक महीने से ओवरलोडिंग पर रोक रखी है। ट्रक मालिक जितने भाड़े में एक बार में 450 क्विंटल माल लाते थे, उतना ही भाड़ा खर्च करने पर ट्रक में अंडरलोडिंग कर बमुश्किल 150 क्विंटल माल आ पा रहा है। इसके चलते किराया दर भी दो से तीन गुनी तक बढ़ चुकी है। अब थोक रेट में मौरंग, रेता बजरी 140 से 150 रुपये प्रति क्विंटल तक में बिक रही है। फुटकर में ये रेट 20 से 25 रुपये और ज्यादा हैं। रेता बजरी ट्रांसपोर्ट यूनियन अध्यक्ष रामकृष्ण शुक्ला का कहना है कि डेढ़ महीने में रेट कम नहीं हुए। इससे रेता बजरी मौरंग की सप्लाई 80 फीसदी तक कम हो चुकी है। ओवरलोडिंग बंद करना ठीक है लेकिन ट्रकों में अंडरलोडिंग की क्षमता बढे़े ताकि निर्माण सामग्री पर महंगाई कम हो। 
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 ऐसे तो गड्ढामुक्त होने से रहीं सड़कें 
सीएम योगी आदित्यनाथ ने पीडब्ल्यूडी को 15 जून तक प्रत्येक सड़क को गड्ढामुक्त करने का फरमान सुनाया है। पीडब्ल्यूडी ने 1128 किलोमीटर लंबाई में 102 करोड़ की लागत से सड़कों को गड्ढामुक्त करने का एस्टीमेट शासन को बनाकर भेजा है। इसके लिए अल्पकालीन आनलाइन टेंडर भी माने जा चुके हैं। मौरंग बजरी और रेता के रेट बढ़ने से अधिकांश सड़कों के टेंडर ठेकेदारों ने डाले नहीं। कुछ ऐसे मार्ग हैं जिन पर एक या दो टेंडर आए। नियमानुसार एक काम को स्वीकृत करने के लिए कम से कम तीन टेंडर आने जरूरी है। पीडब्ल्यूडी जेई संघ के मंडल अध्यक्ष जीएन सिंह परमार के अनुसार पीडब्ल्यूडी ने पुराने रेट में 10 से 12 प्रतिशत तक रिवाइज भी किए हैं लेकिन निर्माण सामग्री महंगी होने से टेंडर 50 फीसदी तक अधिक रेट में डाले गए हैं जो स्वीकृत करना संभव नहीं। अगर टेंडर दोबारा मांगे गए तो 45 दिन से भी कम समय में सड़कें रिपेयर होना मुश्किल हैं। पीडब्ल्यूडी विभाग बहुत दबाव में है। समझ में नहीं आ रहा कि सरकार की प्राथमिकता के काम कैसे पूरे करें। 

इन प्रोजेक्ट पर पड़ा असर
1- शहामतगंज, आईवीआरआई और चौबारी फ्लाईओवर निर्माण
2- नेशनल हाइवे से निर्मित बरेली-सीतापुर फोरलेन मार्ग  
3- पीडब्ल्यूडी की 1128 किलोमीटर सड़कों को गड्ढामुक्त करना
4- नगर निगम में 33 करोड़ के सीसी मार्ग और नाली निर्माण के काम
5- बीडीए की रामगंगा नगर और ट्रांसपोर्ट नगर योजना के काम  
सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। अल्पकालीन टेंडर मांगे जा चुके हैं। मौरंग बजरी महंगी होने से कुछ के रेट रिवाइज भी किए गए हैं। तय समय में सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए हर संभव उपाय किए जाएंगे। संजीव भारद्वाज, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड 
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