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मुल्क की संपत्ति और धरोहर से करें मोहब्बत : मौलाना मुख्तार
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मुफ्ती-ए आजम हिंद के कुल में देर रात उमड़ा जायरीन का हुजूम, अदा की गई कुल की रस्म
बरेली। उर्स-ए-रजवी के दूसरे दिन इस्लामिया इंटर काॅलेज मैदान पर जलसे का आयोजन किया गया। इसमें सुबह हजरत रेहान-ए-मिल्लत व हजरत मुफस्सिर-ए-आजम और देर रात मुफ्ती आजम हिंद के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई।
इस मौके पर शुक्रवार सुबह जलसे में मौलाना मुख्तार बहेड़वी ने कहा कि मजहब-ए-इस्लाम अपने मानने वालों को यह तालीम देता कि जिस मुल्क में रहो उस मुल्क में अपनी मजहबी पहचान कायम रखते हुए अच्छे शहरी बने। मुल्क और मुल्क की संपत्ति और धरोहर से मोहब्बत करें। नफरतों को हराने के लिए मुहब्बत को आम करे। आपसी सौहार्द का वातावरण बनाएं।
मधुबनी बिहार के मौलाना साबिर कादरी ने अपनी तकरीर में कहा कि रेहान-ए-मिल्लत ने पूरी दुनिया में मजहब व मसलक का प्रचार प्रसार किया। आज इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान में जो उर्स हो रहा है ये भी हजरत रेहान-ए-मिल्लत ही की देन है। उन्होंने कहा कि दुनिया में कहीं भी रहो मसलक-ए-आला हजरत पर सख्ती से कायम रहो।
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कारी अब्दुर्रहमान कादरी ने आला हजरत, मुफ्ती आजम हिंद और खानकाह रजविया का पैगाम जायरीन को देते हुए कहा कि गुस्ताख-ए-रसूल से हमेशा परवेज करें। हमारा उनसे कल भी न कोई रिश्ता था और न आज है। यही सुन्नियत और यही मसलक-ए-आला हजरत है। नमाजी बने और इल्म हासिल करें। अपने बच्चों को आशिक-ए-रसूल बनाएं।
मदरसा मंजर-ए-इस्लाम के अध्यापक मास्टर कमाल ने अपनी तकरीर अंग्रेजी में करते हुए कहा कि आज मदरसे के छात्र हर क्षेत्र में अपने इल्म का लोहा मनवा रहे है। मदरसे के छात्र मुफ्ती, कारी, आलिम के साथ डॉक्टर और इंजीनियर भी बन रहे है। मुफ्ती सलीम नूरी, मौलाना वारिस रजा सुल्तानपुरी, कारी महबूब रजा व अर्सलान रजा ने नात-ओ-मनकबत का नजराना पेश किया। संचालन कारी यूसुफ रजा संभली ने किया।
हजरत रेहान-ए-मिल्लत के कुल शरीफ में कारी सखावत हुसैन, मुफ्ती जईम रजा ने सुबह 9:58 बजे कुल की फातिहा पढ़ी। वहीं रात जलसे देर रात 1:40 बजे मुफ्ती-ए-आजम हिंद के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। मुफ्ती जमील ने आला हज़रत का शजरा फातिहा मुफ्ती अय्यूब नूरी ने पढ़ा। खुसूसी दुआ सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां व मुफ्ती आकिल रजवी ने की। जायरीन दरगाह प्रमुख हजरत सुब्हानी मियां और सज्जादानशीन मुफ्ती मियां से मुलाकात कर दुआएं हासिल की। संवाद
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बरेली। उर्स-ए-रजवी के दूसरे दिन इस्लामिया इंटर काॅलेज मैदान पर जलसे का आयोजन किया गया। इसमें सुबह हजरत रेहान-ए-मिल्लत व हजरत मुफस्सिर-ए-आजम और देर रात मुफ्ती आजम हिंद के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई।
इस मौके पर शुक्रवार सुबह जलसे में मौलाना मुख्तार बहेड़वी ने कहा कि मजहब-ए-इस्लाम अपने मानने वालों को यह तालीम देता कि जिस मुल्क में रहो उस मुल्क में अपनी मजहबी पहचान कायम रखते हुए अच्छे शहरी बने। मुल्क और मुल्क की संपत्ति और धरोहर से मोहब्बत करें। नफरतों को हराने के लिए मुहब्बत को आम करे। आपसी सौहार्द का वातावरण बनाएं।
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मधुबनी बिहार के मौलाना साबिर कादरी ने अपनी तकरीर में कहा कि रेहान-ए-मिल्लत ने पूरी दुनिया में मजहब व मसलक का प्रचार प्रसार किया। आज इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान में जो उर्स हो रहा है ये भी हजरत रेहान-ए-मिल्लत ही की देन है। उन्होंने कहा कि दुनिया में कहीं भी रहो मसलक-ए-आला हजरत पर सख्ती से कायम रहो।
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कारी अब्दुर्रहमान कादरी ने आला हजरत, मुफ्ती आजम हिंद और खानकाह रजविया का पैगाम जायरीन को देते हुए कहा कि गुस्ताख-ए-रसूल से हमेशा परवेज करें। हमारा उनसे कल भी न कोई रिश्ता था और न आज है। यही सुन्नियत और यही मसलक-ए-आला हजरत है। नमाजी बने और इल्म हासिल करें। अपने बच्चों को आशिक-ए-रसूल बनाएं।
मदरसा मंजर-ए-इस्लाम के अध्यापक मास्टर कमाल ने अपनी तकरीर अंग्रेजी में करते हुए कहा कि आज मदरसे के छात्र हर क्षेत्र में अपने इल्म का लोहा मनवा रहे है। मदरसे के छात्र मुफ्ती, कारी, आलिम के साथ डॉक्टर और इंजीनियर भी बन रहे है। मुफ्ती सलीम नूरी, मौलाना वारिस रजा सुल्तानपुरी, कारी महबूब रजा व अर्सलान रजा ने नात-ओ-मनकबत का नजराना पेश किया। संचालन कारी यूसुफ रजा संभली ने किया।
हजरत रेहान-ए-मिल्लत के कुल शरीफ में कारी सखावत हुसैन, मुफ्ती जईम रजा ने सुबह 9:58 बजे कुल की फातिहा पढ़ी। वहीं रात जलसे देर रात 1:40 बजे मुफ्ती-ए-आजम हिंद के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। मुफ्ती जमील ने आला हज़रत का शजरा फातिहा मुफ्ती अय्यूब नूरी ने पढ़ा। खुसूसी दुआ सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां व मुफ्ती आकिल रजवी ने की। जायरीन दरगाह प्रमुख हजरत सुब्हानी मियां और सज्जादानशीन मुफ्ती मियां से मुलाकात कर दुआएं हासिल की। संवाद