लोकसभा चुनाव 2024: शाहजहांपुर में भाजपा के सामने हैट्रिक लगाने की चुनौती, तीन मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर
शाहजहांपुर लोकसभा और ददरौल विधानसभा सीट पर सोमवार को मतदान हुआ। दोनों सीटों पर भाजपा के सामने जीत का सिलसिला बरकरार रखने की चुनौती है तो तीन मंत्रियों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। वहीं सपा ने यहां की सियासी जमीन पर वापसी करने के लिए दांव लगाया है।
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शाहजहांपुर में पिछले दो लोकसभा और ददरौल विधानसभा सीट के चुनाव में जीत दर्ज कर चुकी भाजपा के सामने सिलसिला जारी रखते हुए हैट्रिक लगाने की चुनौती है। ददरौल में भाजपा प्रत्याशी अरविंद सिंह पर पिता मानवेंद्र सिंह की विरासत को आगे बढ़ाने का जिम्मा है। वहीं सपा अपनी खोई जमीन वापस चाहती है। ददरौल में सपा प्रत्याशी अवधेश वर्मा दो विधानसभा चुनाव हारने के बाद अपने सियासी वजूद को बचाने के लिए जूझ रहे हैं।
वर्ष 2017 के बाद से शाहजहांपुर की राजनीति में भाजपा मजबूत होती चली गई, जबकि सपा की सियासी जमीन दरकती गई। 2012 में सपा के पास सांसद के अलावा तीन विधायक थे। 2017 में पार्टी के पास केवल एक विधायक रह गया। 2022 तक पार्टी के पास एक भी विधायक नहीं बचा। जिला पंचायत अध्यक्ष, एमएलसी का चुनाव भी पार्टी हार गई। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा प्रत्याशियों को हार का मुंह देखना पड़ा। इस लोकसभा चुनाव में सपा के सामने अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की चुनौती है। सपा प्रत्याशी ज्योत्सना गौंड अपनी पारी शुरू कर रहीं हैं।
जिले में भाजपा के छह विधायक
वहीं 2017 के बाद से भाजपा ने लगभग सभी चुनाव में जीत हासिल की है। सभी छह विधानसभा सीटों पर भाजपा के विधायक हैं। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाली भाजपा हैट्रिक लगाने का दावा कर रही है। अरुण सागर भाजपा से दूसरी बार मैदान में हैं। वहीं पांच जनवरी को भाजपा विधायक मानवेंद्र सिंह के निधन के बाद ददरौल में हो रहे उपचुनाव की स्थिति भी कम रोचक नहीं है। भाजपा ने मानवेंद्र सिंह के बेटे अरविंद पर भरोसा जताते हुए चुनावी मैदान में उतारा है।
पिता के राजनीतिक और सामाजिक कार्यों में हाथ बंटाने वाले अरविंद का यह पहला चुनाव है। हालांकि, वह पूर्व में छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके सामने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती है।
वहीं, सपा प्रत्याशी अवधेश वर्मा अपना सियासी अस्तित्व बचाने के लिए पूरी ताकत से चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीतिक रूप से अनुभवी अवधेश वर्मा दो बार विधायक और एक बार बसपा सरकार में राज्यमंत्री रह चुके हैं। बसपा से भाजपा होते हुए वह सपा में शामिल हुए हैं। अब उनके सामने यह चुनाव अपनी खोई राजनीतिक जमीन फिर से हासिल करने का अवसर है।
राजनीतिक दिग्गजों की प्रतिष्ठा भी फंसी दांव पर
जिले में दो कद्दावर कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना और जितिन प्रसाद हैं। सहकारिता राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार जेपीएस राठौर भी मजबूत पकड़ रखते हैं। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना भाजपा प्रत्याशी अरुण सागर के पक्ष में प्रचार के दौरान पूरा जोर लगाए रहे। ऐसे में मंत्रियों की प्रतिष्ठा भी शाहजहांपुर की सीट में फंसी हुई है। वहीं सपा प्रत्याशी ज्योत्सना गौंड के मामा और सपा पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष राजपाल कश्यप राजनीति के बड़े खिलाड़ी माने जाते हैं। अपनी भांजी के लिए राजपाल रणनीतिकार की भूमिका भी निभा रहे हैं।
कैडर वोट के सहारे चौंकाने की कोशिश में बसपा
लोकसभा सीट से बसपा ने पूर्व प्रधानाचार्य दोदराम वर्मा को प्रत्याशी बनाया है। उनका यह पहला चुनाव है। कैडर वोट के भरोसे बसपा अप्रत्याशियत परिणाम हासिल करने का दम भर रही है। वहीं ददरौल विस उपचुनाव में सर्वेश चंद्र मिश्रा धांधू प्रत्याशी हैं। वह 2022 में नगर विधानसभा सीट से मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के सामने चुनाव लड़ चुके हैं। ब्राह्मण और कैडर वोट के सहारे सर्वेश मिश्रा चुनौती पेश कर रहे हैं।