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लॉकडाउन ने फिर धोया प्रदूषण का दाग
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तीन सौ तक पहुंचा एक्यूआई महीने भर के आंशिक लॉकडाउन में 110 पर आया
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बरेली। दिवाली के बाद प्रदूषण की मार झेल रहे शहर को लॉकडाउन में फिर काफी राहत मिली है। करीब तीन सौ तक पहुंचा एक्यूआई महीने भर के आंशिक लॉकडाउन के दौरान अब 110 पर आ गया है। इस वजह से प्रदेश के सर्वाधिक प्रदूषित 10 शहरों की सूची से बरेली बाहर हो गया है।
पिछले साल कोरोना महामारी से बचाव के लिए किए गए करीब तीन माह के लॉकडाउन में नदी, हवा और आकाश तीनों ही प्रदूषण मुक्त हो गए थे। अनलॉक शुरू होते ही स्थिति फिर बदलने लगी, लेकिन एक्यूआई फिर भी दो सौ के आसपास ही टिका रहा। इसके बाद दिवाली पर आतिशबाजी और खेतों में पराली जलने से प्रदूषण का स्तर तीन सौ तक पहुंच गया। आनन-फानन में वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए हॉट स्पॉट इलाकों की सूची जारी की गई। आतिशबाजी पर रोकथाम के लिए भी आदेश हुए लेकिन उसका कोई खास असर नहीं दिखा। दिवाली के अगले दिन एक्यूआई चार सौ तक पहुंच गया पर गनीमत रही कि दिवाली के बाद बारिश हो गई। इससे प्रदूषण धुल गया, लेकिन यह स्थिति ज्यादा दिन तक नहीं रही। फिर प्रदूषण का स्तर बढ़ना शुरू हुआ। जो तीन सौ के करीब पहुंच गया। कमोवेश मार्च तक यही स्थिति रही। अप्रैल में संक्रमण बढ़ा और आंशिक लॉकडाउन शुरू हुआ। माह भर से चल रहे लॉकडाउन के असर से फिर बरेली स्वच्छ शहरों की सूची में दर्ज हो गया है।
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पिछले साल कोरोना महामारी से बचाव के लिए किए गए करीब तीन माह के लॉकडाउन में नदी, हवा और आकाश तीनों ही प्रदूषण मुक्त हो गए थे। अनलॉक शुरू होते ही स्थिति फिर बदलने लगी, लेकिन एक्यूआई फिर भी दो सौ के आसपास ही टिका रहा। इसके बाद दिवाली पर आतिशबाजी और खेतों में पराली जलने से प्रदूषण का स्तर तीन सौ तक पहुंच गया। आनन-फानन में वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए हॉट स्पॉट इलाकों की सूची जारी की गई। आतिशबाजी पर रोकथाम के लिए भी आदेश हुए लेकिन उसका कोई खास असर नहीं दिखा। दिवाली के अगले दिन एक्यूआई चार सौ तक पहुंच गया पर गनीमत रही कि दिवाली के बाद बारिश हो गई। इससे प्रदूषण धुल गया, लेकिन यह स्थिति ज्यादा दिन तक नहीं रही। फिर प्रदूषण का स्तर बढ़ना शुरू हुआ। जो तीन सौ के करीब पहुंच गया। कमोवेश मार्च तक यही स्थिति रही। अप्रैल में संक्रमण बढ़ा और आंशिक लॉकडाउन शुरू हुआ। माह भर से चल रहे लॉकडाउन के असर से फिर बरेली स्वच्छ शहरों की सूची में दर्ज हो गया है।
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आंशिक लॉकडाउन : धीमी गति से कम हुआ प्रदूषण
बरेली कॉलेज के बॉटनी विभाग के एमिरेट प्रोफेसर डॉ. डीके सक्सेना के मुताबिक आंशिक लॉकडाउन होने से पिछले साल की तरह तेजी से प्रदूषण कम नहीं हुआ क्योंकि बाजार बंद हुए मगर भीड़ कम नहीं हुई। फैक्टरियों और कार्यालयों में 50 फीसदी कर्मचारी पहुंचते रहे। निर्माण कार्य भी नहीं रुके। आंशिक लॉकडाउन में 60 फीसदी तक दमघोटू धुएं से प्रदूषण फैला रहे वाहन कम हुए। इससे पर्यावरण साफ होने में माह भर का वक्त लगा।
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शहर को प्रदूषण मुक्त बनाने में करें सहयोग
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के बॉटनी विभाग के डॉ. आलोक श्रीवास्तव के मुताबिक शहर को प्रदूषण मुक्त बनाने में सिस्टम के भरोसे रहने के बजाय लोगों को ही पहल करनी होगी। आंशिक लॉकडाउन से कम हआ प्रदूषण फिर खतरनाक स्तर तक न पहुंचे इसके लिए लोगों को बेवजह वाहन चलाने से बचना होगा। भवन की निर्माण सामग्री को ढंककर रखें, कचरे का समुचित निस्तारण करें। छोटी सी पहल का भी काफी सकारात्मक प्रभाव होगा।तीसरी लहर का प्रकोप कम कर सकता है स्वच्छ पर्यावरण
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. रवीश अग्रवाल ने प्रदूषण के कम हुए स्तर के आगे भी बने रहने पर कोरोना संक्रमण की संभावित तीसरी लहर से भी काफी हद तक बचाव की उम्मीद जताई है। कहा, शुद्ध वातावरण से इम्युनिटी बढ़ेगी। जो रोगों से लड़ने में सक्षम होगी। हवा में प्रदूषण कम होने से संक्रमण का दायरा भी कम होगा। शुद्ध वातावरण शरीर के साथ ही मानसिक तौर पर भी व्यक्ति को मजबूत बनाता है। यह सब कोरोना को मात देने के लिए जरूरी हैं।पिछले सात दिनों का एक्यूआई
- तिथि एक्यूआई
- 25 मई 110
- 24 मई 119
- 23 मई 114
- 22 मई 127
- 21 मई 124
- 20 मई 122
- 19 मई 131
पिछले साल की तरह इस बार भी लॉकडाउन का पर्यावरण पर अच्छा प्रभाव दिखाई दिया है। प्रदूषण का स्तर तेजी से कम हुआ है। नॉन अमेंडमेंट शहरों की सूची से अब बरेली बाहर हो गया है। निर्माणदायी संस्थाओं को प्रदूषण की रोकथाम के लिए कहा गया है। लोगों से भी अपील है कि प्रदूषण नियंत्रण में सहयोग करें। - रोहित सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड