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लॉक डाउन: चारे की कमी कहीं दूध का संकट न पैदा कर दे
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दूध बांटने के लिए निकले दूधिये।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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बरेली। कोरोना संक्रमण से सुरक्षा के लिए जिले में लॉकडाउन है। लोगों को जरूरत का सामान उपलब्ध हो जाए, इसके लिए प्रशासन ने सब्जी, दूध, फल और किराना के जरूरी सामान की दुकानें निर्धारित समयसीमा के भीतर खोलने के निर्देश भी दिए हैं मगर पशुओं को चारा मुहैया नहीं हो पा रहा है। पुलिस शहर से सटे गांवों से आने वाले दूधियों को शहर में घुसने नहीं दे रही है। इससे शहर में दूध की आपूर्ति कम हो रही है।
महानगर दुग्ध संघ के जिलाध्यक्ष लल्लू सिंह यादव के मुताबिक शहर में प्रतिदिन तकरीब 1.3 लाख लीटर दूध की खपत होती है। शहर की डेयरियों समेत गांवों के दूधियों के चलते करीब 80 हजार लीटर दूध की आपूर्ति होती है। इसके अलावा पराग, अमूल, नमस्ते, मदर डेयरी जैसे पैकेट बंद दूध से 30 हजार लीटर दूध लोगों के घरों तक पहुंचता है। मुनाफाखोर दूध की कमी को देखते हुए करीब 20 हजार लीटर सिंथेटिक (मिलावटी) दूध की सप्लाई करते हैं। वर्तमान परिस्थितियों में लॉकडाउन होने के चलते शहर में सिर्फ 60 हजार लीटर दूध ही उपलब्ध है। जो कि जरूरत के हिसाब से दुगुने से भी कम है।
उन्होंने बताया कि 22 मार्च को जनता कर्फ्यू और अब लॉक डाउन होने से पशुओं को पूरा चारा नहीं मिल पा रहा। हरा चारा मुहैया कराने वाली दुकानें भी बंद है। ऐसे में भूसा पर ही जानवरों क ी गुजर बसर हो रही है। आशंका जताई कि अगर लॉक डाउन की तिथि और आगे बढ़ी तो यह घरों में रखा भूसा भी खत्म हो जाएगा।
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महानगर दुग्ध संघ के जिलाध्यक्ष लल्लू सिंह यादव के मुताबिक शहर में प्रतिदिन तकरीब 1.3 लाख लीटर दूध की खपत होती है। शहर की डेयरियों समेत गांवों के दूधियों के चलते करीब 80 हजार लीटर दूध की आपूर्ति होती है। इसके अलावा पराग, अमूल, नमस्ते, मदर डेयरी जैसे पैकेट बंद दूध से 30 हजार लीटर दूध लोगों के घरों तक पहुंचता है। मुनाफाखोर दूध की कमी को देखते हुए करीब 20 हजार लीटर सिंथेटिक (मिलावटी) दूध की सप्लाई करते हैं। वर्तमान परिस्थितियों में लॉकडाउन होने के चलते शहर में सिर्फ 60 हजार लीटर दूध ही उपलब्ध है। जो कि जरूरत के हिसाब से दुगुने से भी कम है।
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उन्होंने बताया कि 22 मार्च को जनता कर्फ्यू और अब लॉक डाउन होने से पशुओं को पूरा चारा नहीं मिल पा रहा। हरा चारा मुहैया कराने वाली दुकानें भी बंद है। ऐसे में भूसा पर ही जानवरों क ी गुजर बसर हो रही है। आशंका जताई कि अगर लॉक डाउन की तिथि और आगे बढ़ी तो यह घरों में रखा भूसा भी खत्म हो जाएगा।
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