Bareilly News: जोगी नवादा के लोग बोले- बरसों का साथ, माहौल बिगाड़ने में बाहरियों का हाथ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली के जोगी नवादा में एक पक्ष चाहता है कि उसे कांवड़ यात्रा निकालने की अनुमति मिले। वहीं, दूसरा पक्ष बाहरी लोगों पर भड़काने का आरोप लगा रहा है। रविवार को हुए घटनाक्रम के बाद अमर उजाला टीम ने दोनों समुदाय के लोगों से बात की तो यह हकीकत सामने आई। कोई भी झुकने के लिए तैयार नहीं है।
दोनों ओर से यह बात गूंजी कि पहले दूसरा पक्ष हमारी परेशानी को समझे तो हम भी उनकी बात पर गौर करेंगे। जोगी नवादा का चक महमूद वाला हिस्सा हिंदू आबादी बहुल है। इसमें ज्यादातर मौर्य, शाक्य बिरादरी के लोग हैं। यहां के ज्ञानदेव शर्मा ने बताया कि एक-डेढ़ साल से बस्ती में इस तरह की बातें हो रही हैं। अन्य दिनों में सबका आना-जाना इन्हीं रास्तों से है। एक-दूसरे की दुकान से सामान लेते हैं, पर विशेष अवसरों पर तकरार बढ़ जाती है। अल्पसंख्यक समुदाय की बस्ती में 90 फीसदी घर शाह अल्वी समुदाय के लोगों के हैं।
मौर्य गली से हमेशा से निकलता रहा जुलूस
यहां मिले जुल्फिकार ने कहा कि मोहल्ले की चार मस्जिदों की चार अंजुमनों के करीब चार सौ लोगों को हमेशा की तरह मौर्य गली होकर निकाला जाना था, ये पुलिस के रिकॉर्ड में लिखा है। इसके बावजूद दूसरा पक्ष हमसे कह रहा था कि हमें कांवड़ निकालने की अनुमति दी जाए। हम कोई अधिकारी नहीं हैं जो इस तरह की अनुमति दे सकते हैं। यह पुलिस-प्रशासन का विषय है।
शराफत अली ने कहा कि दूसरे समुदाय के स्थानीय लोग हमारे भाई हैं और बरसों से हम साथ रह रहे हैं। कुछ बाहरी लोग यहां आकर माहौल बिगाड़ते हैं। पिछली बार हवाई फायरिंग करने वाले भी बाहरी लोग थे। धार्मिक कार्यक्रमों के लिए दोनों पक्ष के लोगों को एक-दूसरे का सम्मान करना होगा।
पहले ऐसा नहीं था माहौल
पप्पू मौर्य ने कहा कि कांवड़ यात्रा रोकने की वजह से हमारे पक्ष के लोगों ने अंजुमन जुलूस रोका। हम चाहते हैं कि दूसरे पक्ष के लोग अपने जुलूस में चाहें हाथी-घोड़े ले जाएं, पर हमें कांवड़ यात्रा से न रोकें। वृद्ध माया ने बताया कि हर साल विवाद बढ़ रहा है, पहले ऐसा नहीं था।