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Bareilly News: जीवन अंकों का गणित नहीं, अनुभव से सीखें
Fri, 16 Feb 2024 03:43 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Fri, 16 Feb 2024 03:43 AM IST
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बरेली। बोर्ड परीक्षा में आपको मिले अंक जीवन में खास मायने नहीं रखते। जीवन को बेहतर बनाने के लिए मायने रखती है आपकी मेहनत और लगन। लक्ष्य के प्रति एकाग्रता ही आपको सफल बनाती है। यह कहना है डीआईओएस देवकी सिंह का। बोर्ड परीक्षाओं से पहले बृहस्पतिवार को उन्होंने परीक्षार्थियों को सकारात्मक रहने का संदेश दिया।
शहर के अन्य अधिकारियों ने भी परीक्षार्थियों को हाईस्कूल, इंटरमीडिएट की परीक्षा में मिलने वाले अंकों का वास्तविक महत्व बताते हुए यह समझाने का प्रयास किया है कि अंक आपकी प्रगति में बाधा कभी नहीं बन सकते। लिहाजा अच्छे अंकों के लिए प्रयास करेंं, लेकिन अनावश्यक दबाव न लें।
बीएसए संजय सिंह ने बताया कि उन्हें हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में क्रमवार 63 व 62 फीसदी अंक मिले थे। इन अंकों का वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है। मुझसे कोई नहीं पूछता कि मुझे हाईस्कूल में या इंटरमीडिएट में कितने अंक मिले थे। सबसे बेहतर है कि अपने जीवन के लिए एक लक्ष्य तय करिए। उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मेहनत कीजिए। जीवन की वास्तविक सफलता इसी में है।
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तनाव से दूर रहें
सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने बताया कि हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा के दौरान उन्होंने समय का प्रबंधन किया था। एक घंटे पढ़ने के बाद दस मिनट टहलते थे। छह घंटे की नींद लेते थे। पाठ्यक्रम को नए सिरे से पढ़ने के बजाय सिर्फ रिवीजन करते थे। क्लास नोट्स को भी देखते थे ताकि कोई बिंदु छूटे नहीं। अच्छे अंक से ज्यादा विषय का ज्ञान जरूरी है। तनाव से जो याद है वह भी भूल जाएगा। सकारात्मक रहें।
विषय की समझ से मिलती है कामयाबी
सीडीओ जगप्रवेश ने कहा कि अंकों से किस्मत तय नहीं होती। मेरे एक दोस्त देवेंद्र 12 कक्षा में फेल हो गए थे। अब भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी हैं। ज्वाइंट कमिश्नर के पद पर तैनात हैं। जब भी परीक्षा का मौका आता है, मैं देवेंद्र का उदाहरण देना नहीं भूलता। उनकी कहानी प्रेरक है। कम अंक आने पर भी निराश और हताश होने की जरूरत नहीं है। जो भी पढ़ें, पूरे ध्यान से पढ़ें। विषय की समझ ही आपको कामयाबी के शिखर तक ले जाएगी।
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शहर के अन्य अधिकारियों ने भी परीक्षार्थियों को हाईस्कूल, इंटरमीडिएट की परीक्षा में मिलने वाले अंकों का वास्तविक महत्व बताते हुए यह समझाने का प्रयास किया है कि अंक आपकी प्रगति में बाधा कभी नहीं बन सकते। लिहाजा अच्छे अंकों के लिए प्रयास करेंं, लेकिन अनावश्यक दबाव न लें।
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बीएसए संजय सिंह ने बताया कि उन्हें हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में क्रमवार 63 व 62 फीसदी अंक मिले थे। इन अंकों का वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है। मुझसे कोई नहीं पूछता कि मुझे हाईस्कूल में या इंटरमीडिएट में कितने अंक मिले थे। सबसे बेहतर है कि अपने जीवन के लिए एक लक्ष्य तय करिए। उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मेहनत कीजिए। जीवन की वास्तविक सफलता इसी में है।
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तनाव से दूर रहें
सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने बताया कि हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा के दौरान उन्होंने समय का प्रबंधन किया था। एक घंटे पढ़ने के बाद दस मिनट टहलते थे। छह घंटे की नींद लेते थे। पाठ्यक्रम को नए सिरे से पढ़ने के बजाय सिर्फ रिवीजन करते थे। क्लास नोट्स को भी देखते थे ताकि कोई बिंदु छूटे नहीं। अच्छे अंक से ज्यादा विषय का ज्ञान जरूरी है। तनाव से जो याद है वह भी भूल जाएगा। सकारात्मक रहें।
विषय की समझ से मिलती है कामयाबी
सीडीओ जगप्रवेश ने कहा कि अंकों से किस्मत तय नहीं होती। मेरे एक दोस्त देवेंद्र 12 कक्षा में फेल हो गए थे। अब भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी हैं। ज्वाइंट कमिश्नर के पद पर तैनात हैं। जब भी परीक्षा का मौका आता है, मैं देवेंद्र का उदाहरण देना नहीं भूलता। उनकी कहानी प्रेरक है। कम अंक आने पर भी निराश और हताश होने की जरूरत नहीं है। जो भी पढ़ें, पूरे ध्यान से पढ़ें। विषय की समझ ही आपको कामयाबी के शिखर तक ले जाएगी।