{"_id":"63642df2208af4625821a451","slug":"life-imprisionment-for-murderer-bareilly-news-bly502716785","type":"story","status":"publish","title_hn":"हत्यारों के आखिरी सांस तक जेल में रहने का फैसला आया तब मनाई दिवाली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हत्यारों के आखिरी सांस तक जेल में रहने का फैसला आया तब मनाई दिवाली
विज्ञापन
बरेली। सफाई नायक राजू के हत्यारों को जिंदगी की अंतिम सांस तक जेल में रहने का फैसला आया तब परिवार ने छह साल बाद दिवाली मनाई। कोर्ट के फैसले से खुश परिजनों ने साढ़े छह साल बाद मंदिर में 108 दीये जलाए। मिठाई बांटी। राजू के भाई राजकिरन ने कहा, अब उनके भाई को न्याय मिला है।
राजू हत्याकांड की सुनवाई पूरी होने पर कोर्ट ने सोमवार को सभी छह अभियुक्तों को हत्या का दोषी करार दिया था, लेकिन सजा का फैसला सुरक्षित रख लिया था। बृहस्पतिवार को अदालत ने अभियुक्तों को सजा सुनाई और सभी को सजा बुगतने के लिए जेल भेज दिया। राजू के परिवार ने तय किया था कि वह कोर्ट का निर्णय आने के बाद ही दिवाली मनाएगा। बृहस्पतिवार को कोर्ट का फैसला आया तो परिवार वालों ने खुशियां मनाईं। भाई राजकिरन ने परिवार के साथ श्री शिव शक्ति मंदिर में 108 दीए जलाए। कहा, उनके परिवार ने छह साल बाद आज दिवाली मनाई है। कोर्ट ने भाई को न्याय देकर परिवार को दिवाली मनाने का मौका दिया है।
आंखों में भाई की कमी से आज भी नमी
मंदिर में दिवाली मनाने के दौरान राजकिरन और उनके परिवार के चेहरे पर हंसी तो थी लेकिन आंखों में नमी साफ दिखाई दे रही थी। राजकिरन ने कहा कि उनके भाई को इंसाफ जरूर मिला है, लेकिन भाई की कमी तो हमेशा खलेगी। इसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता। उनके पिता किशनलाल ने कहा कि बेटा खोने का गम हमेशा उनके सीने में रहेगा। छोटा भाई होने के नाते राजकिरन ने राजीव को न्याय दिलाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है और बिना झुके सफल हुआ है। इस बात की उन्हें खुशी है।
विज्ञापन
पापा के जाने के बाद से आज पता चला क्या होती हैं खुशियां
राजीव के परिवार में उनकी पत्नी प्रभा और दो बेटे दक्ष और मानव हैं। प्रभा पिछले दो-तीन साल से अपने मायके में हैं। दक्ष नौवीं और मानव पांचवीं कक्षा में पढ़ रहा है। दोनों चाचा राजकिरन के पास ही रहते हैं। बोले, उन्हें चाचा ने ही पिता का प्यार दिया है। चाची ने भी कभी उनके साथ भेदभाव नहीं किया। पापा के चले जाने के बाद खुशी क्या होती है, वे भूल ही गए थे। खुशियां क्या होती हैं, यह आज पता चला है।
आसान नहीं थी न्याय की जंग
राजकिरन के लिए भाई को इंसाफ दिलाने की लड़ाई लड़ना आसान नहीं थी। 2017 में कोर्ट में ट्रायल शुरू हुआ था। इसके बाद लंबे समय तक आरोपियों की ओर से समझौते के लिए डराया, धमकाया गया। एक करोड़ रुपये देने का ऑफर दिया गया, लेकिन वह न डरे और न झुके। हर धमकी के बाद उनका हौसला और मजबूत होता गया। उनकी हत्या की साजिश भी रची गई। इसका वीडियो वायरल हो गया। इस मामले में भी शिकायत दर्ज कराई गई। इस सबके बावजूद उन्होंने भाई के हत्यारों को सजा दिलाने की जंग जारी रखी।
विज्ञापन
राजू हत्याकांड की सुनवाई पूरी होने पर कोर्ट ने सोमवार को सभी छह अभियुक्तों को हत्या का दोषी करार दिया था, लेकिन सजा का फैसला सुरक्षित रख लिया था। बृहस्पतिवार को अदालत ने अभियुक्तों को सजा सुनाई और सभी को सजा बुगतने के लिए जेल भेज दिया। राजू के परिवार ने तय किया था कि वह कोर्ट का निर्णय आने के बाद ही दिवाली मनाएगा। बृहस्पतिवार को कोर्ट का फैसला आया तो परिवार वालों ने खुशियां मनाईं। भाई राजकिरन ने परिवार के साथ श्री शिव शक्ति मंदिर में 108 दीए जलाए। कहा, उनके परिवार ने छह साल बाद आज दिवाली मनाई है। कोर्ट ने भाई को न्याय देकर परिवार को दिवाली मनाने का मौका दिया है।
विज्ञापन
आंखों में भाई की कमी से आज भी नमी
मंदिर में दिवाली मनाने के दौरान राजकिरन और उनके परिवार के चेहरे पर हंसी तो थी लेकिन आंखों में नमी साफ दिखाई दे रही थी। राजकिरन ने कहा कि उनके भाई को इंसाफ जरूर मिला है, लेकिन भाई की कमी तो हमेशा खलेगी। इसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता। उनके पिता किशनलाल ने कहा कि बेटा खोने का गम हमेशा उनके सीने में रहेगा। छोटा भाई होने के नाते राजकिरन ने राजीव को न्याय दिलाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है और बिना झुके सफल हुआ है। इस बात की उन्हें खुशी है।
विज्ञापन
पापा के जाने के बाद से आज पता चला क्या होती हैं खुशियां
राजीव के परिवार में उनकी पत्नी प्रभा और दो बेटे दक्ष और मानव हैं। प्रभा पिछले दो-तीन साल से अपने मायके में हैं। दक्ष नौवीं और मानव पांचवीं कक्षा में पढ़ रहा है। दोनों चाचा राजकिरन के पास ही रहते हैं। बोले, उन्हें चाचा ने ही पिता का प्यार दिया है। चाची ने भी कभी उनके साथ भेदभाव नहीं किया। पापा के चले जाने के बाद खुशी क्या होती है, वे भूल ही गए थे। खुशियां क्या होती हैं, यह आज पता चला है।
आसान नहीं थी न्याय की जंग
राजकिरन के लिए भाई को इंसाफ दिलाने की लड़ाई लड़ना आसान नहीं थी। 2017 में कोर्ट में ट्रायल शुरू हुआ था। इसके बाद लंबे समय तक आरोपियों की ओर से समझौते के लिए डराया, धमकाया गया। एक करोड़ रुपये देने का ऑफर दिया गया, लेकिन वह न डरे और न झुके। हर धमकी के बाद उनका हौसला और मजबूत होता गया। उनकी हत्या की साजिश भी रची गई। इसका वीडियो वायरल हो गया। इस मामले में भी शिकायत दर्ज कराई गई। इस सबके बावजूद उन्होंने भाई के हत्यारों को सजा दिलाने की जंग जारी रखी।