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Bareilly News: अपात्र छात्रा के मामले में पूछताछ के लिए बदायूं के अधिकारियों को लिखा पत्र
Sat, 04 Jul 2026 01:45 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Sat, 04 Jul 2026 01:45 AM IST
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बरेली। समाज कल्याण विभाग के महिला छात्रावास में एक छात्रा की पात्रता पर संशय खड़ा हो गया है। उस पर ग्राम सचिव होने और एमएससी छोड़ने के बावजूद छात्रावास में रहने का आरोप है। इस मामले में अधीक्षिका अर्चना वर्मा ने बदायूं के अधिकारियों को पत्र लिखकर सूचना मांगी है। दूसरी ओर छात्रावास में अग्निशमन के इंतजाम भी नहीं हैं, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
छात्रावास में रह रही अन्य छात्राओं ने शिकायत की है कि बदायूं की यह छात्रा करीब आठ माह से छात्रावास में रह रही है। उसने ग्राम सचिव होने की बात छिपाई। छात्रा ने एमएससी में प्रवेश का हवाला देकर दाखिला लिया था, पर अब उसने एमएससी भी छोड़ दी है। नियमानुसार, छात्रावास में रहने के लिए अभ्यर्थी को नियमित छात्र होना चाहिए और नौकरी नहीं करनी चाहिए। अधीक्षिका अर्चना वर्मा ने शिकायत मिलने के बाद बदायूं से सूचना मांगी है। हालांकि, लिखित प्रमाण न होने से अभी पुष्टि नहीं हुई है। पुष्टि होने पर उसे नई चयन प्रक्रिया से बाहर किया जा सकता है।
वहीं छात्रावास में अग्निशमन के उपकरण नहीं हैं। 20 छात्राएं कमरों में छोटे सिलिंडरों से खाना बनाती हैं, क्योंकि मेस नहीं है। आग लगने पर बुझाने के लिए कोई सिलिंडर भी उपलब्ध नहीं है। अधीक्षिका अर्चना वर्मा ने बताया कि बजट रख-रखाव में खर्च हो गया। उन्होंने शासन को अग्निशमन इंतजामों और कैटरिंग सिस्टम के लिए मांग भेजी है।
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छात्रावास में रह रही अन्य छात्राओं ने शिकायत की है कि बदायूं की यह छात्रा करीब आठ माह से छात्रावास में रह रही है। उसने ग्राम सचिव होने की बात छिपाई। छात्रा ने एमएससी में प्रवेश का हवाला देकर दाखिला लिया था, पर अब उसने एमएससी भी छोड़ दी है। नियमानुसार, छात्रावास में रहने के लिए अभ्यर्थी को नियमित छात्र होना चाहिए और नौकरी नहीं करनी चाहिए। अधीक्षिका अर्चना वर्मा ने शिकायत मिलने के बाद बदायूं से सूचना मांगी है। हालांकि, लिखित प्रमाण न होने से अभी पुष्टि नहीं हुई है। पुष्टि होने पर उसे नई चयन प्रक्रिया से बाहर किया जा सकता है।
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वहीं छात्रावास में अग्निशमन के उपकरण नहीं हैं। 20 छात्राएं कमरों में छोटे सिलिंडरों से खाना बनाती हैं, क्योंकि मेस नहीं है। आग लगने पर बुझाने के लिए कोई सिलिंडर भी उपलब्ध नहीं है। अधीक्षिका अर्चना वर्मा ने बताया कि बजट रख-रखाव में खर्च हो गया। उन्होंने शासन को अग्निशमन इंतजामों और कैटरिंग सिस्टम के लिए मांग भेजी है।
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