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लीड : पांच साल बाद भी शुरू नहीं हो सका 50 बेड का एमसीएच विंग अस्पताल
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आंवला। करोड़ों की लागत से निर्मित 50 बेड का मदर एंड चाइल्ड विंग अस्पताल (एमसीएच) पांच वर्ष बाद भी शुरू नहीं हो सका है। इसकी वजह से अधिकांश मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बदायूं और बरेली के लिए दौड़ लगाना पड़ रहा है। इसमें भी सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और महिलाओं को हो रही है। इसके विपरीत स्वास्थ्य विभाग बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया होने का दावा कर रहा है। एमसीएच के सवाल पर इसको जल्द शुरू करने की बात कहकर टालमटोल दे रहा है।
अस्पताल का भवन बनकर तैयार है। केवल आंतरिक सज्जा होना अभी बाकी है। विभागीय अफसरों की लापरवाही से सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना कछुआ गति से चल रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में वर्ष 2017-18 में 50 बेड के एमसीएच विंग का निर्माण शुरू हुआ था। कार्यदायी संस्था ने इस भवन का निर्माण करीब 7.35 करोड़ की लागत से किया है। कार्यदायी संस्था ने पांच वर्ष पले इसका निर्माण पूरा कर स्वास्थ्य विभाग को यह सौंप दिया था, लेकिन उसके बाद यह भवन शुरू नहीं हुआ, जबकि 2024 दिसंबर माह में संपूर्ण समाधान दिवस के समापन के बाद सीएचसी का औचक निरीक्षण करने पहुंचे मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विश्राम सिंह ने आश्वासन दिया था। संवाद
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रेफरल केस ज्यादा आ रहे
हाल यह है कि सीएचसी आंवला में प्रतिदिन 600 से ऊपर मरीज पहुंच रहे हैं, लेकिन यहां एक ही चिकित्सक होने के चलते मरीजों को परेशानी हो रही है। अधिकांश मरीजों को बाहर रेफर कर दिया जाता है। इसमें सबसे ज्यादा बच्चे और महिलाएं ही प्रभावित हैं।
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भवन के दरवाजे व शीशे टूटे, पशुओं के लिए बना चारागाह
विभागीय अधिकारियों की लापरवाही व देखरेख न होने से इमारत की रंगाई-पुताई खराब होने लगी है। इमारत के चारों ओर काफी ऊंची घास जम गई है। इसके अलावा इमारत के पिछले हिस्से में लगे खिड़की व दरवाजों के शीशों को शरारती तत्वों ने तोड़ दिए हैं। इसके अलावा यहां लगे फायर सेफ्टी सिस्टम व बिजली फिटिंग को भी नुकसान पहुंचा है। अस्पताल के पिछले हिस्से की चहारदीवारी कई साल पहले बरसात में गिर गई थी। यहां का परिसर पालतू जानवर आदि का चारागाह बन गया है।
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पिछले दिनों सीएचसी पर सीएमओ निरीक्षण करने पहुंचे, तब उन्होंने शीघ्र अस्पताल के शुरू कराने का आश्वासन दिया है।
-शशांक यादव, सीएचसी प्रभारी
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अस्पताल का भवन बनकर तैयार है। केवल आंतरिक सज्जा होना अभी बाकी है। विभागीय अफसरों की लापरवाही से सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना कछुआ गति से चल रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में वर्ष 2017-18 में 50 बेड के एमसीएच विंग का निर्माण शुरू हुआ था। कार्यदायी संस्था ने इस भवन का निर्माण करीब 7.35 करोड़ की लागत से किया है। कार्यदायी संस्था ने पांच वर्ष पले इसका निर्माण पूरा कर स्वास्थ्य विभाग को यह सौंप दिया था, लेकिन उसके बाद यह भवन शुरू नहीं हुआ, जबकि 2024 दिसंबर माह में संपूर्ण समाधान दिवस के समापन के बाद सीएचसी का औचक निरीक्षण करने पहुंचे मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विश्राम सिंह ने आश्वासन दिया था। संवाद
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रेफरल केस ज्यादा आ रहे
हाल यह है कि सीएचसी आंवला में प्रतिदिन 600 से ऊपर मरीज पहुंच रहे हैं, लेकिन यहां एक ही चिकित्सक होने के चलते मरीजों को परेशानी हो रही है। अधिकांश मरीजों को बाहर रेफर कर दिया जाता है। इसमें सबसे ज्यादा बच्चे और महिलाएं ही प्रभावित हैं।
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भवन के दरवाजे व शीशे टूटे, पशुओं के लिए बना चारागाह
विभागीय अधिकारियों की लापरवाही व देखरेख न होने से इमारत की रंगाई-पुताई खराब होने लगी है। इमारत के चारों ओर काफी ऊंची घास जम गई है। इसके अलावा इमारत के पिछले हिस्से में लगे खिड़की व दरवाजों के शीशों को शरारती तत्वों ने तोड़ दिए हैं। इसके अलावा यहां लगे फायर सेफ्टी सिस्टम व बिजली फिटिंग को भी नुकसान पहुंचा है। अस्पताल के पिछले हिस्से की चहारदीवारी कई साल पहले बरसात में गिर गई थी। यहां का परिसर पालतू जानवर आदि का चारागाह बन गया है।
पिछले दिनों सीएचसी पर सीएमओ निरीक्षण करने पहुंचे, तब उन्होंने शीघ्र अस्पताल के शुरू कराने का आश्वासन दिया है।
-शशांक यादव, सीएचसी प्रभारी