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Bareilly News: एलाइनमेंट लीक होने के बाद खरीदीं थीं जमीनें, बनाए ढांचे

Sat, 09 Nov 2024 02:38 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 09 Nov 2024 02:38 AM IST
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Lands were purchased after alignment was leaked, structures were built
बरेली। बीसलपुर-शाहजहांपुर हाईवे की अंतिम जांच रिपोर्ट लोक निर्माण विभाग ने विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलएओ) को सौंप दी है। इसमें तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत भी पाई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एलाइनमेंट लीक होते ही घपलेबाजों ने अधिक लाभ कमाने के उद्देश्य से जमीनें खरीदीं और ढांचे खड़े कर दिए। इसके बाद सर्वे करने गई टीम से सांठगांठ कर ढांचों को 5-10 वर्ष पुराना बता दिया। जांच टीम ने ढांचे पुराने होने के दावे को खारिज कर दिया है। जांच कमेटी ने पुन: जमीनों और ढांचों का आकलन कर रिपोर्ट भेजी है। जिसमें आकलन की धनराशि को भी कम कर दिया गया है।
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बरेली-सितारगंज हाईवे के लिए अधिग्रहित भूमि में हुई घपलेबाजी सामने आने के बाद मंडलायुक्त से बीसलपुर-शाहजहांपुर हाईवे में हुई घपलेबाजी की शिकायत की गई थी। शिकायत में कहा गया था कि बीसलपुर तहसील क्षेत्र के गांव महावा और ग्यासपुर में जमीनें उन्हीं ने खरीदी हैं, जो बरेली-सितारगंज हाईवे की घपलेबाजी में संलिप्त पाए गए हैं। शिकायत में लखनऊ की साधना सिंह, बरेली के रामेश्वर दयाल गंगवार और नवीन मित्तल के नाम दिए गए थे। इसके बाद मंडलायुक्त ने पीलीभीत के डीएम संजय कुमार सिंह को मामले की जांच के निर्देश दिए थे।
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सितंबर माह में डीएम ने तीन विभागों की कमेटी बनाई। टीम ने दोनों गांवों में जाकर स्थलीय निरीक्षण किया। एसडीएम की ओर से अंतरिम रिपोर्ट गत माह भेज दी गई थी, लेकिन अंतिम रिपोर्ट बुधवार को लोक निर्माण विभाग की ओर से एसएलएओ बरेली को भेज दी गई।
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जांच में टीम ने पाया है कि वर्ष 2022 में घपलेबाज हाईवे निकलने की जानकारी मिलते ही एलाइनमेंट के दायरे में आने वाली जमीनों को खरीदने के लिए दलालों से संपर्क करने लगे थे। दो लाख रुपये बीघा की दर से घपलेबाजों ने जमीनें खरीदीं और इसके बाद उन पर दिसंबर 2023 में ढांचे खड़े कर दिए। ऐसे सात ढांचे महावा और ग्यासपुर गांव में पाए गए हैं।

लेखपाल और अभियंताओं की संलिप्तता भी आई है सामने
पूर्व में हुए संयुक्त सर्वे में आकलन नियमों के विपरीत पाया गया है। ऐसे में लेखपालों और अभियंताओं की घपलेबाजी में संलिप्तता पाई गई है। ढांचों का आकलन दोगुना तक पाया गया है।


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अंतिम जांच रिपोर्ट लोक निर्माण विभाग की ओर से दो दिन पूर्व सौंपी गई थी। जिसे एसएलएओ बरेली को भेज दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार लाभ कमाने के उद्देश्य से ही जमीनें खरीदी गई थीं। इसके बाद दिसंबर 2023 में ढांचें खड़े कर दिए गए थे। - विजय वर्धन तोमर, एसएलएओ, पीलीभीत
संवाद
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