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Bareilly News: ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की गारंटी हैं श्रम कानून, बढ़ेगी पारदर्शिता
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बरेली। केंद्र सरकार के चारों श्रम कानून श्रमिक, कर्मचारियों के हित की सुरक्षा के लिए हैं, ताकि नियमों के ताने-बाने में न उलझना पड़े। इससे पारदर्शिता और कुशल कर्मचारी मिलने से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी। मंडल के उद्योग, व्यापार में कार्यरत 30 लाख श्रमिकों को लाभ मिलेगा।
उप श्रमायुक्त दिव्य प्रताप सिंह के मुताबिक, नए कानून लागू हो गए हैं। गिग वर्कर्स (ई-कॉमर्स परिवहन, होम डिलीवरी प्लेटफार्म से जुड़े श्रमिक) का ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण कराया जा रहा है। सबसे अहम हिस्सा कर्मचारियों को नियुक्तिपत्र देना है।
पूर्व में कार्यरत लोगों को नियुक्तिपत्र नहीं मिलने से कई लाभ से वंचित थे। अब नियुक्तिपत्र देना अनिवार्य है। पहले पांच वर्ष कार्य के बाद ही ग्रेच्युटी मिलती थी जो अब एक वर्ष पूरा होने पर भी मिलेगी। 40 वर्ष से अधिक आयु के कर्मियों की निशुल्क स्वास्थ्य जांच, हेल्थ कार्ड, ईएसआईसी नामांकन जरूरी है।
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बताया कि ई-श्रम पोर्टल पर बरेली मंडल से करीब 35 लाख लोग पंजीकृत हैं। निर्माण श्रमिक श्रेणी में 10 लाख लोग पंजीकृत हैं। इनमें से कई श्रमिक दोनों स्तर पर पंजीकृत हैं। जिन्हें इन कानूनों का सीधा लाभ मिलेगा। श्रम कानून पालन कराने के लिए कड़ी निगरानी की व्यवस्था है।
पीएफ, ग्रेच्युटी लागत बढ़ने का मिलेगा लाभ
आईसीएआई अध्यक्ष सीए अमित टंडन के मुताबिक सरकार ने न्यूनतम मजदूरी के कानूनी अधिकार के लिए वेज कोड में चार, सामाजिक सुरक्षा कोड में नौ, ओएसएच कोड में 13, आईआर कोड में तीन कानून शामिल कर पुराने 29 कानून खत्म किए हैं। बेसिक सेलरी, भत्तों का 50 फीसदी होगी। पीएफ, ग्रेच्युटी बढ़ेगी। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में बेहतर प्रयास है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट, एचआर की बढ़ेगी भूमिका
सीए अरविंद कुमार सिंह के मुताबिक नए कानून लागू कराने के लिए कंपनियों में पेरोल पुनर्गठन और बढ़ी ग्रेच्युटी देनदारियों के मूल्यांकन में मार्गदर्शन के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट और ह्यूमेन रिसोर्स भूमिका अहम होगी। नए उद्योग और स्टार्टअप पर नई व्यवस्था दबाव की वजह सकती है। गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को शामिल करने से जीवनस्तर में सुधार होगा।
सवाल : एक कर्मचारी को कैसे देंगे नियुक्ति पत्र
उप्र उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय महामंत्री राजेंद्र गुप्ता के मुताबिक नगर निगम क्षेत्र में अनुमानित 70 हजार दुकान पर 1.5 लाख श्रमिक हैं। ज्यादातर ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत हैं। शहर में जो बड़े शोरूम व दुकानें है वह अपने कर्मचारियों को ज्वाइनिंग लेटर दे सकते है। देना भी चाहिए लेकिन जिस दुकान पर एक या दो श्रमिक हैं उन्हें लेटर कैसे दे सकेंगे। ब्यूरो
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उप श्रमायुक्त दिव्य प्रताप सिंह के मुताबिक, नए कानून लागू हो गए हैं। गिग वर्कर्स (ई-कॉमर्स परिवहन, होम डिलीवरी प्लेटफार्म से जुड़े श्रमिक) का ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण कराया जा रहा है। सबसे अहम हिस्सा कर्मचारियों को नियुक्तिपत्र देना है।
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पूर्व में कार्यरत लोगों को नियुक्तिपत्र नहीं मिलने से कई लाभ से वंचित थे। अब नियुक्तिपत्र देना अनिवार्य है। पहले पांच वर्ष कार्य के बाद ही ग्रेच्युटी मिलती थी जो अब एक वर्ष पूरा होने पर भी मिलेगी। 40 वर्ष से अधिक आयु के कर्मियों की निशुल्क स्वास्थ्य जांच, हेल्थ कार्ड, ईएसआईसी नामांकन जरूरी है।
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बताया कि ई-श्रम पोर्टल पर बरेली मंडल से करीब 35 लाख लोग पंजीकृत हैं। निर्माण श्रमिक श्रेणी में 10 लाख लोग पंजीकृत हैं। इनमें से कई श्रमिक दोनों स्तर पर पंजीकृत हैं। जिन्हें इन कानूनों का सीधा लाभ मिलेगा। श्रम कानून पालन कराने के लिए कड़ी निगरानी की व्यवस्था है।
पीएफ, ग्रेच्युटी लागत बढ़ने का मिलेगा लाभ
आईसीएआई अध्यक्ष सीए अमित टंडन के मुताबिक सरकार ने न्यूनतम मजदूरी के कानूनी अधिकार के लिए वेज कोड में चार, सामाजिक सुरक्षा कोड में नौ, ओएसएच कोड में 13, आईआर कोड में तीन कानून शामिल कर पुराने 29 कानून खत्म किए हैं। बेसिक सेलरी, भत्तों का 50 फीसदी होगी। पीएफ, ग्रेच्युटी बढ़ेगी। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में बेहतर प्रयास है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट, एचआर की बढ़ेगी भूमिका
सीए अरविंद कुमार सिंह के मुताबिक नए कानून लागू कराने के लिए कंपनियों में पेरोल पुनर्गठन और बढ़ी ग्रेच्युटी देनदारियों के मूल्यांकन में मार्गदर्शन के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट और ह्यूमेन रिसोर्स भूमिका अहम होगी। नए उद्योग और स्टार्टअप पर नई व्यवस्था दबाव की वजह सकती है। गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को शामिल करने से जीवनस्तर में सुधार होगा।
सवाल : एक कर्मचारी को कैसे देंगे नियुक्ति पत्र
उप्र उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय महामंत्री राजेंद्र गुप्ता के मुताबिक नगर निगम क्षेत्र में अनुमानित 70 हजार दुकान पर 1.5 लाख श्रमिक हैं। ज्यादातर ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत हैं। शहर में जो बड़े शोरूम व दुकानें है वह अपने कर्मचारियों को ज्वाइनिंग लेटर दे सकते है। देना भी चाहिए लेकिन जिस दुकान पर एक या दो श्रमिक हैं उन्हें लेटर कैसे दे सकेंगे। ब्यूरो