केंद्रीय टीम ने भी माना खेत में भूसा बचा न दाना
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देर शाम यहां कलेक्ट्रेट सभागार में केंद्रीय टीम ने कमिश्नर प्रमांशु यादव की अध्यक्षता में चारों जिलों के जिलाधिकारियों की बैठक ली। बताया गया कि नुकसान के मुआवजे के लिए मंडल के चारों जिलों में राज्य सरकार ने अब तक कुल 59 करोड़ रुपये भेजे हैं। बैठक में स्पष्ट किया गया कि अब किसी भी किसान को 1500 रुपये से कम मुआवजा नहीं मिलेगा। साथ ही प्रति हेक्टेयर मुआवजा राशि सरकार ने नौ हजार रुपये से बढ़ाकर 18 हजार रुपये कर दी है। इसी के अनुसार मुआवजे का भुगतान यथासंभव चेक से शिविर लगाकर होगा। बरेली के डीएम गौरव दयाल ने बताया कि जिले में अब तक 23 किसानों की मौत हुई है और इनमें से चार ने खुदकुशी की है। बृहस्पतिवार को ही जिले में मृत कृषकों के आश्रितों को 30-30 हजार रुपये पारिवारिक लाभ योजना में दिए गए एवं मुख्यमंत्री राहत कोष से भी सहायता के लिए संस्तुति की गई है।
अभी तक जिले में 50 फीसदी ज्यादा नुकसान से प्रभावित किसानों की संख्या 71 हजार है। मुआवजा वितरण के लिए अब तक बरेली को 16.67 करोड़ रुपये, शाहजहांपुर को 15.35 करोड़ रुपये, बदायूं को 22.24 करोड़ रुपये और पीलीभीत को पांच करोड़ रुपये मिल गए हैं। बैठक में केंद्रीय टीम में शामिल नीति आयोग के वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी डॉ. रामानंद, केंद्रीय पशुपालन विभाग के उप सचिव पार्थसारथी चक्रवर्ती और गन्ना विकास निदेशालय (लखनऊ) के सहायक निदेशक डॉ. सुमित मिश्रा के साथ उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक अशोक कुमार, सीडीओ शिव सहाय अवस्थी, शाहजहांपुर की डीएम शुभ्रा सक्सेना, पीलीभीत के डीएम ओएन सिंह आदि मौजूद थे।
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सर्वे और राहत देने में ढिलाई
केंद्रीय टीम ने पाया कि फसलों का वास्तव में काफी नुकसान हुआ है लेकिन सभी जगहों पर जमीनी स्तर पर इसका सही सर्वे नहीं हुआ है। शाहजहांपुर के पुवायां और पीलीभीत के पूरनपुर, बीसलपुर और बिलसंडा में फसलों को 50 फीसदी से ज्यादा का नुकसान हुआ लेकिन प्रशासन ने उसका सही आकलन नहीं किया है। बरेली में 80 से 90 फीसदी और कहीं सौ फीसदी तक नुकसान का सर्वे हुआ है।