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आईवीआरआई ओवरब्रिज- हाईकोर्ट के सामने कल ठेकेदार-रेलवे अफसर रखेंगे अपने पक्ष
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बरेली। आईवीआरआई क्रासिंग पर रेलवे के 11 करोड़ के ओवरब्रिज के प्रोजेक्ट में गड़बड़ी का मामला हाईकोर्ट में जाने के बाद सात जुलाई को ठेकेदार और रेलवे अधिकारी दोनों को ही अपना पक्ष न्यायालय के सामने रखना है। रेलवे के अधिकारियों ने गलतियों का ठीकरा ठेकेदार पर फोड़ते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई कर दी थी। लेकिन ठेकेदार के हाईकोर्ट जाने के बाद अब रेलवे अफसर अपनी गर्दन बचाने में जुट गए हैं। पूरे मामले की रेलवे विजिलेंस से जांच भी कराई जा रही है।
रेलवे ने क्रासिंग पर ओवरब्रिज के अपने हिस्से में आने वाले काम का ठेका वर्ष 2017 में एक आउट सोर्सिंग कंपनी को करीब 11 करोड़ में दिया था। बाद में निर्माण सामग्री में बढ़ोत्तरी का हवाला देते हुए इस प्रोजेक्ट की लागत 15.50 करोड़ रुपये कर दी गई। तीन माह पहले रेलवे ने ठेका लेने वाली एजेंसी के काम में गड़बड़ियां निकालते हुए उसे टर्मिनेट कर दिया। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ठेकेदार को ओवरब्रिज के लिए आठ गार्डर बनाए, लेकिन न तो उनकी डिजाइन ठीक है और न ही उन्हेें मानक के अनुरूप बनाया गया है। ये गार्डर करीब सालभर से क्रासिंग के पास ही रखे हुए हैं। ओवरब्रिज के दूसरे काम भी सही नहीं हुए है। इधर, ठेकेदार यह कहते हुए हाईकोर्ट की शरण में चला गया है कि रेलवे के अफसरों की निगरानी में ही गार्डर बनाने का काम हुआ था। खुद पर कार्रवाई से बचने के लिए ठेकेदार को फंसा दिया गया है। इस मामले में दोनों पक्षों को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सात जुलाई को अपने पक्ष रखने हैं।
पब्लिक के काम नहीं आ रहा अंडरपास
आईवीआरआई ओवरब्रिज का काम जल्द पूरा होने के आसार नहीं है। कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने रेलवे अधिकारियों को निर्देशित किया था कि मानसून आने से पहले कम से कम अंडरपास का काम पूरा कर लिया जाए। रेलवे ने इसका काम भी शुरू कराया, लेकिन अंडरपास के लिए ड्रेनेज सिस्टम की प्लानिंग ही नहीं बनाई है। इसलिए बारिश में यहां पानी भरना शुरू हो गया है। ऐसे में पब्लिक के लिए यह अंडरपास फिलहाल किसी काम का नहीं है।
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रेलवे ने क्रासिंग पर ओवरब्रिज के अपने हिस्से में आने वाले काम का ठेका वर्ष 2017 में एक आउट सोर्सिंग कंपनी को करीब 11 करोड़ में दिया था। बाद में निर्माण सामग्री में बढ़ोत्तरी का हवाला देते हुए इस प्रोजेक्ट की लागत 15.50 करोड़ रुपये कर दी गई। तीन माह पहले रेलवे ने ठेका लेने वाली एजेंसी के काम में गड़बड़ियां निकालते हुए उसे टर्मिनेट कर दिया। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ठेकेदार को ओवरब्रिज के लिए आठ गार्डर बनाए, लेकिन न तो उनकी डिजाइन ठीक है और न ही उन्हेें मानक के अनुरूप बनाया गया है। ये गार्डर करीब सालभर से क्रासिंग के पास ही रखे हुए हैं। ओवरब्रिज के दूसरे काम भी सही नहीं हुए है। इधर, ठेकेदार यह कहते हुए हाईकोर्ट की शरण में चला गया है कि रेलवे के अफसरों की निगरानी में ही गार्डर बनाने का काम हुआ था। खुद पर कार्रवाई से बचने के लिए ठेकेदार को फंसा दिया गया है। इस मामले में दोनों पक्षों को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सात जुलाई को अपने पक्ष रखने हैं।
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पब्लिक के काम नहीं आ रहा अंडरपास
आईवीआरआई ओवरब्रिज का काम जल्द पूरा होने के आसार नहीं है। कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने रेलवे अधिकारियों को निर्देशित किया था कि मानसून आने से पहले कम से कम अंडरपास का काम पूरा कर लिया जाए। रेलवे ने इसका काम भी शुरू कराया, लेकिन अंडरपास के लिए ड्रेनेज सिस्टम की प्लानिंग ही नहीं बनाई है। इसलिए बारिश में यहां पानी भरना शुरू हो गया है। ऐसे में पब्लिक के लिए यह अंडरपास फिलहाल किसी काम का नहीं है।
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