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इस बार नहीं दिख रही खजला और फेनी की बहार
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रमजान
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूूरेेा
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सहरी के लिए हैं ये खास डिश, कुछ लोग घरों पर बना रहे
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रोजेदारों ने अभी से तलाश लिया है हर चीज का विकल्प
बरेली। कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन से रमजान का बाजार इस बार ठंडा है। खजला और फेनी की बहार इस बार कहीं नहीं दिख रही है। खजूर की भी किल्लत रहने की आशंका है।
रमजान में सहरी की खास डिश खजला और फेनी है। रमजान शुरू होने से एक सप्ताह पहले से ही शहर के तमाम इलाकों में खजला और फेनी की दुकानें सजने लगती थीं। लोग देर रात तक इनकी खरीदारी के लिए बाजारों में जमे रहते थे। ये दो आइटम जहां स्थानीय हलवाई खासतौर से बनाते थे, वहीं बाहर से भी तमाम कारीगर बरेली में आकर खजला और फेनी की सड़कों के किनारे दुकानें लगा लिया करते थे, लेकिन इस बार लॉकडाउन की वजह से सड़कें सूनी हैं। हालांकि पुराना शहर और किला क्षेत्र के इलाकों में कुछ हलवाइयों ने छोटे पैमाने पर खजला और फेनी अपने घरों में बनानी शुरू कर दी है। ताकि ज्यादा न सही मोहल्ले के लोग तो खरीद ही सकें।
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इसी तरह खजूर इफ्तार के दस्तरख्वान पर सबसे खास होती है। आमतौर पर रोजेदार खजूर से रोजा इफ्तार करते हैं। इसकी भी इस बार किल्लत होने की आशंका है। इसके विकल्प के तौर पर इस बार छुआरा दस्तरख्वान पर ज्यादा दिख सकता है। इसका लोगों ने अभी से बंदोबस्त कर लिया है, जबकि खजला और फेनी के विकल्प के तौर पर दूध में चोकोस और क्लैग्स का जायका ले सकते हैं। दूध-ब्रेड भी इसका विकल्प हो सकता है। वैसे कुछ लोगों ने अपने घरों पर ही सिवइयां बनवानी शुरू कर दी हैं। इसके अलावा भी लोगों ने सहरी में तमाम दूसरी तरह के पकवान बनवाने का मन बनाया है। फल तो बाजार में उपलब्ध हैं ही।
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रोजेदारों ने अभी से तलाश लिया है हर चीज का विकल्प बरेली। कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन से रमजान का बाजार इस बार ठंडा है। खजला और फेनी की बहार इस बार कहीं नहीं दिख रही है। खजूर की भी किल्लत रहने की आशंका है।
रमजान में सहरी की खास डिश खजला और फेनी है। रमजान शुरू होने से एक सप्ताह पहले से ही शहर के तमाम इलाकों में खजला और फेनी की दुकानें सजने लगती थीं। लोग देर रात तक इनकी खरीदारी के लिए बाजारों में जमे रहते थे। ये दो आइटम जहां स्थानीय हलवाई खासतौर से बनाते थे, वहीं बाहर से भी तमाम कारीगर बरेली में आकर खजला और फेनी की सड़कों के किनारे दुकानें लगा लिया करते थे, लेकिन इस बार लॉकडाउन की वजह से सड़कें सूनी हैं। हालांकि पुराना शहर और किला क्षेत्र के इलाकों में कुछ हलवाइयों ने छोटे पैमाने पर खजला और फेनी अपने घरों में बनानी शुरू कर दी है। ताकि ज्यादा न सही मोहल्ले के लोग तो खरीद ही सकें।
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इसी तरह खजूर इफ्तार के दस्तरख्वान पर सबसे खास होती है। आमतौर पर रोजेदार खजूर से रोजा इफ्तार करते हैं। इसकी भी इस बार किल्लत होने की आशंका है। इसके विकल्प के तौर पर इस बार छुआरा दस्तरख्वान पर ज्यादा दिख सकता है। इसका लोगों ने अभी से बंदोबस्त कर लिया है, जबकि खजला और फेनी के विकल्प के तौर पर दूध में चोकोस और क्लैग्स का जायका ले सकते हैं। दूध-ब्रेड भी इसका विकल्प हो सकता है। वैसे कुछ लोगों ने अपने घरों पर ही सिवइयां बनवानी शुरू कर दी हैं। इसके अलावा भी लोगों ने सहरी में तमाम दूसरी तरह के पकवान बनवाने का मन बनाया है। फल तो बाजार में उपलब्ध हैं ही।