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Bareilly News: विवाद की जड़ है कड़ेराम, कई बार बेची एक ही जमीन
Mon, 15 Jul 2024 04:41 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Mon, 15 Jul 2024 04:41 AM IST
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बरेली। पीलीभीत बाइपास पर जिस प्लॉट के लिए बवाल हुआ, उसके स्वामित्व का पेच पुलिस-प्रशासन अभी तक नहीं सुलझा सका है। पुलिस की फौरी जांच में स्पष्ट हुआ है कि कड़ेराम नाम का शख्स ही विवाद की जड़ रहा है। वह बार-बार एक ही जमीन को बेचता रहा और रंजिश बढ़ती रही।
पुलिस ने मुकदमे की विवेचना के दौरान असली स्थिति जानने का प्रयास किया। दोनों पक्षों के दावों, स्थानीय लोगों से पूछताछ और कागजात जुटाने के बाद जो तस्वीर साफ हुई है, उसके मुताबिक 23 जनवरी 1973 को तुलापुर गांव निवासी डल्लू पुत्र खिम्मी ने यहां 17 बिस्वा जमीन महेंद्र प्रसाद को और 15 बिस्वा जमीन कड़ेराम पुत्र झम्मन को बेची थी। कड़ेराम तब नाबालिग था। संरक्षक के तौर पर उसकी मां नथिया थीं। नथिया ने वर्ष 1975 में यह जमीन बरेली शहर निवासी गुरुशरण माथुर को बेच दी।
पहले मां ने बेची, फिर बेटे ने बेच दी जमीन
पुलिस के मुताबिक 12 मई 1986 को गुरुशरण के बेटे विमल माथुर ने इस जमीन का पूर्व और पश्चिम का हिस्सा ओमपाल शर्मा व पुष्पेंद्र शर्मा को बेच दिया। बाद में बालिग हुए कड़ेराम ने वर्ष 1999 में यही जमीन राजेश राना व सोमपाल को बेच दी। जिक्र है कि वर्ष 2005 में कड़ेराम ने फिर इस जमीन को बेच दिया। इस बार इसे दो टुकड़ों में आनंद राठौर व दूसरा हिस्सा बीएस गंगवार और मंसूर आलम को बेचा गया। वर्ष 2008 में इन तीनों ने करीब 842 वर्गमीटर जमीन डॉ. भारती गुप्ता को बेच दी। भारती गुप्ता ने जमीन पर कब्जा लेने का प्रयास किया पर सफलता नहीं मिली। तब उन्होंने इसी साल इसे राजीव राना को बेच दिया। बताया ये भी जा रहा है कि इसी जमीन का करीब 568 वर्ग मीटर हिस्सा कड़ेराम ने आदित्य उपाध्याय को भी वर्ष 2008 में बेच दिया। ऐसे में राजीव राना व आदित्य दोनों ही पक्ष प्लॉट पर अपना दावा कर रहे हैं।
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पुलिस ने मुकदमे की विवेचना के दौरान असली स्थिति जानने का प्रयास किया। दोनों पक्षों के दावों, स्थानीय लोगों से पूछताछ और कागजात जुटाने के बाद जो तस्वीर साफ हुई है, उसके मुताबिक 23 जनवरी 1973 को तुलापुर गांव निवासी डल्लू पुत्र खिम्मी ने यहां 17 बिस्वा जमीन महेंद्र प्रसाद को और 15 बिस्वा जमीन कड़ेराम पुत्र झम्मन को बेची थी। कड़ेराम तब नाबालिग था। संरक्षक के तौर पर उसकी मां नथिया थीं। नथिया ने वर्ष 1975 में यह जमीन बरेली शहर निवासी गुरुशरण माथुर को बेच दी।
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पहले मां ने बेची, फिर बेटे ने बेच दी जमीन
पुलिस के मुताबिक 12 मई 1986 को गुरुशरण के बेटे विमल माथुर ने इस जमीन का पूर्व और पश्चिम का हिस्सा ओमपाल शर्मा व पुष्पेंद्र शर्मा को बेच दिया। बाद में बालिग हुए कड़ेराम ने वर्ष 1999 में यही जमीन राजेश राना व सोमपाल को बेच दी। जिक्र है कि वर्ष 2005 में कड़ेराम ने फिर इस जमीन को बेच दिया। इस बार इसे दो टुकड़ों में आनंद राठौर व दूसरा हिस्सा बीएस गंगवार और मंसूर आलम को बेचा गया। वर्ष 2008 में इन तीनों ने करीब 842 वर्गमीटर जमीन डॉ. भारती गुप्ता को बेच दी। भारती गुप्ता ने जमीन पर कब्जा लेने का प्रयास किया पर सफलता नहीं मिली। तब उन्होंने इसी साल इसे राजीव राना को बेच दिया। बताया ये भी जा रहा है कि इसी जमीन का करीब 568 वर्ग मीटर हिस्सा कड़ेराम ने आदित्य उपाध्याय को भी वर्ष 2008 में बेच दिया। ऐसे में राजीव राना व आदित्य दोनों ही पक्ष प्लॉट पर अपना दावा कर रहे हैं।
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