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बदायूं रोड पर भी सफर खतरनाकः 280 करोड़ से बना 45 किलोमीटर का फोरलेन.. उम्र सिर्फ पांच साल

Mon, 24 Aug 2020 01:47 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 24 Aug 2020 01:47 AM IST
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Journey on Badaun Road is also dangerous: 45 km forelane made of 280 crores .. Age only five years
रामगंगा पुल की जर्जर सड़क। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

बरेली से बदायूं तक बेशुमार गड्ढे, रामगंगा पुल से पहले अवैध कब्जे भी बड़ी मुसीबत
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लगातार हालत खराब होने के बावजूद नहीं कराई जा रही मरम्मत, न कब्जे हटाए जा रहे

रामगंगा पुल 

पांच साल पहले 280 करोड़ की लागत से फोरलेन हुए बदायूं रोड की हालत भी बिगड़ने लगी है। बरेली से बदायूं तक 45 किलोमीटर से ज्यादा लंबी इस पूरी सड़क पर बेशुमार गड्ढे हैं, रामगंगा पुल से आगे तो किनारे कटने की वजह से सड़क ही ढहनी शुरू हो गई है। यह रोड आगरा हाईवे का हिस्सा है और आगे जाकर मथुरा-आगरा के साथ बुलंदशहर और गाजियाबाद से भी जुड़ता है लिहाजा इस पर 24 घंटे ट्रैफिक का भारी दबाव रहता है। सड़क की हालत पिछले साल से ही काफी खराब हो चुकी है, इस वजह से हादसे भी अक्सर होते रहते हैं। बरेली से रामगंगा पुल तक बाकी कसर अवैध कब्जों ने पूरी कर दी है। नेकपुर, सुभाषनगर और फिर करगैना के आबादी वाले इलाकों में इस हाईवे की पटरी तक अवैध कब्जों में गुम हो चुकी है।

रामगंगा पुल के आगे बारिश में कटे दोनों किनारे, ढहनी शुरू हुई सड़क

बरेली। दिल्ली-लखनऊ और नैनीताल हाईवे की तरह मथुरा हाईवे पर भी खतरों की कमी नहीं है। गड्ढों की शुरुआत तो यह हाईवे फोरलेन बनने के कुछ समय बाद ही हो गई थी लेकिन यह बारिश हाईवे पर और ज्यादा भारी गुजरी है। गड्ढे चौड़े और गहरे होने के साथ रामगंगा के आगे सड़क के दोनों किनारे ही कट गए है, जिससे लगातार मिट्टी दरकने के साथ सड़क ढहनी शुरू हो गई है। बड़ा हादसा होने का खतरा होने के बावजूद पीडब्ल्यूडी की ओर से न यहां सड़क की मरम्मत कराई गई है न ऐसा कोई संकेतक लगाया गया है जो इस हाईवे पर गुजरने वालों को आगाह कर सके।
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बरेली से बदायूं जाते समय रामगंगा पुल की सीमा खत्म होते ही दाहिनी तरफ सड़क का कटनी शुरू हो गई है। काफी लंबाई में सड़क के नीचे की मिट्टी बारिश के पानी के बहाव के साथ बह चुकी है जिसकी वजह से सड़क धंसने के साथ ढहनी शुरू हो गई है। तेज रफ्तार से गुजरने वाले वाहनों के यहां जरा भी चूक होने पर फिसलकर सड़क किनारे खाई में पलटने का खतरा बना हुआ है। यहां से थोड़ा आगे बढ़ने पर फिर सड़क के एक तरफ का हिस्सा नीचे बैठ गया है। यहां भी नीचे की मिट्टी खिसक रही है जिसकी वजह से सड़क के कभी भी धंसने के आसार है। हालात साफ इशारा कर रहे हैं कि जब भी यहां सड़क पर कोई भारी वाहन गुजरा तो सड़क धंसने से बड़ा हादसा हो सकता है।
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बताया जा रहा है कि सड़क के धंसने के साथ उस पर गड्ढे बढ़ने के बावजूद काफी समय से पीडब्ल्यूडी की ओर से इस हाईवे की मरम्मत नहीं कराई गई है। इस वजह से उसकी हालत और तेजी से खराब होती जा रही है। हाईवे पर वाहन लेकर गुजरने वालों ने बताया कि कुछ ही समय में सड़क काफी खराब हो चुकी है। अगर जल्द ही इसकी मरम्मत न कराई गई तो अगले साल तक यह सड़क चलने लायक भी नहीं रह जाएगी।
बदायूं की ओर सड़क कटने की जानकारी नहीं है। जल्द ही सर्वे कराकर जहां भी सड़क खराब है, वहां उसे ठीक कराया जाएगा। - पीके बांगड़ी, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड

नेकपुर में धर्मकांटे से पहले सड़क पर दोनों तरफ भीषण कब्जे

चौपुला पार करते ही नेकपुर में सड़क के दोनों तरफ ईंटों के ढेर लगे हुए हैं। यहां अवैध कब्जे बढ़ते-बढ़ते सड़क की पटरी तक पहुंच गए हैं। ईंटों के छोटे-छोटे टुकड़ों की सड़क पर भरमार होने की वजह से अक्सर उन पर दोपहिया वाहन फिसलते हैं और लोग चुटैल होते रहते हैं। लोगों का कहना है कि यहां लंबे समय से सड़क की सीमा में भारी अतिक्रमण है जिसे हटाने की जिम्मेदारी नगर निगम पर है लेकिन निगम के अफसर इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं।

चौरासी घंटा देवी मंदिर के पास दस फुट चौड़ा गड्ढा

सुभाषनगर में प्रख्यात चौरासी घंटा देवी मंदिर के ऐन सामने हाईवे पर करीब दस फुट चौड़ा गड्ढा हो गया है जिसमें वाहनों के फंसकर बेकाबू होने का खतरा बना हुआ है। कुछ समय पहले इस गड्ढे पर पैचवर्क कराया गया था लेकिन कुछ समय बाद ही वह फिर उखड़ जाने से यह गड्ढा अब और खतरनाक हो गया है। दोपहिया वाहनों के मडगार्ड तक इस गड्ढे में टकराकर टूट जाते हैं। ट्रैफिक रफ्तार से न गुजर पाने की वजह से जाम जैसी स्थिति भी बनी रहती है।

पराग फैक्टरी के बाहर हाईवे पर रेत-बजरी का कारोबार

पराग फैक्टरी के बाहर करीब एक किलोमीटर की लंबाई में हाईवे के किनारे रेत-बजरी का कारोबार करने वालों ने घेर रखी है। यहां दिनभर गाड़ियों से अनलोडिंग होने की वजह से सड़कों पर रेत और बजरी फैलती रहती है। इससे हादसे होने की आशंका भी काफी है। कई बार बाइक सवार यहां गिरते भी हैं लेकिन न अवैध कारोबारियों पर इससे कोई फर्क पड़ता है न नगर निगम के अफसर सबक ले रहे हैं।

रामगंगा तिराहे पर तिरछा बना डिवाइडर हादसों की वजह

बदायूं रोड पर रामगंगा तिराहे पर डिवाइडर के बीच लंबा कट है जिसके दोनों तरफ डिवाइडर के सिरे आमने-सामने होने के बजाय काफी तिरछे हैं। यहां ड्राइवर से जरा सी चूक होते ही अक्सर वाहन डिवाइडर से टकरा जाते हैं। शुक्रवार को ही एक ट्रक डिवाइडर से टकराकर उसके ऊपर चढ़ गया। पहले से टूटा डिवाइडर और ज्यादा क्षतिग्रस्त हो गया। ट्रक लोड होने की वजह से उसका एक्सेल टूट गया है जिसकी वजह से दो दिन बाद भी उसे डिवाइडर से हटाया नहीं जा सका है। वाहनों को भी दूसरी ओर से निकाला जा रहा है।

रामगंगा पुल से ऊपर निकला लोहे का एंगल, हादसा होने का खतरा

रामगंगा पुल पर चढ़ने से पहले ही पुलिस चौकी के सामने सड़क पर कई गड्ढे हैं। पुल पर लोहे का एक एंगल टूटकर ऊपर की ओर निकल आया है। गाड़ियों के निकलने पर वह हिलता है। कुछ डामर भी निकलकर नीचे गिर गया है। किसी ने डामर निकलने से हुए गड्ढे में ईंट का टुकड़ा फंसा दिया है। इससे अभी वहां छेद बड़ा नहीं हुआ है। समय पर मरम्मत नहीं हुई तो वह लोहे का एंगल खतरनाक हो सकता है।

बरेली से बदायूं तक झाड़ियों में छिपे अलर्ट के लिए लगाए गए बोर्ड

बरेली से बदायूं तक सड़क के दोनों ओर लगाए गए ज्यादातर संकेतक बोर्ड झाड़ियों के पीछे छिप जाने की वजह से वाहन चालकों को दिखाई ही नहीं देते हैं। इससे सड़क पर घुमाव और स्पीड ब्रेकर का अंदाजा भी नहीं हो पाता और हादसों का डर बना रहता है। झाड़ियां सड़क के किनारे तक आ गई हैं। कहीं-कहीं झाड़ियों से सड़क का कुछ हिस्सा तक दब गया है। इसके साथ बरेली से बदायूं तक किसी भी डिवाइडर पर रिफ्लेक्टर नहीं हैं। कई जगह डिवाइडर दुर्घटनाओं से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। अंधेरे में सड़क पर डिवाइडर ठीक से दिखते भी नहीं।

बदायूं के आगे अधूरा बना हाईवे और भी खतरनाक

बदायूं। शहर से होकर गुजरने वाले बरेली मथुरा हाईवे की हालत भी काफी चिंताजनक है। लालपुल से होकर मेडिकल कॉलेज के आगे तक कहीं सड़क पूरी बनी है तो कहीं आधी बनाकर छोड़ दी गई है। सड़क पर गड्ढे भी हैं। हालांकि गड्ढे कहीं-कहीं ही है। लेकिन रोड पर और भी मुश्किलें हैं। सड़क कहीं इतनी धंस गई है कि वह खाई की तरह दिखती है तो कहीं बीच रोड पर खंभा गड़ा है। ऐसे में रात में चलने के लिए यह रोड बिल्कुल सुरक्षित नहीं कहा जा सकता। तेज गति से चलने वाले वाहनों के लिए यह अक्सर एक अंधे मोड़ जैसा साबित हो जाता है और इससे उनकी जान तक पर बन आती है। वहीं, आधी अधूरी बनी सड़क पर लोगों का चलना मुश्किल है। संवाद

कहीं घोटाले की जांच होने से पहले ही न उखड़ जाए बदायूं फोरलेन

बरेली। 280 करोड़ से हुए बदायूं फोरलेन के निर्माण में पुरानी सड़क का मलबा इस्तेमाल कर करोड़ों का गोलमाल किए जाने की जांच कई साल बाद भी पूरी नहीं हो पाई है। हाल ही में शासन के दोबारा इस घोटाले की जांच का आदेश दिए जाने के बाद फोरलेन निर्माण के रिकॉर्ड तलब किए गए थे लेकिन अब फिर जांच जहां के तहां रुकी पड़ी है।

स्टेट हाईवे 33 पर 2016-17 में 280 करोड़ की लागत से बरेली-बदायूं फोरलेन का निर्माण कराया गया था। पीडब्ल्यूडी ने इसका कॉन्ट्रैक्ट पीएनसी इन्फ्राटेक नाम की कंपनी को दिया था। मई 2018 में एक शिकायत के बाद पीएमओ ने इस सड़क के निर्माण में हुए गोलमाल की जांच का आदेश दिया लेकिन पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने जांच में भी लीपापोती कर दी। आरोप यह भी था कि फोरलेन प्रोजेक्ट का एस्टीमेट 244 करोड़ रुपये का होने के बावजूद पीएनसी को 280 करोड़ का भुगतान कर दिया गया। शासन में शिकायत के बावजूद जांच न होने के बाद यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। हाईकोर्ट ने जांच का आदेश दिया तो एक बार फिर यह प्रक्रिया नए सिरे से शुरू की गई लेकिन इसके बावजूद जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है।
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