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Bareilly News: झुमका-सुरमा ने दिया दगा, अब बूटियों से वफा की उम्मीद

Mon, 13 Mar 2023 01:48 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 13 Mar 2023 01:48 AM IST
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Jhumka-surma betrayed, now expect loyalty from booties
बरेली। झुमका गिरा रे... मेरा साया फिल्म का गीत भले ही देश-दुनिया में बरेली की पहचान हो, पर जीआई (जिओग्राफिकल इंडिकेटर) टैग में इसने दगा दे दिया। यहां का सुरमा भी लोकप्रिय है, मगर इसकी मौलिकता पर संशय है। खाद्य पदार्थों में ज्यादातर की टैगिंग दूसरे जिले में हो चुकी है। ऐसे में अब अफसर ऐसी जड़ी-बूटियों की तलाश में हैं जो जिले की पहचान बन सकें।
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पिछले साल जीआई टैग के लिए सभी जिलोें को आवेदन करने के निर्देश शासन से जारी हुए थे। बरेली से किसी संगठन ने आवेदन नहीं किया तो जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र को जीआई टैग के लिए उत्पाद खोजने को कहा गया। प्राथमिकता बरेली के झुमके को दी गई। अधिकारियों के मुताबिक बरेली में झुमके का उत्पादन नहीं होता, न ही यहां इसका कोई बड़ा कारोबार है। महज गीतों में ही बरेली के झुमके का जिक्र है, वह गीत भी बरेली के किसी गीतकार द्वारा नहीं लिखा गया था। ऐसे में झुमके का प्रस्ताव अटक गया।
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इसके बाद सुई सुरमे पर टिकी, पर इसकी मौलिकता आदि पर संशय होने से मामला अटक गया। फिर खाद्य पदार्थों को लेकर मंथन शुरू हुआ, पर कामयाबी नहीं मिली। जरी-जरदोजी, बांस-बेंत के फर्नीचर आदि की मौलिकता भी संशय के घेरे में है। अब अफसर जड़ी-बूटियों की टैगिंग कराने के प्रयास में हैं।
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खोज रहे महाभारत काल की जड़ी-बूटियां

प्राचीन काल में बरेली पांचाल राज्य का हिस्सा था। ऐसे में संभावना है कि उस दौरान की प्रसिद्ध जड़ी-बूटियों का अब भी प्रयोग हो रहा हो। इसकी पुष्टि के लिए धार्मिक संगठन और धर्मगुरुओं से सहयोग लिया जा रहा है। संयुक्त आयुक्त उद्योग ऋषि रंजन गोयल के मुताबिक फिलहाल जड़ी-बूटियों समेत अन्य उत्पाद खोजने का प्रयास किया जा रहा है। अभी तक सफलता नहीं मिल सकी है।




कैसे मिलता है जीआई टैग

जीआई टैग यानी भौगोलिक संकेतक, उस उत्पाद को मिलता है जो क्षेत्र की पहचान हो। इसमें खेती, हैंडीक्राफ्ट, खाद्य सामग्री सहित अन्य उत्पाद शामिल हो सकते हैं। जीआई टैग के लिए संबंधित उत्पाद की एसोसिएशन, प्रशासन या अन्य संगठन द्वारा आवेदन कंट्रोलर जनरल ऑफ पेटेंट्स, डिजाइन एंड ट्रेड मार्क्स (सीजीपीडीटीएम) के कार्यालय में करना होता है। उन्हें टैग क्यों दिया जाए, इसके प्रमाण समेत ऐतिहासिक विरासत, मौलिकता बतानी होती है। साक्ष्य और तर्कों के परीक्षण के बाद उसे टैग मिलता है। टैग मिलने के बाद संबंधित उत्पाद की ख्याति देश-दुनिया में पहुंचती है। मांग, कारोबार बढ़ता है।
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