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बरेली में कम नहीं है जपानी इंसेफेलाइटिस का खतरा

Mon, 24 Aug 2015 01:45 AM IST
बरेली
बरेली Updated Mon, 24 Aug 2015 01:45 AM IST
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बरेली। पूर्वांचल में कहर बरपा रहा जापानी इंसेफेलाइटिस पश्चिम में भी अपने पांव पसार सकता है। बात अपने शहर की करेें तो बीमारी फैलने के लिए उसे जैसा माहौल चाहिए वह बरसात के मौसम में यहां मिल रहा है। कूड़े का ढेर और सुअर जापानी इंसेफेलाइटिस के प्रमुख कारक हैं। बरसात में इनसे पनपने वाले मच्छराें की वजह से यह बिमारी फैलती है। स्वास्थ्य विभाग ने एहतियात के तौर नगर निगम को पत्र भी जारी किया है। लेकिन सावधानी जरूरी है।
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ये हैं इलाके जहां मंडरा रहा खतरा
बाकरगंज- सबसे मलिन इलाका। कूड़े का ढेर और उसमें से उठती दुर्गंध। बरसात में पानी से पूरा इलाका बजबजा रहा है, मच्छराें की भरमार है। यहां सुअर सबसे ज्यादा घूमते हैं। पानी की सप्लाई भी दूषित है। तीन बच्चे डायरिया से बीमार होकर जिला अस्पताल में भर्ती हैं।
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प्रेमनगर- यहां मुख्य सड़क तो साफ है, लेकिन अंदर के इलाकाें में काफी गंदगी है। सुअराें की संख्या अधिक है। भूड़ और माधोबाड़ी में पानी का जलभराव और उसमें पनप रहे मच्छर बीमारी फैला सकते हैं। यहां सुअर के बाड़े घरों के आसपास हैं।
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जाटवपुरा- इस इलाके में खुलेआम सुअर घूमते हैं। नालाें में कूड़ा बजबजा रहा है और बरसात के चलते पानी भी भरा है। सुअर के बाड़े घराें के आसपास ही बने हैं।
इनमें भी कम नहीं खतरा
नवादा, हजियापुर, माधोबाड़ी, सिकलापुर, कालीबाड़ी, मॉडल टाउन के पीछे, संजयनगर, डेलापीर, सुभाषनगर, मड़ीनाथ, नेकपुर, कटरा चांद खां, आजाद नगर, बदायूं रोड की कई कालोनियां।

बरेली मंडल में शुरू हुआ जेई का टीकाकरण
बरेली में जापानी इंसेफे लाइटिस के मामले मिलने के बाद ही पिछले साल से जेई का टीका नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया गया है। हर बच्चे को इसे लगाना है। कुंवरटांडा में 2010 को एक बच्ची में जेई पाया गया था। बरेली के अलावा शाहजहांपुर और पीलीभीत में भी पिछले माह से जेई टीकाकरण शुरू किया गया है।
 इस तरह होता है जापानी इंसेफेलाइटिस
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय यादव ने बताया कि जापानी इंसेफेलाइटिस सुअर और गंदगी से फैलता है। पक्षियाें को काटने के बाद मच्छर सुअर को काटते हैं तो उनमें खतरनाक वायरस जाते हैं। सुअर की प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है इसलिए उसे फर्क नहीं पड़ता। यही मच्छर अगर सुअर को काटने के बाद मनुष्य को काटे तो उसे जेई होगा। रोगी से अन्य को जेई नहीं होता।


- जेई के लक्षण
दिमाग में सूजन, तेज बुखार, शरीर में चकत्ते, प्लेटलेट्स का लगातार कम होना, डायरिया, उल्टी और दस्त

- बचाव
घराें के आसपास सुअर को न पालें
पानी का जमाव न होने दें
गंदगी में चूने या ब्लीचिंग का छिड़काव करें
नगर निगम से कहकर दवा छिड़कवाएं
जेई का टीका बच्चों को जरूर लगवाएं

वर्जन--
‘बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, इसलिए उनमें जेई होने की संभावना अधिक है। बरेली में अभी इस तरह का माहौल नहीं है कि यहां जेई फैले। लेकिन एहतियात के तौर पर नगर निगम को दवा का छिड़काव करने और ग्राम पंचायताें को सफाई करवाने को कहा है। लोग सुअर को अपने घरों व आसपास से दूर रखें। बच्चों को जेई का टीका जरूर लगवाएं।’ -डॉ. विजय यादव, सीएमओ
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