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तो आदेश गूजर करा रहा है सबकी जमानत
बरेली
Updated Sat, 07 Feb 2015 01:41 AM IST
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क्राइम ब्रांच को बैग में मिले शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर राघवेंद्र सिंह का पता तो मिल गया, लेकिन बाकी लड़कों का पता लगाने में पुलिस को अभी तक सफलता नहीं मिल पाई है। हैरानी की बात यह है कि फर्जीवाड़ा करके लड़कों को सेना में भर्ती कराने वाला मास्टर माइंड आदेश गूजर उनकी जमानत कराने आया था। वह अपने गुर्गों के साथ यहीं ठहरा। अधिवक्ताओं के संपर्क में रहकर जमानत के कागज भी उसी ने अपने गुर्गों के जरिये तैयार कराए थे। विवेचना को गंभीरता से लेकर आरोपियों की जमानत कराने के लिए कचहरी में घूम रहे लोगों की निगरानी कराई जाती तो आदेश आसानी से पकड़ा जाता, लेकिन पुलिस ने ध्यान नहीं दिया। विवेचना में ढील की वजह से कोर्ट ने फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए सेना में एंट्री करने के आरोपियों को जमानत तो दे दी, लेकिन शर्त ऐसी रखी है कि उनकी रिहाई आसान नहीं है। शर्त यह है कि 50-50 हजार रुपये के दो जमानतियों में एक परिवार का होना जरूरी है। परिवार में पिता के अलावा भाई और चाचा, ताऊ शामिल हो सकते हैं। अदालत की इस शर्त ने आरोपियों के परिवार वालों को परेशानी में डाल दिया है। वह कोर्ट में जमानत के लिए कागज दाखिल करने के कतरा रहे हैं। किसी ने भी फर्जी कागज तैयार कराकर जमानत कराने की कोशिश की तो सत्यापन में उनका फंसना तय है। थाना भमौरा के कटका रमन गांव के राघवेंद्र का पता असली है, इसलिए उसकी जमानत के लिए दो जमानतदारों के कागजात कोर्ट में दाखिल किए गए हैं। इनमें एक जमानती राघवेंद्र के पिता शिववीर सिंह और दूसरे उसी गांव के आशुतोष सिंह हैं। परिचय पत्र की जगह फोटो पहचान पत्र लगाया गया है। न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कक्ष संख्या पांच ने जमानतियों के कागजात तहसील व थाना भमोरा को सत्यापन के लिए भेजे हैं।
ऐसे हुई कार्रवाई
30 दिसंबर 2014 को कर्नल राजीव दीक्षित ने फर्जीवाड़ा करके सेना में भर्ती होने वाले 11 युवकों को कैंट पुलिस को सौंपा था। इनमें विश्वेंद्र कुमार, संदीप सिंह, राहुल सिंह, श्याम सिंह, राघवेंद्र उर्फ रिंकू, सुमित कुमार, सचिन कुमार, रोहित शर्मा, अमर यादव, अरुण कुमार और सन्नी दियोल शामिल हैं। कैंट पुलिस ने मुकदमा दर्ज सभी को जेल भेजा था। इसकी विवेचना थाना कैंट के दरोगा रामरतन यादव को दी गई थी, जो मामले को लटकाए रहे। एसएसपी के आदेश पर अब क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर अजय चौहान विवेचना कर रहे हैं।
ऐसे हुई कार्रवाई
30 दिसंबर 2014 को कर्नल राजीव दीक्षित ने फर्जीवाड़ा करके सेना में भर्ती होने वाले 11 युवकों को कैंट पुलिस को सौंपा था। इनमें विश्वेंद्र कुमार, संदीप सिंह, राहुल सिंह, श्याम सिंह, राघवेंद्र उर्फ रिंकू, सुमित कुमार, सचिन कुमार, रोहित शर्मा, अमर यादव, अरुण कुमार और सन्नी दियोल शामिल हैं। कैंट पुलिस ने मुकदमा दर्ज सभी को जेल भेजा था। इसकी विवेचना थाना कैंट के दरोगा रामरतन यादव को दी गई थी, जो मामले को लटकाए रहे। एसएसपी के आदेश पर अब क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर अजय चौहान विवेचना कर रहे हैं।
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