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धोखाधड़ी के मामले में बिल्डर जगमोहन गिरफ्तार, जेल भेजा
बरेली
Updated Sun, 24 Dec 2017 01:30 AM IST
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आशुतोष सिटी के प्लाट बेचने में धोखाधड़ी करने के आरोपी बिल्डर जगमोहन सिंह को इज्जतनगर थाना पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसे सीजेएम कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया। एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने बताया कि बिल्डर को गैंगस्टर एक्ट में निरुद्ध करने की कार्रवाई की जा रही है। इधर, पुलिस ने भूमाफिया की नई सूची में जगमोहन और उसके बेटे सचिन का नाम भी दर्ज कर लिया है।
एटा के विजयनगर के मनोज शर्मा ने बिल्डर जगमोहन सिंह के खिलाफ 16 मार्च, 2017 को इज्जतनगर थाने में कूटरचित दस्तावेज के जरिये धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि मनोज ने पीलीभीत रोड स्थित आशुतोष सिटी में प्लॉट नंबर अ-87 जगमोहन से खरीदा था। इसकी रजिस्ट्री 23 अगस्त, 2001 को हुई थी। मनोज ने 2015 में जगमोहन से प्लॉट की पैमाइश कराने के लिए कहा तो उसने अपने बेटे सचिन को रजिस्ट्री की फोटोकॉपी देकर पैमाइश कराने की बात कही। कई बार चक्कर कटाने के बाद भी रजिस्ट्री नहीं होने पर तत्कालीन एसपी सिटी समीर सौरभ से भी शिकायत की गई। इसके बाद डीजीपी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई गई। डीजीपी कार्यालय से एसएसपी कार्यालय को जांच सौंपी गई। जांच में सामने आया कि बिल्डर ने फर्जी तरीके से प्लॉट बेचा है। मनोज ने बताया कि 2015 में रजिस्ट्री मिसप्लेस होने के कारण उन्होंने दोबारा रजिस्ट्री कार्यालय में डुप्लीकेट रजिस्ट्री 19 मई, 2016 को निकलवाई तो सामने आया कि पॉवर ऑफ एटार्नी सेवाराम, लोचन सिंह, इतवारी लाल, ओम प्रकाश, रामचंद्र निवासीगण बिहारमाननगला के नाम थी, उन्होंने 2001 मेें बिल्डर जगमोहन के नाम पर रजिस्ट्री कार्यालय में दर्ज कराई थी। उनकी शिकायत के बावजूद कभी भी बिल्डर जगमोहन अधिकारियों के कार्यालय नहीं आया, जबकि दूसरे पक्ष के लोग आते रहे। बिल्डर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के बाद इज्जतनगर थाने के दारोगा वेदपाल सिंह ने शनिवार को उसे फीनिक्स माल के पास से गिरफ्तार कर लिया।
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एटा के विजयनगर के मनोज शर्मा ने बिल्डर जगमोहन सिंह के खिलाफ 16 मार्च, 2017 को इज्जतनगर थाने में कूटरचित दस्तावेज के जरिये धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि मनोज ने पीलीभीत रोड स्थित आशुतोष सिटी में प्लॉट नंबर अ-87 जगमोहन से खरीदा था। इसकी रजिस्ट्री 23 अगस्त, 2001 को हुई थी। मनोज ने 2015 में जगमोहन से प्लॉट की पैमाइश कराने के लिए कहा तो उसने अपने बेटे सचिन को रजिस्ट्री की फोटोकॉपी देकर पैमाइश कराने की बात कही। कई बार चक्कर कटाने के बाद भी रजिस्ट्री नहीं होने पर तत्कालीन एसपी सिटी समीर सौरभ से भी शिकायत की गई। इसके बाद डीजीपी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई गई। डीजीपी कार्यालय से एसएसपी कार्यालय को जांच सौंपी गई। जांच में सामने आया कि बिल्डर ने फर्जी तरीके से प्लॉट बेचा है। मनोज ने बताया कि 2015 में रजिस्ट्री मिसप्लेस होने के कारण उन्होंने दोबारा रजिस्ट्री कार्यालय में डुप्लीकेट रजिस्ट्री 19 मई, 2016 को निकलवाई तो सामने आया कि पॉवर ऑफ एटार्नी सेवाराम, लोचन सिंह, इतवारी लाल, ओम प्रकाश, रामचंद्र निवासीगण बिहारमाननगला के नाम थी, उन्होंने 2001 मेें बिल्डर जगमोहन के नाम पर रजिस्ट्री कार्यालय में दर्ज कराई थी। उनकी शिकायत के बावजूद कभी भी बिल्डर जगमोहन अधिकारियों के कार्यालय नहीं आया, जबकि दूसरे पक्ष के लोग आते रहे। बिल्डर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के बाद इज्जतनगर थाने के दारोगा वेदपाल सिंह ने शनिवार को उसे फीनिक्स माल के पास से गिरफ्तार कर लिया।
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