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Bareilly : खेत पी रहे 70% पानी, मात्र 2 फीसदी से बुझ रही प्यास; आईवीआरआई के वैज्ञानिकों ने शोध में किया दावा
Mon, 26 May 2025 06:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अजीत प्रताप सिंह, बरेली
अजीत प्रताप सिंह, बरेली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 26 May 2025 06:55 AM IST
सार
डॉ. हरिओम के मुताबिक, पृथ्वी पर मौजूद 97% पानी खारा है। शेष तीन में 2.5% पानी बर्फ के रूप में है। मनुष्य, पशु आदि जीवों के लिए सिर्फ 0.5% पानी उपलब्ध है। इसलिए भूजल का संरक्षण बेहद जरूरी है।
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विस्तार
भूगर्भ जल के दोहन की स्थिति चिंताजनक है। कृषि कार्यों में करीब 70% भूजल का इस्तेमाल हो रहा है। 22% पानी उद्योग पी रहे हैं। 8% का इस्तेमाल घरेलू कार्यों में हो रहा है। इसमें से 2% से भी कम पानी से हमारी प्यास बुझ रही है।
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विकसित देशों में 11% पानी का इस्तेमाल घरेलू कार्यों में होता है। वहां उद्योगों में सर्वाधिक 59 तो कृषि कार्यों में 30% पानी का इस्तेमाल होता है। यह दावा भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान आईवीआरआई के वैज्ञानिकों ने अपने शोध में किया है।
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आईवीआरआई के पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हरिओम पांडेय के मुताबिक, विकसित देशों में ड्रिप और स्प्रिंकलर तकनीक से फसलों की सिंचाई की जाती है। इसलिए वहां कृषि क्षेत्र में पानी की खपत कम होती है। किसानों को यह समझना होगा कि कृषि कार्यों और पशुधन उत्पादन (दूध, मांस) के साथ ही, भूजल का संरक्षण भी जरूरी है। इस अध्ययन में दूसरे देशों में हुए शोध का भी संदर्भ लिया गया है।
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जल संकट से निपटने में कारगर साबित होगा शोध
डॉ. हरिओम के मुताबिक, पृथ्वी पर मौजूद 97% पानी खारा है। शेष तीन में 2.5% पानी बर्फ के रूप में है। मनुष्य, पशु आदि जीवों के लिए सिर्फ 0.5% पानी उपलब्ध है। इसलिए भूजल का संरक्षण बेहद जरूरी है। आईवीआरआई निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त के मुताबिक, जल संकट से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर अभियान चल रहे हैं। शोध रिपोर्ट नीति निर्माताओं के लिए आधार बन सकती है। किसानों, वैज्ञानिकों को मिलकर जल संरक्षण के उपाय खोजने होंगे।
एक लीटर दूध के लिए खपा रहे 850 ली. पानी
डॉ. हरिओम के मुताबिक, दूध उत्पादन में पानी के प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष इस्तेमाल का पता लगाने के लिए बीते वर्ष शोध शुरू हुआ था। पशुधन उत्पादन इकाइयों के आकलन में पता चला कि एक किलो दूध उत्पादन के लिए औसतन 850 लीटर पानी का इस्तेमाल हो रहा है। पानी की ये मात्रा अप्रत्यक्ष रूप से उनके आहार उत्पादन, रखरखाव में इस्तेमाल होती है। करीब 91% पशु चारा, 2% सफाई, 5% नहलाने में और 0.50% मिल्क पार्लर में खर्च होता है।