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आईवीआरआई ने बनाया इतिहास: सात गाय-भैंस में टेस्ट ट्यूब भ्रूण प्रत्यारोपण सफल, पशुधन में क्रांति की उम्मीद

Sun, 13 Jul 2025 12:58 PM IST
श्याम जी. अजीत प्रताप सिंह, अमर उजाला, बरेली
अजीत प्रताप सिंह, अमर उजाला, बरेली Published by: श्याम जी. Updated Sun, 13 Jul 2025 12:58 PM IST
सार

भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) ने पहली बार सात गाय-भैंस में टेस्ट ट्यूब भ्रूण प्रत्यारोपण में सफलता हासिल की। ओपीयू-आईवीएफ तकनीक से उन्नत नस्ल के पशुओं का जन्म संभव होगा, जिससे दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा। यह उपलब्धि पशुधन क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम मानी जा रही है।

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IVRI got success in transplanting test tube embryo into womb of surrogate cow and buffalo
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के वैज्ञानिकों ने पहली बार एक साथ सात गाय-भैंस में टेस्ट ट्यूब भ्रूण को सेरोगेट मदर (गाय-भैंस) में सफल प्रत्यारोपण में कामयाबी हासिल की है। गर्भाधान काल पूरा होने पर सात टेस्ट ट्यूब बेबी का जन्म होगा। वैज्ञानिक इस उपलब्धि को पशुधन की उन्नत नस्ल विकास में क्रांतिकारी कदम मान रहे हैं। 

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पशु पुनरुत्पादन विभाग के वैज्ञानिक डॉ. ब्रजेश कुमार के मुताबिक, उत्तर भारत में पहली बार पांच साहीवाल और एक थारपरकर गाय में लैब में विकसित कृत्रिम भ्रूण का सफल प्रत्यारोपण हुआ है। भैंस में सीआरबी और पंतनगर के बाद अब आईवीआरआई को सफलता मिली है। लैब में दो माह पूरा होने के बाद विकसित सातों भ्रूण को सेरोगेट गाय-भैंस में प्रत्यारोपित किया है। गाय का सात माह और भैंस का नौ माह बाद टेस्ट ट्यूब बेबी का जन्म होगा। इसके प्रति वैज्ञानिक उत्साहित हैं।
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आईवीआरआई ने वर्ष 2018 में शोध शुरू किया था
बताया कि पशुओं में भ्रूण प्रत्यारोपण के लिए आईवीआरआई ने वर्ष 2018 में शोध शुरू किया था। तब सुपर ओवलेशन मेथड से मादा के जननांग में ही भ्रूण बनाकर उसे सात दिन बाद सेरोगेट मदर में प्रत्यारोपित करते थे। इसके जरिए आईवीआरआई में 30 साहीवाल नस्ल के बच्चे पैदा हुए, जिसमें 23 बच्चे संस्थान के डेयरी फार्म में और सात बाहरी डेयरी फार्म में पैदा किए। 

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शोध करते हुए - फोटो : अमर उजाला

वर्ष 2022 में टेस्ट ट्यूब बेबी के लिए शुरू हुआ शोध 
वर्ष 2022 में ओपीयू (ओवम पिकअप) आईवीएफ (इन विट्रो फर्टीलाइजेशन) पर शोधकार्य शुरू हुआ। बीते तीन वर्ष में क्रमिक परीक्षण के बाद जुलाई 2025 में सात आईवीएफ भ्रूण को सेरोगेट मदर में गर्भधारण में सफलता मिली है। बताया कि ओपीयू तकनीक में पशु से परिपक्व अंडाणु एकत्र कर उसे प्रयोगशाला में कृत्रिम रूप से शुक्राणु से निषेचित करते हैं। प्राप्त भ्रूणों को सेरोगेट पशु के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है।

साल में एक नहीं करीब 10 से 20 पशु का होगा जन्म
सामान्य प्रजनन प्रक्रिया से गाय, भैंस वर्ष में सिर्फ एक बार ही गर्भधारण कर सकती हैं पर ओपीयू आईवीएफ तकनीक से एक भैंस से साल में करीब दस और गाय के करीब 20 उन्नत नस्ल के पशु का जन्म होगा। बताया कि प्रक्रिया में उच्चतम गुणवत्ता के भ्रूण तैयार होते हैं, जिसे कम दूध देने वाली सेरोगेट मदर गाय-भैंस में प्रत्यारोपित करते हैं। 
 
उन्नत नस्ल के विकास से किसानों को होगा फायदा
वैज्ञानिक के मुताबिक, अगर किसान या पशुपलाकों के पास उन्नत नस्ल का पशु है तो उसका भ्रूण लैब में तैयार करेंगे। जिसे उनके सेरोगेट मदर में ट्रांसफर करेंगे। वहीं, उनकी मांग पर लैब में संरक्षित भ्रूण को भी प्रत्यारोपित कर देंगे। इससे उन्नत नस्ल के पशु का जन्म होगा। टेस्ट ट्यूब बेबी के भी दूध देने की क्षमता भ्रूण देने वाली पशु के सापेक्ष होगी। इससे नस्ल सुधार की प्रक्रिया तेज होगी। दुग्ध उत्पादन भी बढ़ेगा।

IVRI got success in transplanting test tube embryo into womb of surrogate cow and buffalo
आईवीआरआई - फोटो : अमर उजाला

शोध में ये रहे शामिल
आईवीआरआई डायरेक्टर डॉ. त्रिवेणी दत्त, शोध निदेशक डॉ. एसके सिंह के मार्गदर्शन, विभागाध्यक्ष डॉ. एमएच खान के निर्देशन में शोध टीम का नेतृत्व डॉ. ब्रजेश ने किया। इसमें वैज्ञानिक डॉ. विक्रांत चौहान, डॉ. एमके पात्रा, डॉ. अनुज चौहान का योगदान रहा। शोध छात्र डॉ. प्रदीप, डॉ. मनोज, डॉ. मोहन, डॉ. रेनू, डॉ. उत्तम, डॉ. चिन्मय, डॉ. दिव्यांशु, डॉ. पूजा, डॉ. विष्णु, डॉ. दीक्षा, डॉ. गौरी, डॉ. पूनम का सहयोग रहा।

पशुओं के टेस्ट ट्यूब बेबी के लिए भ्रूण प्रत्यारोपण की सफलता संस्थान के वैज्ञानिकों की अथक मेहनत, अत्याधुनिक तकनीकों के प्रयोग का परिणाम है। हमारा लक्ष्य देश के पशुपालकों तक इस तकनीक को पहुंचाना और पशुधन क्षेत्र में क्रांति लाना है। - डॉ. त्रिवेणी दत्त, डायरेक्टर, आईवीआरआई

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