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Bareilly News: अपंग पशु भी अब चल-फिर सकेंगे, आईवीआरआई के वैज्ञानिकों ने बनाया कृत्रिम पैर

Thu, 02 Feb 2023 11:07 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 02 Feb 2023 11:07 AM IST
सार

भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के वैज्ञानिक ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वैज्ञानिकों ने पशुओं के लिए कृत्रिम पैर बनाया है। यह कृत्रिम पैर अपंग पशुओं को निशुल्क लगाए जाएंगे। 

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IVRI Bareilly scientists made artificial legs for animals
घायल गोवंश को लगा कृत्रिम पैर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हादसे या बीमारी से पशु का पैर कट जाए तो वे चलने-फिरने में असमर्थ हो जाते हैं। भोजन के अभाव में धीरे-धीरे कमजोर होते जाते हैं। ऐसे में डेयरी संचालक, किसान या अन्य पशु प्रेमियों के लिए भी अपंग पशु बोझ होते हैं। इस तकलीफ से अब पशुओं को छुटकारा दिलाने के लिए बरेली के आईवीआरआई पॉली क्लीनिक के वैज्ञानिकों ने कृत्रिम पैर तैयार किया है। इसका परीक्षण भी सफल रहा।

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भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) रेफरल वेटरनरी पॉलीक्लिनिक प्रभारी प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अमरपाल सिंह ने बताया कि पिछले साल नवंबर में ऑल इंडिया नेटवर्क प्रोग्राम ऑन डायग्नोसिस इमेजिंग मैनेजमेंट ऑफ सर्जिकल कंडीशन इन एनीमल प्रोजेक्ट के तहत पशुओं के कृत्रिम पैर लगाने को लेकर रिसर्च शुरू हुआ था।

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ये वैज्ञानिक रहे शामिल

प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अमरपाल सिंह नेतृत्व में हुई रिसर्च में सर्जरी विभाग की टीम के वैज्ञानिक डॉ. रोहित, डॉ. अभिषेक, डॉ. अभिजीत पावड़े शामिल रहे। इसके लिए हाई डेंसिटी पॉली थाइमीन, सीमेंट आदि उपकरण मंगाए गए। जैसे-जैसे रिसर्च आगे बढ़ी खामियां पता चलती रहीं और उसे दूर करते रहे।

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IVRI Bareilly scientists made artificial legs for animals
घायल गोवंश को लगा कृत्रिम पैर - फोटो : अमर उजाला

उन्होंने बताया कि एचडीपीई प्लास्टिक का सर्वाधिक मजबूत स्वरूप है। इसका प्रयोग करने की वजह थी कि बड़े पशुओं का भार अधिक होता है। ऐसे में कृत्रिम पैर पशु का भार वहन कर सके और बाद में उन्हें किसी तरह से कोई दिक्कत न हो। धातु का प्रयोग करने से जंग लगने से अन्य रोग और संबंधित धातु से घाव होने की आशंका रहती है। एचडीपीई मंगाकर उसे 185 डिग्री तापतान में पिघलाकर पैरों का आकार दिया गया।

हादसे में घायल गोवंश को लगा कृत्रिम पैर

वैज्ञानिक डॉ. रोहित के मुताबिक पिछले दिनों बरेली शहर के गणेश नगर मोहल्ले के रहने वाले प्रियांशु पाठक ने हादसे में घायल एक गोवंश को भर्ती कराया था। घाव बेहद गंभीर था और पांव सड़ रहा था। लिहाजा, उसे बचाने के लिए पीछे की ओर का एक बायां पैर काटना पड़ा। 

कृत्रिम पैर को लगाने के बाद घुटने के पास और खुर के पास सॉकेट से फंसाया गया। चलाकर देखा गया तो स्थिति ठीक मिली। लेकिर गोवंश कृत्रिम पैर से तालमेल नहीं बिठा पा रही थी। ऐसे में करीब 15 दिनों से प्रशिक्षित किया जा रहा था। लिहाजा, अब गोवंश कृत्रिम पैर के साथ चलने लगा है। 

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