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Bareilly News: आईटीआर फैक्टरी लोगों ने सीएम से लगाई मदद की गुहार
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बरेली। बंद हो चुकी आईटीआर फैक्टरी के आवासों में रह रहे स्वैच्छिक सेवाविृत्त कर्मचारियों ने प्रशासन पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। रविवार को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार और सांसद संतोष गंगवार को सौंपा है। इसमें मदद की गुहार लगाई है।
कॉलोनी निवासी पीसी पाठक ने बताया कि वर्ष 2004 में फैक्टरी बंद होने पर कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्त दे दी गई थी। ऐसे में वेतन बकाया भुगतान करना होता है। आरोप है कि नियमों को धता बताते हुए प्रशासन ने आवास खाली करने का नोटिस दिया था। कर्मचारी हाईकोर्ट पहुंचे तो कोर्ट ने स्थगन आदेश देते हुए मूलभूत सुविधा मुहैया कराने के लिए कहा। मगर कंपनी प्रबंधन बिजली काट देते हैं। बताया कि वे आवास की मरम्मत करा रहे हैं। पर प्रशासन ने आवास की फिजिबिलिटी आंकने के लिए पीडब्ल्यूडी को निर्देश दे दिए।
आरोप है कि टीम सर्वे के नाम पर परेशान कर रही है। आवास को निष्प्रयोज्य बताकर ध्वस्त कराने का प्रयास है। ताकि 94 परिवारों को बेघर किया जा सके। मुख्यमंत्री से प्रकरण में हस्तक्षेप कर कर्मचारियों की मदद का अनुरोध किया है। ज्ञापन देने वालों में चंद्रिका प्रसाद, मुकेश पांडेय, गीता तिवारी, दौलत राम, चंद्रपाल, सतीष बाबू समेत करीब दर्जन भर लोग शामिल रहे।
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डिप्टी कमिश्नर न्यायिक प्रीति जायसवाल का कहना है कि निवासियों के सभी आरोप बेबुनियाद और निराधार हैं। हाईकोर्ट के निर्देशानुसार आवासों के बिजली बकाया का भुगतान कर रहे हैं। पेयजल समेत मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। कई आवास जर्जर हैं। पीडब्ल्यूडी फिजिबिलिटी जांच रहा है। जिन्हें किसी गतिविधि पर आपत्ति है वे कार्यालय में संपर्क करें। समस्या का निस्तारण किया जाएगा।
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कॉलोनी निवासी पीसी पाठक ने बताया कि वर्ष 2004 में फैक्टरी बंद होने पर कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्त दे दी गई थी। ऐसे में वेतन बकाया भुगतान करना होता है। आरोप है कि नियमों को धता बताते हुए प्रशासन ने आवास खाली करने का नोटिस दिया था। कर्मचारी हाईकोर्ट पहुंचे तो कोर्ट ने स्थगन आदेश देते हुए मूलभूत सुविधा मुहैया कराने के लिए कहा। मगर कंपनी प्रबंधन बिजली काट देते हैं। बताया कि वे आवास की मरम्मत करा रहे हैं। पर प्रशासन ने आवास की फिजिबिलिटी आंकने के लिए पीडब्ल्यूडी को निर्देश दे दिए।
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आरोप है कि टीम सर्वे के नाम पर परेशान कर रही है। आवास को निष्प्रयोज्य बताकर ध्वस्त कराने का प्रयास है। ताकि 94 परिवारों को बेघर किया जा सके। मुख्यमंत्री से प्रकरण में हस्तक्षेप कर कर्मचारियों की मदद का अनुरोध किया है। ज्ञापन देने वालों में चंद्रिका प्रसाद, मुकेश पांडेय, गीता तिवारी, दौलत राम, चंद्रपाल, सतीष बाबू समेत करीब दर्जन भर लोग शामिल रहे।
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डिप्टी कमिश्नर न्यायिक प्रीति जायसवाल का कहना है कि निवासियों के सभी आरोप बेबुनियाद और निराधार हैं। हाईकोर्ट के निर्देशानुसार आवासों के बिजली बकाया का भुगतान कर रहे हैं। पेयजल समेत मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। कई आवास जर्जर हैं। पीडब्ल्यूडी फिजिबिलिटी जांच रहा है। जिन्हें किसी गतिविधि पर आपत्ति है वे कार्यालय में संपर्क करें। समस्या का निस्तारण किया जाएगा।