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ये तो अक्षर बिहार तालाब को पाटने में लग गए
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Fri, 08 Apr 2016 01:36 AM IST
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नाला बनाया
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सर्वोच्च न्यायालय भले ही तालाब पाटने को पूरी तरह प्रतिबंधित कर चुका है लेकिन शहर के तालाब बिल्डर हजम करते रहे। ताजा कड़ी में अक्षर बिहार तालाब की बारी है। प्रभावशाली बिल्डर ने नगर निगम से तीन साल के लिए तालाब लीज पर लिया और अब उसे पाटना शुरू कर दिया है। बिल्डर अब तक आठ सौ गज से ज्यादा जमीन पर कब्जा कर चुके हैं। नगर निगम ने बिल्डरों के फायदे के लिए बिना किसी प्रयोजन के 30 लाख रुपये लागत से तालाब के बीच से नाला बनवाना शुरू कर दिया है। यानी ये सरकारी पैसा उनकी सेवा में खर्च होगा जिन्हें सुंदरीकरण के नाम पर लाताब लीज पर दिया गया है। जहां तक नाला बनाया जा रहा है उसके आगे न तो पानी का निकास है और न ही नाले की कोई जरूरत है। ये नाल इसलिए बन रहा है कि उसके एक तरफ पूरी जमीन पर बिल्डर कालोनी बना कर बेच सके। जाहिर डील बड़े लोगों ने की होगी और डील भी बड़ी ही होगी। मामला नगर निगम बोर्ड में उठा भी लेकिन मामला रफादफा कर दिया गया।
अक्षर बिहार तालाब को डेढ़ साल पहले शहर के दो नामी ग्रुप के बिल्डरों ने लगभग 5.50 लाख की कीमत पर तीन साल के लिए अनुबंध पर लिया था। बताते हैं कि अनुबंध की शर्तों का पालन न करने पर बिल्डरों की जमा रकम जब्त कर ली गई लेकिन निगम की मिलीभगत से बिल्डरों का तालाब पर कब्जा है। बताया जाता है कि बिल्डरों को बदायूं के बड़े सपा नेता का संरक्षण प्राप्त है। दोनों बिल्डरों ने तालाब की आठ सौ गज से ज्यादा जमीन पाट ली जिसकी कीमत पांच करोड़ से अधिक है। वर्तमान में एक ओर बिल्डरों का काम चल रहा है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम ने बिल्डरों के फायदे के लिए तालाब और बिल्डर की जमीन के बीच में बिना किसी प्रयोजन के नाला निर्माण शुरू करा दिया। ठेकेदार गुलजार तेजी से नाला बनवा रहा है। प्रस्तावित नाले का पानी कहां जाएगा और सफाई कैसे होगी? इसका कोई जवाब नहीं। जहां नाला बन रहा है उसके दोनों ओर पानी है, यानी तालाब है। ये नजारा सब देख रहे हैं लेकिन नगर निगम प्रशासन ने आंखें मूंद ली हैं, मेयर खामोश हैं। मानचित्रकार तालाब की जमीन छुड़ाने के लिए नापजोख करने तक की जहमत नहीं उठा रहे हैं।
‘तालाब पानी से लबालब है। नगर निगम तालाब के बीच नाला बनवाकर कीमती जमीन पर कब्जा करने का रास्ता दे दिया है। कई बार नगर निगम बोर्ड में ये मामला उठाया लेकिन निगम ने तालाब से कब्जा नहीं हटाया है।’
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राजेश अग्रवाल, पार्षद सिविल लाइंस
‘अक्षर बिहार तालाब में नाला बनाया जा रहा है। पानी निकास कैंट में निकलेगा। बिल्डरों ने तालाब की जमीन लीज पर ले रखी है, इसलिए पाट रहे हैं।’
गयूर अहमद, एक्सईएन, नगर निगम
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अक्षर बिहार तालाब को डेढ़ साल पहले शहर के दो नामी ग्रुप के बिल्डरों ने लगभग 5.50 लाख की कीमत पर तीन साल के लिए अनुबंध पर लिया था। बताते हैं कि अनुबंध की शर्तों का पालन न करने पर बिल्डरों की जमा रकम जब्त कर ली गई लेकिन निगम की मिलीभगत से बिल्डरों का तालाब पर कब्जा है। बताया जाता है कि बिल्डरों को बदायूं के बड़े सपा नेता का संरक्षण प्राप्त है। दोनों बिल्डरों ने तालाब की आठ सौ गज से ज्यादा जमीन पाट ली जिसकी कीमत पांच करोड़ से अधिक है। वर्तमान में एक ओर बिल्डरों का काम चल रहा है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम ने बिल्डरों के फायदे के लिए तालाब और बिल्डर की जमीन के बीच में बिना किसी प्रयोजन के नाला निर्माण शुरू करा दिया। ठेकेदार गुलजार तेजी से नाला बनवा रहा है। प्रस्तावित नाले का पानी कहां जाएगा और सफाई कैसे होगी? इसका कोई जवाब नहीं। जहां नाला बन रहा है उसके दोनों ओर पानी है, यानी तालाब है। ये नजारा सब देख रहे हैं लेकिन नगर निगम प्रशासन ने आंखें मूंद ली हैं, मेयर खामोश हैं। मानचित्रकार तालाब की जमीन छुड़ाने के लिए नापजोख करने तक की जहमत नहीं उठा रहे हैं।
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‘तालाब पानी से लबालब है। नगर निगम तालाब के बीच नाला बनवाकर कीमती जमीन पर कब्जा करने का रास्ता दे दिया है। कई बार नगर निगम बोर्ड में ये मामला उठाया लेकिन निगम ने तालाब से कब्जा नहीं हटाया है।’
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राजेश अग्रवाल, पार्षद सिविल लाइंस
‘अक्षर बिहार तालाब में नाला बनाया जा रहा है। पानी निकास कैंट में निकलेगा। बिल्डरों ने तालाब की जमीन लीज पर ले रखी है, इसलिए पाट रहे हैं।’
गयूर अहमद, एक्सईएन, नगर निगम