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कहता है इस्लाम- मर्दों को कमजोर बनाता है जेवर
बरेली
Updated Tue, 23 Feb 2016 02:17 AM IST
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बरेली। धातु वाली वस्तु हर एक के लिए इस्लाम में हराम है। वह औरत हो या मर्द। सोना और चांदी औरत के जेवर में जायज है। जबकि मर्द के लिए यह भी हराम है क्योंकि जेवर इंसान को कमजोर बनाता है।
मुस्लिम धार्मिक विद्वान बताते हैं कि अंगूठी में जो सूरत निकाली गई है वह इसलिए कि पहले बादशाह, अमीर आदि स्तर के लोग जिस निशान से दस्तावेजों पर मोहर का इस्तेमाल करते थे। इसका कोई नाजायज इस्तेमाल (दुरुपयोग) न कर ले, इसलिए उसे वह अंगूठी बनाकर पहनने लगे। इसका नतीजा यह हुआ कि देखा देखी लोग शौकिया इस्तेमाल करने लगे। इसलिए इसके पहनने का रिवाज हो गया है और लोग सोने व चांदी की अंगूठियां पहनने लगे।
... अब चूंकि मौजूदा दौर में वैसी मोहर की जरूरत नहीं है क्योंकि मोहर दस्तयाब (उपलब्ध) है। फिलहाल मर्द के अंगूठी पहनने का जो रिवाज है वह साढ़े चार माशा का है। उसकी वजह यह है कि अंगूठी में नक्श शामिल कर लेते हैं। अब अगर कोई जीनत (शृंगार) के लिए पहनेगा तो जायज नहीं। जीनत के लिए औरतें सोने चांदी के जेवर इस्तेमाल कर सकती हैं क्योंकि उसको जीनत के लिए जेवर पहनना जायज है। जबकि मर्द के लिए जीनत जायज नहीं है। क्योंकि शरियत में उनके लिए यह नजायज है।
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- मौलाना डॉ. एजाज अंजुम, मदरसा मंजरे इस्लाम दरगाह आला हजरत।
ॎ मर्द का जेवर व जीनत तो उसकी बहादुरी और मेहनत है। जेवर और जीनत कमजोर बनाता है। इस्लाम में मर्द को आगे बढ़ाया गया है। उसे बहादुरी और मेहनत के लिए बनाया गया है। वह अपने मुल्क की हिफाजत कर सके, जंग लड़ सके, कारोबार और नौकरियां कर सके। मर्द जेवर और जीनत में पडे़गा तो वह कमजोर बनेगा और नजाकत पैदा होगी। ऐसे में वह अपने हिस्से की जिम्मेदारी पूरी नहीं कर सकेगा। इस लिए उसे जेवर तो क्या अंगू्ठी तक पहनने से मना किया गया है। यह हदीस का हुक्म है।
- मुफ्ती सगीर अहमद बरकाती, प्रधानाचार्य दारुल उलूम मजहरे इस्लाम मस्जिद बीबी जी।
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मुस्लिम धार्मिक विद्वान बताते हैं कि अंगूठी में जो सूरत निकाली गई है वह इसलिए कि पहले बादशाह, अमीर आदि स्तर के लोग जिस निशान से दस्तावेजों पर मोहर का इस्तेमाल करते थे। इसका कोई नाजायज इस्तेमाल (दुरुपयोग) न कर ले, इसलिए उसे वह अंगूठी बनाकर पहनने लगे। इसका नतीजा यह हुआ कि देखा देखी लोग शौकिया इस्तेमाल करने लगे। इसलिए इसके पहनने का रिवाज हो गया है और लोग सोने व चांदी की अंगूठियां पहनने लगे।
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... अब चूंकि मौजूदा दौर में वैसी मोहर की जरूरत नहीं है क्योंकि मोहर दस्तयाब (उपलब्ध) है। फिलहाल मर्द के अंगूठी पहनने का जो रिवाज है वह साढ़े चार माशा का है। उसकी वजह यह है कि अंगूठी में नक्श शामिल कर लेते हैं। अब अगर कोई जीनत (शृंगार) के लिए पहनेगा तो जायज नहीं। जीनत के लिए औरतें सोने चांदी के जेवर इस्तेमाल कर सकती हैं क्योंकि उसको जीनत के लिए जेवर पहनना जायज है। जबकि मर्द के लिए जीनत जायज नहीं है। क्योंकि शरियत में उनके लिए यह नजायज है।
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- मौलाना डॉ. एजाज अंजुम, मदरसा मंजरे इस्लाम दरगाह आला हजरत।
ॎ मर्द का जेवर व जीनत तो उसकी बहादुरी और मेहनत है। जेवर और जीनत कमजोर बनाता है। इस्लाम में मर्द को आगे बढ़ाया गया है। उसे बहादुरी और मेहनत के लिए बनाया गया है। वह अपने मुल्क की हिफाजत कर सके, जंग लड़ सके, कारोबार और नौकरियां कर सके। मर्द जेवर और जीनत में पडे़गा तो वह कमजोर बनेगा और नजाकत पैदा होगी। ऐसे में वह अपने हिस्से की जिम्मेदारी पूरी नहीं कर सकेगा। इस लिए उसे जेवर तो क्या अंगू्ठी तक पहनने से मना किया गया है। यह हदीस का हुक्म है।
- मुफ्ती सगीर अहमद बरकाती, प्रधानाचार्य दारुल उलूम मजहरे इस्लाम मस्जिद बीबी जी।