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Bareilly News: चहेती फर्मों को 6.03 करोड़ का अनियमित भुगतान, अनुबंध से पहले कार्यादेश

Tue, 01 Jul 2025 02:22 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 01 Jul 2025 02:22 AM IST
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Irregular payments of Rs 6.03 crore to favourite firms, work order before contract
बरेली । रुहेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियमों को दरकिनार कर मानव संसाधन और वाहनों की किरायेदारी के नाम पर 6.03 करोड़ रुपये का भुगतान चहेती फर्मों को कर दिया। उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग का ठेका देने में इतनी जल्दबाजी दिखाई कि अनुबंध से ही पहले कार्यादेश जारी कर दिया। इस तरह जिम्मेदारों ने निजी आर्थिक हित साधते हुए विश्वविद्यालय को बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाया है। लेखा परीक्षा विभाग की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।
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10 जून को कुलपति को भेजी गई स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2022-23 में विश्वविद्यालय प्रशासन ने जेम पोर्टल को दरकिनार कर मानव संसाधन और वाहन किराये पर लेने के नाम पर अनियमित रूप से 6.03 करोड़ रुपये का भुगतान दिया। इस तरह शाइन एंड सिंद सिक्योरिटी, सिटी एलर्ट सिक्योरिटी, आरएस कक्कर जैसी कार्यदायी संस्थाओं को अनियमित लाभ पहुंचाया है।
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नियम के विपरीत स्कैनिंग का ठेका

लेखा परीक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा के दौरान मूल्यांकन से असंतुष्ट छात्रों को उत्तर पुस्तिकाएं ई-मेल पर भेजने के लिए स्कैनिंग कार्य का ठेका अथर्वा सिस्काम को दिया गया था। एक फरवरी 2023 को संस्था को 26.61 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। विश्वविद्यालय का संस्था से 10 दिसंबर 2021 को अनुबंध हुआ था, जबकि कार्यादेश 12 अक्तूबर 2021 को ही जारी कर दिया गया था। बिना अनुबंध के कार्यादेश जारी करना अनियमित और आपत्तिजनक है। ऑडिट टीम को इसकी फाइल भी नहीं मिल पाई। इस वजह से स्पष्ट नहीं हो पाया कि यह कार्य जेम पोर्टल के माध्यम से कराया गया या नहीं। ई-मेल पर उत्तर पुस्तिकाओं के देने के बदले छात्रों से कितनी धनराशि ली गई एवं इस मद में कुल कितनी धनराशि विश्वविद्यालय को मिली, ये भी स्पष्ट नहीं है।
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इनकम टैक्स पेनाॅल्टी के भुगतान में भी झोल

रिपोर्ट के मुताबिक, 11 जनवरी 2023 को विश्वविद्यालय प्रशासन ने 1,54,942 रुपये का भुगतान इनकम टैक्स पेनाॅल्टी के लिए किया था। साक्ष्य के अभाव में ऑडिट टीम को पता नहीं चल पाया कि इनकम टैक्स विभाग ने यह पेनाॅल्टी किस संदर्भ में लगाई थी। ऑडिट टीम ने तर्क दिया है कि पेनॉल्टी से बचने के लिए आहरण-वितरण अधिकारी को समय से करों की अदायगी करनी चाहिए थी। संवाद
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